मुंबई में सेना बनाएगी एलफिंस्टन पुल, पूर्व सैन्यकर्मियों ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली। मुंबई के एलफिंस्‍टन रेलवे स्‍टेशन के ब्रिज हादसे के बाद अब सरकार ने सेना को यहां नया ब्रिज बनाने की जिम्मेदारी दी है। सरकार के इस फैसले की तीखी आलोचना हो रही है। सबसे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर लिखा है कि सेना का काम युद्ध के लिए ट्रेनिंग देना है ना कि सिविलियन काम करना। वहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा है कि बेहद गंभीर परिस्थिति में सेना सबसे आखिरी विकल्प होता था लेकिन अब लगता है कि स्पीड डायल में सेना का नंबर पहले स्थान पर आ गया है। सरकार के इस फैसले पर कई सेना से रिटायर्ड अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।

 मुंबई में सेना बनाएगी एलफिंस्टन पुल, पूर्व सैन्यकर्मियों ने उठाए सवाल

एलफिंस्‍टन रेलवे स्‍टेशन के ब्रिज को बनाने की जिम्मेदारी बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप (बॉम्बे सैपर्स) को सौंपा गया है। बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार और रेल मंत्रालय कौ सौंपेगा जिसके बाद पुल निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। जल्दी पुल बनाने का अनुभव सेना के सैपर्स यूनिट जैसे विशेषज्ञों के पास उपलब्ध है। जिस वजह से सेना को ये जिम्मेदारी दी गई है। सरकार के इस फैसले की सेना के कई रिटायर्ड अफसरों ने आलोचना की है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आर्मी के डिप्टी चीफ रहे लेफ्टिनेंट मोहिंदर पूरी ने कहा है 'सेना के संसाधनों का उपयोग न्यायिक रूप से किए जाने चाहिए जब तक कोई आपातकालीन स्थिति नहीं है, तब तक मैं नागरिक कार्यों में सेना को लगाने को मैं उचित नहीं मानता हूं।' मेजर जनरल जीडी बख्शी (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि जब तक वहां कुछ राष्ट्रीय स्तर की आपदा या आपातकालीन स्थिति नहीं होती है तब तक हम एनडीआरएफ और अन्य आपदा प्रबंधन दल का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तब तक हमें सेना का उपयोग भी नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा 'सेना एक उपकरण है जिसे अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसे पहले सहारा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। प्राकृतिक आपदा के मामले में पूछे जाने से पहले ही सेना हमेशा सामने आती है। लेकिन, यहां, जब हमारे पास रेलवे और राज्य प्राधिकरण की पूरी मशीनरी है, तो इसका उपयोग करने का सवाल बिल्कुल नहीं उठना चाहिए।'

लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग (सेवानिवृत्त) कहते हैं कि यह सरकार की ओर से 'अक्षमता' दिखाता है। 'इस तरह के एक छोटे से नागरिक कार्यों के लिए सेना का प्रयोग स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। राज्य 'अक्षम' हो गया है कि सेना को एक योगा समारोह के लिए मैट रखने और अब पुल ओवर पुल का निर्माण करने के काम दिया गया है।

कई जगहों पर हो चुका है सेना का इस्तेमाल
जिन लोगों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं, उनमें जम्मू एव कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ-साथ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर भी शामिल हैं, जो खुद सेना में रह चुके हैं। वर्ष 2010 में जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन किया गया था, एक अहम स्टेडियम के निकट बने पुल के टूट जाने पर भी सेना को बुलाया गया था, जिन्होंने रिकॉर्ड समय में पुल का पुनर्निर्माण किया था। पिछले साल सेना ने यमुना नदी पर भी एक तैरता पुल बनाया था, जब श्री श्री रविशंकर की 'आर्ट ऑफ लिविंग' का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, हालांकि कार्यक्रम पर्यावरण से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर विवादों में रहा था। इसी साल सेना की एक बटालियन को जल संसाधन मंत्रालय ने भी बुलाया था, ताकि गंगा नदी में अपशिष्ट पदार्थ फेंकने वालों पर कड़ी नजर रखी जा सके।

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English summary
indian Army upset over involvement in Mumbai Elphinstone rail bridge, amrinder singh criticizes
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