भारतीय रेल में मुश्किल होता सफर, 66 लाख वेटिंग टिकट रेलवे नहीं कर सका कंफर्म
नई दिल्ली। मौजूदा वित्तीय वर्ष की बात करें तो लाखों ऑनलाइन रेल टिकटों को इसलिए रद्द हो गए क्योंकि रेलवे उन्हें कंफर्म नहीं कर सका। मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले आठ महीनों की बात करें तो तकरीबन 65.69 लाख टिकट कंफर्म नहीं होने की वजह से रद्द हो गए। इन सभी टिकटों को ऑनलाइन बुक किया गया था, लेकिन ये टिकट कंफर्म नहीं हो सके, जिसके चलते ये रद्द हो गए। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में आरटीआई द्वारा मिली जानकारी में यह बात सामने आई है।

हर महीने 8 लाख टिकट रद्द
आरटीआई में इस बात का खुलासा हुआ है किक तकरीबन आठ लाख टिकट हर महीने कंफर्म नहीं होने की वजह से अपने आप कैंसल हुए। इस आंकड़े से इस बात का अंदाजा लगता है कि बड़ी संख्या में जो यात्री ऑनलाइ टिकट बुक कराते हैं उनके टिकट रद्द हो जाते हैं। यह आरटीआई चंद्रशेखर गौड़ जोकि नीमच जिले के रहने वाले थे उन्होंने दायर की थी। उन्होंने बताया कि 6568852 टिक ऑनलाइनट आईआरसीटीसी द्वारा बुक किए गए थे, जोकि अपने आप कंफर्म नहीं होने की वजह से रद्द हो गए।

अप्रैल से नवंबर के बीच के आंकड़े
ये तमाम टिकट अप्रैल 2019 से नवंबर 2019 के बीच के हैं। उन्होंने बताया कि वेटिंग लिस्ट में टिकट बुक होने के बाद रेलवे इन टिकटों को कंफर्म करने में असमर्थ रहा, जिसकी वजह से फाइनल चार्ट बनने के समय ये टिकट अपने ऑफ रद्द हो गए। जिन लोगों को टिकट रद्द हुए उनके पैसे अपने आप उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। कैंसलेशन फीस के कटने के बाद पैसा वापस आईआरसीटीसी के पास आता है, जिसके बाद आईआरसीटीसी इस पैसे को वापस यात्री के खाते में ट्रांसफर कर देता है।

निवेश को बढ़ावा देंगे
रिपोर्ट के अनुसार आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है कि रेलवे मंत्रालय भारी संख्या में रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों को सीट देने में असमर्थ है। वहीं हाल ही में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बयान दिया था कि कुछ ट्रेनों में टिकटों की मांग 150 फीसदी अधिक है। पीयूष गोयल ने बताया था कि भारतीय रेल अगले 12 वर्ष में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश को लाने की कोशिश में जुटा है, जिससे कि रेलवे को और बेहतर किया जा सके और इसका प्रसार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा निवेश सिर्फ सरकार और रेल बजट से लाना संभव नहीं है, लिहाजा इसके लिए हम पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल करेंगे।












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