सत्ता की चाहत में भूले शिष्टाचार, जमकर करते हैं निजी हमले

Narendra Modi Rahul Gandhi
नई दिल्‍ली। चुनावी रण के करीब आते ही पार्टियां खुद को बेहतर और विपक्षी को अप्रभावी बताने के लिए प्रचार प्रसार करती है और आरोप प्रत्‍यारोप का दौर चलता रहता है, लेकिन जब टिप्‍पणियां व्‍यक्तिगत तौर पर की जाने लगें तो इसे शर्मनाक ही कहा जाएगा। यह इस तरह की पहली घटना नहीं है जब सपा नेता नरेश अग्रवाल ने नरेंद्र मोदी पर ओछी टिप्‍पणी की और कहा कि एक चाय बेचने वाला देश का प्रधानमंत्री नहीं हो सकता है। ऐसी ही टिप्‍पणियां सोशल नेटवर्किंग साइट पर राहुल गांधी के संदर्भ में देखने में आती हैं, तो क्‍या ये माना जाए कि भारत की राजनीति और आम जनता में राजनीतिक सहिष्‍णुता नहीं रही?

पिछले कुछ समय में मीडिया द्वारा राहुल गांधी को 'पप्‍पू' तो नरेंद्र मोदी को 'फेंकू' बताया गया। अब वरिष्‍ठ नेताओं की बात को समझे बिना उसका अपने ढंग से मतलब निकालकर प्रेपोगैंडा फैलाया जाता है। अगर मोदी की ही बात करें तो क्‍या ये सही है कि जो कि व्‍यक्ति निम्‍न आयवर्ग के तबके से प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार तक पहुंचा है, उसे सिर्फ उसके शुरूआती जीवन के आधार पर नकार दिया जाए या उसका मजाक उड़ाया जाए। यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि मोदी ने गुजरात को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया और वहां की पानी और बिजली जैसी समस्‍याओं को दूर कर दिया और अब अपने विकास मॉडल के दम पर इस पद के दावेदार बनें।

राहुल गांधी ने अपनी रैली में कहा था कि आईएसआई मुजफ्फरनगर दंगे के शिकार युवकों से संपर्क कर रही है। उनके शब्‍द जरूर गलत हो सकते हैं, पर क्‍या ये सही नहीं है कि आतंकी संगठनों के एजेंट यह समझते हैं कि सामाजिक दुर्भावना के शिकार हुए युवकों को हिंसा के रास्‍ते पर ले जाना आसान है और उनसे संपर्क करते हैं। (द हिंदू में छपे प्रवीन शामी के लेख के आधार पर) यहां पर राहुल की बातों को समझे बिना उनका मजाक उड़ाया गया।

इसके अलावा मध्‍य प्रदेश के एक विधायक ने फिल्‍म अभिनेत्री रेखा द्वारा कांग्रेस के लिए प्रचार किये जाने की बात पर कहा था कि 'रेखा, अमिताभ बच्‍चन को तो रिझा सकती हैं लेकिन वोटरों को नहीं।' उपरोक्‍त सभी घटनाएं भारतीय राजनीति और आम जनता में फैली असहिष्‍णुता को दर्शाती हैं। ऐसे में हमें नेहरू और सरदार पटेल युग पर नजर डालनी चाहिए और सीखना चाहिए कि इस दौर में विरोधियों का भी सम्‍मान किया जाता था और मुद्दों को समझकर उनकी आलोचना की जानी चाहिए।

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