इंडिगो पर 1.20 करोड़ तो एयर इंडिया और स्पाइसजेट पर इतने का जुर्माना, 'टरमैक लंगर' पर मुंबई एयरपोर्ट भी नपा
डेकोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने बुधवार को कई सख्त फैसले लिए। जिसमें हवाई सेवाएं देने वाली एयरलाइंस कंपनी इंडिगो पर 1.20 करोड़ रुपये और एयर इंडिया व स्पाइसजेट पर 30-30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, मुंबई एयरपोर्ट ऑपरेटर एमआईएएल पर 60 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
डीजीसीए ने इसके पीछे उनकी लापरवाही और 2007 के वायु सुरक्षा परिपत्र 04 में निर्धारित सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहने की वजह बताई है। आइए विस्तार से जानें क्या है मसला?

दरअसल, हाल ही में 14 जनवरी को दिल्ली में कम दृश्यता के कारण गोवा से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E2195 को मुंबई डायवर्ट किया गया, जो विवाद का कारण बन गई। डायवर्ट की गई फ्लाइट के यात्रियों को टरमैक पर बैठाया गया था और वहां जलपान प्रदान किया गया था। वायरल वीडियो में मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो के विमान के यात्रियों को रनवे पर ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठकर भोजन करते हुए देखा गया था। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने उस घटना के संबंध में इंडिगो और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) को नोटिस भेजा था। जिसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इस घटना पर मुंबई एयरपोर्ट ऑपरेटर एमआईएएल पर जुर्माना लगाया गया है।
नोटिस में स्थिति को संभालने और हवाई अड्डे पर यात्री आराम की सुविधा प्रदान करने में सक्रिय उपायों की कमी के लिए इंडिगो और एमआईएएल की आलोचना की गई। विमान को संपर्क स्टैंड के बजाय रिमोट बे (सी-33) को सौंपा गया था, जिससे टर्मिनल पर टॉयलेट और जलपान जैसी बुनियादी सुविधाओं तक यात्रियों की पहुंच सीमित हो गई जिससे स्थिति और जटिल हो गई। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यात्री सुविधा, सुरक्षा मानदंडों और परिचालन संबंधी मुद्दों की अनदेखी के लिए उड़ान संचालन की आलोचना करते हुए इस घटना को 'थके हुए और परेशान यात्रियों के लिए प्रतिकूल और अस्वीकार्य अनुभव'बताया।
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एयर इंडिया और स्पाइसजेट पर क्यों लगा जुर्माना जानें?
डीजीसीए ने एयरलाइंस ऑपरेटरों को पायलटों की रोस्टरिंग के संबंध में जारी निर्देशों का पालन करने में विफल रहने के लिए एयर इंडिया और स्पाइसजेट पर 30-30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एयर इंडिया और स्पाइसजेट को यह सुनिश्चित नहीं करने के लिए नोटिस भेजा गया था कि पिछले कुछ दिनों में कम दृश्यता वाले घंटों के दौरान दिल्ली के घने कोहरे में केवल प्रशिक्षित पायलट ही उड़ानें संचालित कर रहे थे, जिसके कारण बड़ी संख्या में उड़ानें बदलनी पड़ीं।












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