ब्रिटेन की संसद में कृषि कानूनों पर चर्चा से भारत नाराज, ब्रिटिश उच्चायुक्त को किया तलब
नई दिल्ली। ब्रिटेन की संसद में भारत में बने कृषि कानूनों पर चर्चा होने को लकेर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। इसे भारत के आंतरिक मामले में दखल मानते हुए विदेश सचिव हर्ष शृंगला ने भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त एलेक्स डब्ल्यू एलिस को तलब किया।
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ब्रिटेन की संसद में सोमवार को भारत में चल रहे किसान आंदोलन और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा की गई थी जिसे भारत ने अति हस्तक्षेप और वोटबैंक की राजनीति बताते हुए गंभीर आपत्ति जताई है। ये पहला मौका है जब 100 दिनों से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर किसी देश की संसद में चर्चा की गई है।
कई सांसदों ने चर्चा में लिया था हिस्सा
सोमवार को आयोजित हुई इस 90 मिनट की चर्चा में लेबर पार्टी के कई सांसद, लिबरल डेमोक्रेट्स और स्कॉटिश नेशनन पार्टी के नेताओं ने प्रदर्शन को लेकर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर चिंता जाहिर की थी।
ब्रिटेन की सरकार ने पहले ही कहा है कि वह इस मुद्दे पर तब बात करेगी जब दोनों देशों के प्रधानमंत्री मिलेंगे।
भारत की तरफ से मंगलवार को बताया गया कि इस मामले पर ब्रिटिश राजदूत को तलब किया गया था और भारत में कृषि सुधारों को लेकर अनुचित और विस्तृत चर्चा पर मजबूत विरोध दर्ज कराया है।
भारत ने कहा सीधा हस्तक्षेप
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह एक दूसरे देश की राजनीति में सीधा हस्तक्षेप दिखाता है। इस दौरान ब्रिटिश उच्चायुक्त को ये नसीहत दी गई कि "ब्रिटिश सांसदों को घटनाओं को गलत तरीके से पेश करके वोटबैंक की राजनीति करने से बचना चाहिए, खासकर एक अन्य साथी लोकतंत्र के संबंध में।"
इसके पहले ब्रिटेन में भारत के दूतावास ने ब्रिटिश संसद में चर्चा पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी।












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