LAC पर चीन की हरकत के बाद भारतीय सेना ने कर ली थी बड़ी तैयारी, सामने आई अहम जानकारी
नई दिल्ली। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारत-चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानि एलएसी पर 4 मई से ही अपनी सेना को जमा करना शुरू कर दिया था। एएनआई की खबर के अनुसार सरकार के सूत्रों की माने तो इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों को जानकारी अगले दिन मिली। 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की जब बैठक हुई, इस दौरान पड़ोसी देश के चलते खड़ी हुई समस्या की जानकारी दी गई। सूत्र की मानें तो इस बैठक के दौरान ही सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्यों को इस बाबत जानकारी दी गई कि चीन की सेना की एलएससी के पास पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर गलवान नाला व अन्य इलाकों में गतिविधि बढ़ गई है।
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सेना ने चीन को जवाब देने की कर ली थी तैयारी
सूत्र के अनुसार भारतीय सेना 14 कॉर्प्स हेडक्वार्टर से चीन की गतिविधि पर नजर रख रही थी और खुद से ही चीन की आक्रामकता का उसी दिन जवाब देने की तैयारी कर रही थी। सूत्र ने इस बात का खंडन किया है कि सेना चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तेयार नहीं थी, जिसकी वजह से चीन की सेना ने एलएसी के करीब लद्दाख में अपना डेरा डाल दिया था। सेना का कहना है कि अगर हम तैयार नहीं होते सेना की तैनाती नहीं होती तो चीनी और इलाकों में भी जा सकते थे।

पीछे हटी चीनी सेना
बता दें कि पिछले कई दिनों से भारत-चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा था, लेकिन इस बीच खबर सामने आई है कि लद्दाख में अब कई जगहों से चीनी सैनिक पीछे चले गए हैं। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के सैनिक गलवान, पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 और हॉट स्प्रिंग इलाके से तकरीबन 2.5 किलोमीटर पीछे चले गए हैं। वहीं चीन के इस रुख के बाद भारत ने भी अपने कुछ जवानों को पीछे बुला लिया है। सेना ने अपने सैन्य वाहन और बाकी के उपकरण भी यहां से हटा लिए हैं।

राजनाथ सिंह बोले- स्वाभिमान से समझौता नहीं
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच चल रहे टकराव को खत्म करने के लिए 6 जून को द्वीपक्षीय वार्ता हुई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि चीन के साथ भारत की सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ता सकारात्मक रही है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चल रहा है। हम इसे जल्द से जल्द हल करना चाहते हैं। चीन के साथ बातचीत सैन्य और राजनयिक स्तर पर होती है। मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में है और हम भारत के गौरव और स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

6 जून को दोनों देशों के बीच हुई बात
चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर पिछले कुछ हफ्तों से आक्रामक रुख अपनाया हुआ था, इस मुद्दे पर कई बार बातचीत हुई थी लेकिन रिजल्ट सिफर ही रहा था। लेकिन 6 जून को शनिवार को भारत और चीन के कोर कमांडर्स के बीच मोल्डो में लंबी बैठक हुई , भारतीय दल का नेतृत्व 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया तो वहीं चीन की तरफ से मेजर जनरल लियू लिन बैठक में शामिल हुए, मीडिया सूत्रों के मुताबिक बैठक में भारत ने चीन से अप्रैल 2020 में जो स्थिति सीमा पर थी, उसको वापस बरकरार करने को कहा है।

अप्रैल माह से चल रहा विवाद
दरअसल एक महीने से भारत और चीन के बीच लद्दाख में दोनों सेनाओं को लेकर तनातनी चल रही है, पैंगोंग लेक के फिंगर 4 और फिंगर 8 को लेकर है विवाद गहराया हुआ है, अप्रैल से पहले सेना फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करने जाती थी लेकिन अब चीनी सेना भारतीय सेना को फिंगर 4 से आगे बढ़ने नही दे रही है, चीनी सेना की आपत्ति है भारत बॉर्डर पर सड़क क्यों बना रहा है जबकि भारत का कहना है सड़क वाली जगह बॉर्डर से दूर और उसका इलाका है।












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