Indus Water Treaty: पाकिस्तान जाने वाला भारत का पानी जल्द रोकने पर काम शुरू

नई दिल्ली- भारत ने सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाला भारत के हिस्से का पानी रोकने के लिए प्राथमिकता के साथ काम करना शुरू कर दिया है। बुधवार को इस बात की जानकारी खुद जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी है। मोदी सरकार पिछले कार्यकाल में इस तरह के संकेत दे चुकी थी, लेकिन अब उसपर अमल शुरू कर दिया गया है।

जल्दी से जल्द पानी रोकना चाहती है सरकार

जल्दी से जल्द पानी रोकना चाहती है सरकार

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से का बहुत सारा पानी अभी पाकिस्तान की ओर बह जाता है। उनके मुताबिक रावी, ब्यास और सतलज नदियों के कैचमेंट एरिया का पानी सालों भर पाकिस्तान में बहता रहता है। उन्होंने कहा है कि ऐसे पानी की बर्बादी रोकने के लिए "हम हाइड्रोलॉजिकल और टेक्नोफिजिबिलिटी स्टडीज पर काम कर रहे हैं। हमनें निर्देश दिया है कि यह काम शीध्रता के साथ इसे पूरा किया जाना चाहिए,ताकि हम इसे जल्द लागू कर सकें।"

अपने हिस्से का सारा पानी रोक देगी सरकार

भारत सरकार के जल शक्ति मंत्री का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब आर्टिकल 370 की महत्वपूर्ण हिस्सों को खत्म करने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और दुनिया भर में घूम-घूम कर कश्मीर का रोना रो रहा है। लेकिन, लगता है कि अब मोदी सरकार ने पाकिस्तान की नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली है। शेखावत ने स्पष्ट किया है, "जो हमारे हिस्से का पानी है, ऐसे सारे पानी को जो हमारे हिस्से का है, साल में बहकर पाकिस्तान जाता है.. बरसात के समय में भी जाता है....उस सबको हम किस तरह से डायवर्ट करके अपने किसानों के लिए, अपने उद्योगों के लिए बिजली पैदा करने के लिए और अपने नागरिकों के पीने के पानी के लिए उपयोग में ले सकते हैं.... इसपर हम प्राथमिकता के साथ काम कर रहे हैं।" बता दें कि पिछले मई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा था कि पाकिस्तान की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के समर्थन को देखते हुए भारत पाकिस्तान की ओर बहने वाले भारत के नदियों के पानी को रोकने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। हाल ही में मोदी के एक और मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने भी कहा था कि आने वाले वक्त में सिंधु नदी का पानी वे राजस्थान के बीकानेर जैसे जिलों तक लेकर आएंगे।

1960 में हुई थी सिंधु जल संधि

1960 में हुई थी सिंधु जल संधि

सिंधु जल समझौते पर 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक पूर्वी हिस्से की तीनों नदियों रावी, ब्यास और सतलज पर भारत का अधिकार है। इसके बदले भारत पश्चिमी हिस्से के तीनों नदियों सिंधु, चेनाब और झेलम के जल को बेरोक-टोक पाकिस्तान में बहने देगा। समझौते के मुताबिक भारत पश्चिमी हिस्से की नदियों के जल का भी इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन इस तरह से कि पाकिस्तान को उससे कोई नुकसान न हो। भारत उन नदियों के पानी का घरेलू इस्तेमाल और सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिए भी कर सकता है, बशर्ते वह समझौते के मुताबिक हो।

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