मोदी को घेरने के लिए जनता परिवार महामोर्चे में तब्दील: दुश्मन बने दोस्त
नई दिल्ली। गुरुवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के घर पर जो मीटिंग हुई वह भारतीय राजनीति के लिए कोई नई बात नहीं थी। 90 के दशक से भारतीय राजनीति थ्रड फ्रंट यानी तीसरे मोर्चे का गवाह बनती आ रही है।

हां, अगर कुछ नया था तो वह था इस मीटिंग की टाइमिंग। झारखंड विधानसभा चुनावों और संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले हुई यह मीटिंग कई इशारों के बारे में बयां करती है।
साथ-साथ बैठे सारे दुश्मन
नरेंद्र मोदी और बीजेपी के अश्वमेघ यज्ञ पर लगाम लगाने के लिए लखनऊ में जो 'जनता दरबार' लगा था, उसमें मुलायम सिंह यादव के साथ जनता दल-युनाइटेड (जदयू) के नीतिश कुमार के साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लालू प्रसाद यादव तो मौजूद थे ही साथ में बेंगलुरु से जनता दल-सेक्यूलर (जद-एस) के नेता एच.डी.देवगौड़ा के अलावा कई और नेता इसमें मौजूद थे।
मीटिंग खत्म होने के साथ ही साथ संसद में एक संयुक्त मोर्चा बनाने की घोषणा हो चुकी थी। जदयू नेता तथा बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार का इस बैठक के ने मीडिया से कहा कि बैठक का उद्देश्य उन सभी पार्टियों को एकजुट करना था, जो पुराने जनता दल के टूटने से बने थे।
जो कभी एक दूसरे का चेहरा देखने से कतराते थे, वह मोदी और बीजेपी को परास्त करने के मकसद से अब साथ आ रहे हैं। दुनिया जानती है कि कैसे राजनीति में धुर विरोधी रहने वाले नीतिश कुमार ने लालू प्रसाद यादव का दामन थाम लिया है।
इन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए कभी देवेगौड़ा के विरोधी रहे मुलायम सिंह यादव अब उन्हीं के साथ बैठने को तैयार हो गए हैं।
लेकिन वाम मोर्चा रहा नदारद
नीतीश ने कहा, "समस्त राजनीतिक परिदृश्य पर हमने चर्चा की। हम संसद में एक संयुक्त मोर्चे का गठन करेंगे। कई मुद्दों पर हमारे विचार समान हैं और समान विचारधारा वाली पार्टियों को हम एकजुट करेंगे।"
यह बैठक लोकसभा चुनाव से पहले गैर कांग्रेसी तथा गैर भाजपा मोर्चे के गठन की कोशिशें नाकाम होने के कई महीने बाद हुई है।
वाम दलों को बैठक में नहीं बुलाया गया था। नीतीश ने हालांकि कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टियों को वह एकजुट करने का प्रयास करेंगे और वाम दलों से बातचीत की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
लोकसभा में सपा के पांच, राजद के चार, जदयू के दो एवं जद-एस के दो सदस्य हैं।












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