Iran Israel War: इसराइल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी, बेंगलुरु के 18 सदस्यीय दल को मिला जीवनदान

Iran Israel War: इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इसराइल में फंसे बेंगलुरु पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (B.PAC) के 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य सुरक्षित रूप से गुरुवार 19 जून को देर रात को बेंगलुरु लौट आए। प्रतिनिधिमंडल लगभग एक सप्ताह तक अनिश्चितता और तनाव पूर्ण स्थिति में फंसा रहा।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समूह 7 जून से 13 जून तक एक विशेष दौरे पर इजरायल गया था। यह दौरा भारत के विदेश मंत्रालय और अन्य संगठनों के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य शहरी नीतियों में नागरिक भागीदारी, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और एनवायरमेंट सस्टेनेबिलिटी जैसे मुद्दों को समझना था।

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Israel में अचानक बिगड़े हालात, उड़ान रद्द

13 जून को निर्धारित तेल अवीव से वापसी की योजना उस समय अस्त-व्यस्त हो गई जब इजरायल एयर स्पेस को अचानक बंद कर दिया गया। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते लिया गया था। इस कारण प्रतिनिधिमंडल वहां फंस गया और उनकी सुरक्षित वापसी पर सवाल खड़े हो गए।

Iran- Israel War के बीच ऐसे शुरू हुआ वापसी अभियान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए B.PAC ने तुरंत भारतीय विदेश मंत्रालय, इसराइली दूतावास और कर्नाटक सरकार से संपर्क साधा। साथ ही इसराइल में स्थित भारतीय दूतावास से भी जमीनी सहायता ली गई। इन सभी एजेंसियों के तालमेल से वापसी की योजना पर काम शुरू हुआ।

B.PAC के मैनेजर शरथ एस.आर. ने इस संकट की घड़ी में इजरायल की कौंसल जनरल ऑर्ली वाइट्ज़मैन के योगदान को विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा, "ऑर्ली वाइट्ज़मैन प्रतिनिधिमंडल के साथ ही थीं और उन्होंने संकट के समय पूरे समूह को सुरक्षित स्थानों (बंकरों) तक पहुंचाने, परिवहन और सुरक्षा की व्यवस्था कराने में अहम भूमिका निभाई।"

हवाई मार्ग से सीधी उड़ानें रद्द होने के कारण, समूह को सड़क मार्ग से टेल अवीव से जॉर्डन की सीमा तक ले जाया गया। वहां से उन्हें एक विशेष उड़ान के जरिए बुधवार रात मुंबई लाया गया और अंततः गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे वे सभी बेंगलुरु पहुंचे।

शरथ ने कहा, "उनकी सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। सभी सदस्य और उनके परिजन अब बेहद राहत महसूस कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे राहत अभियान में कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया - विशेषकर विदेश मंत्रालय और कर्नाटक सरकार।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन था?

प्रतिनिधिमंडल में पर्यावरण एक्टिविस्ट, शहरी नीति विशेषज्ञ, और पर्यावरणीय सततता से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। इन सभी ने संकट की स्थिति में मिली तत्पर सहायता और भारत सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आभार जताया।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब विभिन्न सरकारी और राजनयिक संस्थान मिलकर काम करते हैं, तो संकट की स्थिति में भी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। B.PAC की इस यात्रा का उद्देश्य भले ही अध्ययन और सीखना था, लेकिन यह अनुभव उनके लिए जीवनभर याद रखने वाला बन गया।

बेंगलुरु लौटे प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अब सुरक्षित हैं और इस घटनाक्रम के बाद भारत सरकार की वैश्विक संकट प्रबंधन क्षमता की सराहना हो रही है। यह घटना इस बात की मिसाल है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए देश किस स्तर तक जा सकता है।

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