फाइटर जेट्स की कमी से जूझती इंडियन एयरफोर्स, रूस से मिग-29 खरीदने की कोशिश में
नई दिल्ली। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) जो इस समय फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रही है, वह इस समय रूस के साथ बातचीत कर रही है। आईएएफ रूस से मिग-29 फाइटर जेट्स की तुरंत खरीद के लिए वार्ता जारी रखे है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की ओर से इस बात की जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ये जेट्स बहुत कम समय में इंडियन एयरफोर्स को दिए जा सकते हैं। आईएएफ की योजना एक नई स्क्वाड्रन के लिए 21 अतिरिक्त जेट्स को हासिल करने की है।

सन् 1980 में खरीदे गए मिग
मिग-29 फाइटर जेट्स को पहली बार सन् 1980 में खरीदा गया था। पिछले माह इस योजना पर चर्चा हुई थी और माना जा रहा है कि 6,000 करोड़ रुपए की लागत से यह डील हो सकती है। सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। अगर ऐसा होता है तो फिर हर जेट की कीमत करीब 285 करोड़ होगी। इस जेट में वेपन सिस्टम, ट्रेनिंग और वे सभी जरूरी सपोर्टिंग इक्विपमेंट्स होंगे जो किसी नई स्क्वाड्रन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राफेल से सस्ते होंगे मिग-29
रूस के साथ सरकारों के बीच एक संधि के तहत बातचीत को आगे बढ़ाया जा रहा है। मिग-29 अगर आईएएफ को मिलते हैं तो इनकी कीमत फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल जेट्स से भी कम होगी। भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल की डील की है और इस डील के तहत एक राफेल जेट की कीमत करीब 1,611 करोड़ रुपए है। हालांकि ये फाइटर जेट्स पुराने हैं और नया उत्पादन नहीं हो रहा है।

आईएएफ को फाइटर स्क्वाड्रन्स की जरूरत
इंडियन एयरफोर्स के पास इस समय मिग की तीन स्क्वाड्रन्स हैं। जो मिग वायुसेना प्रयोग कर रही है उसे इन हाउस बेस रिपेयर डिपो में अपग्रेड किया जाता है। मिग 80 के दशक के एयरक्राफ्ट हैं। साल 2008 में इंडियन एयरफोर्स ने 3,850 करोड़ की डील की थी जिसके तहत मिग का अपग्रेडेशन होना था और इसे लाइफ एक्सटेंशन देना था। मिग-29 को इस समय इंडियन नेवी प्रयोग कर रही हैऔर यह जेट आईएनएस विक्रमादित्य एयरक्राफ्ट कैरियर का अहम हथियार है। नेवी के पास इस समय 45 मिग-29 के/केयूबी फाइटर जेट्स हैं जिनके लिए साल 2010 में ऑर्डर दिया गया था।

कई जेट्स रिटायर होने की कगार पर
इंडियन एयरफोर्स इस समय कम होती फाइटर स्क्वाड्रन का सामना कर रही है। वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन्स की जरूरत है लेकिन उसके पास 31 स्क्वाड्रन ही है। अगले कुछ माह में राफेल जेट्स भारत में होंगे लेकिन इसके बाद भी स्क्वाड्रन पर कोई खासा असर नहीं पड़ेगा। अगले तीन वर्षों में मिग 21 और मिग 27 रिटायर हो जाएंगे और इसके बाद वायुसेना की क्षमता पर और ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।
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