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चीन को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा! साल के अंत तक LAC पर और ज्यादा ताकतवर होंगे हम

गलवान घाटी की घटना के तीन साल से ज्यादा गुजर चुके हैं। लेकिन, चीन के साथ तब जो नया विवाद शुरू हुआ था, वह पूरी तरह से अभी भी खत्म नहीं हो पाया है। भारत को पता है कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास कभी भी कोई नया बखेड़ा खड़ा कर सकता है। इसलिए अपनी तरफ से उसे उसी की भाषा में मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी जरूरी है।

इसी इरादे से साल के अंत तक लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक 20 से ज्यादा सड़कें सिर्फ इसी इरादे से तैयार की जानीं हैं, जो सामरिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए लद्दाख के दरबुक-श्योक दौलत बेग ओल्डी समेत सामरिक महत्त्व की अन्य सड़कों पर पूरा फोकस किया जा रहा है।

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चांगथांग शीत मरुस्थल से होकर गुजरेंगी कुछ सड़कें
इनमें से कई सारी एक लेन वाली सड़कों को चांगथांग शीत मरुस्थल से होकर निकालने का प्रस्ताव है; और जानकारी के मुताबिक हाल ही में इन्हें राज्य स्तरीय ग्रीन क्लियरेंस भी मिल गया है। आने वाले दिनों में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से वाइल्डलाइफ और फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलने का इंतजार है। कुछ मामलों में बोलियां भी मंगवाई गई हैं।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जवाबी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की तैयारी
वहीं नेशनल हाइवे अथॉरिटी जांस्कर से कारगिल तक के 234 किलोमीटर लंबे हाइवे को सिंगल लेन से डबल लेन करने की कोशिश में जुटा है। इससे सुरक्षा बलों को लेह से मनाली के बीच एक वैकल्पिक लेकिन बहुत ही मजबूत रास्ता मिल सकेगा। इन सभी कोशिशों का मकसद एक है। 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुए हिंसक संर्घष के बाद भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा के उसपार मौजूद सामरिक संपर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर के मुकाबले में अपनी नई ताकत खड़ी करना चाहता है।

सामरिक महत्त्व की सड़कों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर
इस इरादे से लद्दाख में एलएसी के आसपास जिन सड़कों को सुरक्षा बलों के लिए प्राथमिकता के साथ पूरा करने पर जोर है, उनमें 62 किलोमीटर लंबी चुमाथांग चुशूल रोड, 32 किलोमीटर लुकुंग चार्त्से लिंकिंग रोड, 83 किलोमीटर में फैले हेनले-जुर्सर-इमिस ला रोड, 55 किलोमीटर लंबी चांगचेम्नो-त्सोगत्सालु और 64 किलोमीटर लंबी सुमदो-निद्दर रोहन्गो रोड शामिल हैं।

दिसंबर तक प्राथमिकता के साथ प्रोजेक्ट पूरा करने पर फोकस
इस तरह से कई सड़कें हैं, जिनका काम प्राथमिकता के साथ इस साल दिसंबर तक पूरा होना है। इनके तैयार होने के साथ भारत की बोर्डर डिफेंस और मजबूत होगी। लेह-कारगिल क्षेत्र से लेकर पूर्वोत्तर में सब-सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के समानांतर हथियार और गोला-बारूद समेत सुरक्षा बलों की आवाजागी आसान और तेज हो सकेगी।

ड्रैगन पर नकेल कसने के लिए ये सारे प्रोजेक्ट हैं जरूरी
उदाहरण के लिए ससोमा-सासेर ला रोड मौजूदा लेह-ससोमा क्षेत्र और एसएसएन इलाके के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, लुकुंग चार्त्से रोड उत्तरी पैंगोंग त्सो झील और संघर्ष-संभावित हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र तक की कनेक्टिविटी को ताकत पहुंचाएगा। ये दोनों ऐसे क्षेत्र हैं, जिसपर हमेशा ड्रैगन की बुरी नजर रहती है। अच्छा बात ये है कि इन सारी सड़कों के निर्माण से हमारी अक्साई चिन के दक्षिण तक भी सामरिक पहुंच सुगम हो सकेगी।

पूर्वोतत्तर भारत में भी आधी दर्जन सड़कों को प्राथमिकता
इसी तरह पूर्वी सीमा पर करीब आधी दर्जन नई सड़कों को प्राथमिकता की लिस्ट में रखा गया है। इनमें से अधिकतर अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के पास ऊपरी सियांग जिले में हैं। इनमें से कुछ तुलुंग ला दर्रा तक को जोड़ेंगी, जहां पहले भारत-चीन के बीच संघर्ष भी हो चुका है। इनके अलावा ट्रांस-अरुणाचल हाइवे में जो अभी भी कुछ सड़कों की आवश्यकता महसूस होती है, उन्हें भी पूरा किया जाना है।

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