भारत के हर नागरिक पर लगभग डेढ़ लाख का कर्ज? IMF की चेतावनी पर मोदी सरकार ने क्या कहा?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत सरकार इसी रफ्तार से कर्ज लेती रही तो आनेवाले कुछ सालों में ये कर्ज बढ़कर देश के जीडीपी अनुपात के 100% तक पहुंच सकता है।
भारत पर कुल कर्ज 205 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। मार्च 2023 में देश पर कुल 200 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इसका अर्थ ये हुआ कि बीते 6 महीनों में देश के ऊपर 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ा है।

हालांकि, आईएमएफ की रिपोर्ट से असहमति जताते हुए कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह सबसे खराब स्थिति होगी लेकिन ये सच नहीं है। साथ ही सरकार ने कहा कि देश के ऊपर जो कर्ज है वो ज्यादातर भारतीय रुपए में है इसलिए चिंता की बात नहीं है।
मंत्रालय का कहना है कि आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात, जो 2022/23 में 81% था, अनुकूल परिस्थितियों में घटकर 70% से नीचे आ सकता है।
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मंत्रालय ने कहा,"रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सामान्य सरकारी ऋण मध्यम अवधि में सकल घरेलू उत्पाद के 100% से अधिक होगा, यह गलत है।"
आपको बता दें, सितंबर 2023 में भारत पर कुल कर्ज 205 लाख करोड़ रुपए का हो गया। इस में केंद्र और राज्य सरकारों के कर्ज शामिल हैं। अगर इस राशि को भारत की कुल आबादी के हिसाब से विभाजित करें और भारत की आबादी को 142 करोड़ माने तो इस हिसाब से आज के समय में देश में हर व्यक्ति के ऊपर 1 लाख 40 हजार रुपए से ऊपर का कर्ज है।
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क्यों कोई देश लेता है कर्ज?
किसी भी देश का खर्च अगर वहां की आमदनी से ज्यादा हो तो वहां की सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। सरकार के कर्ज लेते ही राजस्व का घाटा बढ़ जाता है। आमतौर पर ये घटा तब ज्यादा होता है जब सरकार कर्ज के पैसे को ऐसी जगह खर्च करती है जहां से रिटर्न नहीं आता।
9 सालों में भारत पर कितना कर्ज बढ़ा है?
आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में बीजेपी के केंद्र की सत्ता में काबिज होने के बाद से अब तक केंद्र सरकार ने विदेश से कुल 19 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। जबकि 2005 से 2013 तक UPA सरकार ने 9 साल में करीब 21 लाख करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज लिया था।
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