- 40 डिग्री में चीन से मुकाबला करने के लिए तैयार है सेना, अमेरिका से मिले ये विशेष कपड़े
नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद को देखते हुए भारतीय सेना सर्दियों की तैयारी में जुटी हुई है। भीषण ठंड से मुकाबला करने के लिए सेना में जवानों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। ठंड से बचाव के लिए सेना ने अमेरिका से गर्म कपड़े खरीदे हैं। जिसकी पहली खेप भारत पहुंच चुकी है। इन कपड़ों का इस्तेमाल सेना के जवान करेंगे। अत्यधिक ठंडे मौसम के कपड़ों के आपातकालीन अधिग्रहण से भारतीय सेना के जवानों को लद्दाख सेक्टर में जबरदस्त सर्दियों के मौसम में मदद मिलेगी।
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इस बार 30 अतरिक्त सैनिक हैं तैनात
भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख यानि पेंगांग झील के पूर्वी किनारे पर ठाकुंग से लेकर रेजांग ला तक पर तैनात हैं। सूत्रों के मुताबिक, सेना पूर्वी लद्दाख सेक्टर और सियाचिन में पश्चिमी मोर्चे समेत पूरे लद्दाख में तैनात सैनिकों के लिए 60 हजार कपड़ों के सेट का स्टोरेज रखती है। इस साल 30 हजार अधिक सेट की आवश्यकता थी, क्योंकि चीन की आक्रामकता को देखते हुए सीमा पर करीब 90 हजार सैनिकों को तैनात किया गया है।

कपड़ों के साथ मिली ये स्पेशल राइफल
सेना और वायुसेना ने जुलाई से ही यहां की सर्दियों की तैयारी शुरू कर दी थी। एक बड़े अभियान के तहत राशन, केरोसिन हीटर, खास कपड़े, टेंट्स और दवाइयों को पूरी सर्दी के लिए जमा कर लिया गया है। बेहद ठंडे मौसम में सैनिकों के इस्तेमाल के लिए खास कपड़ों के 11000 सेट हाल ही में अमेरिका से लाए गए हैं। भारत को अमेरिका से कई हथियार मिल रहे हैं। जिनमें विशेष बलों के लिए कई असॉल्ट राइफलें और साथ ही पैदल सेना के जवानों के लिए SiGSauer असॉल्ट राइफलें शामिल हैं

सेना को सियाचिन में तैनाती का चार दशकों का अनुभव
लद्दाख में एलएसी से सटे ज्यादातर क्षेत्रों में सर्दियों में तापमान -25 से -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। कुछ स्थानों पर यह -50 डिग्री तक पहुंच जाता है। भारी बर्फ के बीच आगे बढ़ना नामुमकिन रहता है। भारतीय सेना को सियाचिन में तैनाती का चार दशकों का अनुभव है, लेकिन सियाचिन में तैनात सैनिकों की तादाद इस बार लद्दाख में तैनाती से काफी कम है। सैनिकों को ऊंचाई वाली जगह पर तैनात करने के लिए एक तय प्रक्रिया के तहत एक्लमटाइजेशन से गुजारा जाता है। 9 से 12 हजार फीट पर तैनाती से पहले सैनिक को उसी वातावरण में 6 दिन तक एक्लमटाइजेशन किया जाता है। 12 से 15 हजार फीट पर चार दिन, और 15 हजार से ऊपर हर 1000 फीट पर दो दिन का एक्लमटाइजेशन किया जाता है।












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