भारत ने चीन को दिया जवाब, नए FDI नियम WTO के खिलाफ नहीं हैं
नई दिल्ली। भारत ने चीन के उन आरोपो को मानने से इनकार कर दिया है जिसमें कहा गया है कि नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियम डब्लूटीओ नियमों का उल्लंघन हैं। भारत का कहना है कि सरकार की तरफ से जो नए नियम आए हैं वे नियम मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी तररह से डब्लूटीओ के नियमों का उल्लंघन नहीं होता है। चीन ने कहा है कि भारत की तरफ से एफडीआई के जो नए नियम आए हैं, वे मुक्त व्यापार के लिए बने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और निवेश के सख्त खिलाफ हैं।

भारत पर WTO नियम तोड़ने का आरोप
चीन ने नए नियमों को भेदभावपूर्ण करार दिया था। भारत में चीन के दूतावास के प्रवक्ता की तरफ से बयान देकर नियमों को लेकर नाराजगी जताई गई थी। चीनी प्रवक्ता जी रोंग की तरफ से कहा गया है कि भारत को हर देश से आने वाले निवेश को एक समान नजरिए से देखना चाहिए। रोंग ने कहा, 'भारत को एक बेहतर माहौल और बिजनेस का समान वातावरण आगे बढ़ाना चाहिए। भारत की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध डब्लूटीओ की गाइडलाइंस के खिलाफ हैं। कंपनियां मार्केट के सिद्धांतों के आधार पर अपनी पसंद तस करती हैं। चीन की तरफ से आने वाले निवेश की वजह से भारतीय इंडस्ट्री का विकास हुआ है।' पिछले दिनों पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने एचडीएफसी बैंक में एक प्रतिशत की हिस्सेददारी ली है। इसके बाद से ही लगातार चीनी निवेश पर अंकुश लगाने की बातें होने लगी थीं। माना जा रहा है कि नई एफडीआई नीति का सीधा असर चीन पर पड़ेगा जो भारतीय कंपनियों के टेकओवर की कोशिशों में लगा हुआ है और कोविड-19 की वजह से उनकी मार्केट वैल्यू पर खासा असर पड़ा है। शनिवार को भारत की तरफ से जो नई एफडीआई नीति आई है उससके बाद पड़ोसी देशों के लिए 'ऑटोमैटिक रूट' का रास्ता बंद हो चुका है। अब किसी भी पड़ोसी देश या किसी व्यक्ति को देश में निवेश से पहले सरकार की मंजूरी लेनी पड़ेगी।












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