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अरविंद कृष्णा होंगे IBM के नए CEO, अमेरिकी कंपनी के बॉस बनने वाले तीसरे भारतीय

वॉशिंगटन। अमेरिका की आईटी कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (आईबीएम) ने भारतीय मूल के अरविंद कृष्णा (57) को कंपनी का नया सीईओ नियुक्त किया है। वह आईबीएम सीईओ के तौर पर गिन्नी रोमेटी की जगह लेंगे। 62 साल की रोमेटी एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर इस साल के अंत तक बनी रहेंगी। कंपनी के साथ 40 साल के लंबे करियर के बाद वे इस साल के आखिर में रिटायर होने जा रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई के बाद कृष्णा अमेरिका स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रमुख बनने वाले तीसरे भारतीय हैं।

9 लाख करोड़ की अमेरिकी कंपनी IBM के बॉस बने अरविंद कृष्णा

9 लाख करोड़ की अमेरिकी कंपनी IBM के बॉस बने अरविंद कृष्णा

करीब 8.93 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप वाली कंपनी आईबीएम ने 57 साल के अरविंद कृष्णा को 6 अप्रैल से सीईओ की नई जिम्मेदारी देने का ऐलान किया हैं। कृष्णा वर्तमान में आईबीएम के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। जहां वह आईबीएम बिजनेस यूनिट का नेतृत्व करते हैं। अरविंद की मौजूदा जिम्मेदारियों में आईबीएम क्लाउड, आईबीएम सिक्योरिटी और कॉग्निटिव एप्लिकेशन बिजनेस और आईबीएम रिसर्च भी शामिल हैं। इससे पहले वह आईबीएम के सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के विकास और निर्माण संगठन के महाप्रबंधक थे। वे आईबीएम के कई डेटा-संबंधित व्यवसायों का निर्माण और नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने साल 1990 में आईबीएम को ज्वाइन किया था।

आईआईटी कानपुर के पास आउट हैं अरविंद

आईआईटी कानपुर के पास आउट हैं अरविंद

अरविंद कृष्णा की नियुक्ति को लेकर सीईओ रोमेटी ने कहा है कि आईबीएम में अगले दौर के लिए अरविंद बेस्ट सीईओ हैं। वह काफी अच्छे टेक्नोलॉजिस्ट हैं, जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड, क्वांटम कम्प्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी हमारी अहम तकनीकों को विकसित किया हैं। अरविंद कृष्णा की पढ़ाई की करें तो उन्होंने आईआईटी कानपुर से अंडरग्रेजुएट डिग्री ली है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ इलनॉइज, अर्बाना शैंपेन से पीएचडी की है।

आईबीएम को अब तक मिल चुके हैं तीन नोबेल पुरस्कार

आईबीएम को अब तक मिल चुके हैं तीन नोबेल पुरस्कार

अरविंद ने कहा, आईबीएम के अगले सीईओ चुने जाने से रोमांचित हूं। मुझ पर भरोसा जताने के लिए रोमेटी और बोर्ड की सराहना करता हूं। कम्प्यूटर कंपनियों में आईबीएम एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसने अब तक तीन नोबेल पुरस्कार, चार टूरिंग पुरस्कार, पांच राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी पदक तथा पांच राष्ट्रीय विज्ञान पदक जीते हैं। यहीं नहीं कंपनी के नाम दुनिया के सर्वाधिक पेटेंट होने का भी गौरवमयी इतिहास जुड़ा हुआ है। 16 जून 1911 को कंपनी ने अपना कार्यक्षेत्र बदल कर कम्प्यूटर रिसर्च कर लिया तथा 1924 में अपना वर्तमान नाम आईबीएम अपनाया। पिछले साल आईटी कंपनी आईबीएम 34 अरब डॉलर (2.34 लाख करोड़ रुपए) में सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट को खरीद लिया है। आईबीएम के 108 साल के इतिहास में यह उसका सबसे बड़ा अधिग्रहण था।टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में यह दुनिया का तीसरा बड़ा अधिग्रहण था।

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