राज देव सिंह: वो IPS, जो इंदिरा गांधी सरकार के सामने नहीं झुके, MP बृजलाल का चौंकाने वाला खुलासा, VIDEO

MP BrijLal on IPS Raj Dev Singh: आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी और भाजपा के राज्यसभा सांसद बृज लाल ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने सत्ता और प्रशासनिक ईमानदारी के रिश्ते पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उन्होंने बताया कि 1977 बैच के आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग लेने वाले उनके गुरु और सीबीआई के पूर्व निदेशक राज देव सिंह कैसे इंदिरा गांधी और संजय गांधी के दबाव के आगे नहीं झुके।

बृजलाल ने यह किस्सा अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया है, जिसमें उन्होंने न केवल दिवंगत राज देव सिंह को याद किया, बल्कि उनके दिल्ली स्थित उसी सरकारी बंगले का वीडियो भी साझा किया जिसमें वे अब बतौर राज्यसभा सांसद रह रहे हैं।

MP BrijLal on IPS Raj Dev Singh

IPS Raj Dev Singh: कौन थे राज देव सिंह?

राज देव सिंह बिहार कैडर के 1949 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और उस बैच के टॉपर भी। वे सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकैडमी, हैदराबाद (SVPNPA) में निदेशक भी रहे और 1977 बैच सहित कई बैचों के आईपीएस अधिकारियों को ट्रेनिंग दी। बृज लाल भी उन्हीं में से एक हैं, जो उन्हें अपना 'गुरु' मानते हैं।

जब संजय गांधी ने दिखाई सत्ता की ताकत

25 जून 1975 को लागू हुए आपातकाल के बाद बनी जनता पार्टी सरकार ने इमरजेंसी में हुए कथित अत्याचारों की जांच के लिए शाह कमीशन बनाया था। सीबीआई निदेशक के तौर पर राज देव सिंह को इस रिपोर्ट पर कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन 1980 में जब इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में लौटीं, तो उनके बेटे संजय गांधी ने राज देव सिंह पर दबाव बनाना शुरू किया।

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बृजलाल के मुताबिक, एक दिन जब राज देव सिंह अपने सीबीआई मुख्यालय पहुंचे तो देखा कि संजय गांधी खुद उनकी कुर्सी पर बैठे हैं, पैर टेबल पर रखे हुए हैं और तत्काल शाह कमीशन की फाइल मांग रहे हैं। गृह मंत्री भी साथ थे। लेकिन ईमानदार अफसर राज देव सिंह ने साफ इनकार कर दिया।

संजय गांधी ने दो घंटे में करवा दिया था ट्रांसफर

शाह कमीशन की फाइल देने से इनकार के दो घंटों के भीतर ही राज देव सिंह का तबादला कर दिया गया और उन्हें बिहार कैडर लौटा दिया गया। उन्होंने तुरंत वीआरएस लिया और दिल्ली छोड़कर रांची व फिर पटना चले गए। लेकिन इंदिरा सरकार के इस अपमानजनक व्यवहार से वे गहरे मानसिक आघात में आ गए। 1 अप्रैल 1986 को मात्र 62 वर्ष की आयु में उनका दिल्ली के एम्स में निधन हो गया।

"वर्दी के संत" के सम्मान में बृजलाल की श्रद्धांजलि

बृज लाल ने राज देव सिंह को "वर्दी का संत" बताते हुए कहा कि वे अपने गुरु के उसी घर में रहकर गौरव महसूस करते हैं, जिसे सत्ता के दंभ ने तोड़ने की कोशिश की थी लेकिन उनका चरित्र और ईमानदारी कभी नहीं टूटी।

आपातकाल के 50 वर्षों बाद यह किस्सा उस दौर की एक ईमानदार अफसरशाही की याद दिलाता है, जो हर कीमत पर अपने कर्तव्य और नैतिकता के साथ खड़ी रही। राज देव सिंह की कहानी न केवल आज के अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी बताती है कि सच्चाई के लिए खड़े होने की कीमत भले भारी हो, लेकिन उसकी गूंज इतिहास में अमर हो जाती है।

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