चीन को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब, सीमा पर भारत ने तैनात किए 50,000 अतिरिक्त जवान, फाइटर जेट्स
नई दिल्ली, 28 जून। चीन की चालबाजियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने चीन के साथ अपनी सीमा पर कम से कम 50,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है। वर्तमान में चीन से लगी सीमा पर भारत के 2 लाख सैनिक मौजूद हैं जो 2020 की तुलना में 40 प्रतिशत ज्यादा है।

भारत की आक्रामक तैयारी
सैनिकों की ये तैनाती चीन को ध्यान में रखकर ही की गई है लेकिन इस बार इसका उद्येश्य बेहद ही अलग है और आक्रामक है। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछली तैनाती का उद्येश्य जहां चीन की गतिविधियों का रोकना होता है वहीं इस बार सैनिकों का पुनिर्नियोजन आक्रामक अभियान के लिए तैयार किया है। इनका उद्येश्य चीन पर हमला करने और जरूरी हो तो क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने पर भी विकल्प तैयार करना है। इसके अधिक सैनिकों को हिमालय में लड़ने के लिए अभ्यस्त होने में मदद मिलेगी।
भारत की तैयारियों में सिर्फ जमीनी टकराव ही नहीं बल्कि आकाश और समुद्र को भी ध्यान में रखा गया है। नए शामिल किए गए राफेल सहित फाइटर जेट्स को भी भारत-चीन सीमा के साथ तीन अलग-अलग क्षेत्रों में ले जाया गया है और भारतीय नौसेना भी चीन से आने-जाने के लिए ऊर्जा और व्यापार प्रवाह का अध्ययन करने के लिए प्रमुख समुद्री मार्गों पर अधिक युद्धपोत लगा रही है।

भारत के निशाने पर है चीन
भारत का यह कदम पिछले साल गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद चीन का मुकाबला करने और पाकिस्तान के साथ तनाव कम करने के केंद्र के दृष्टिकोण के अनुरूप है। पिछले साल के संकट ने भारत के नीति निर्माताओं के सामने इस स्थिति को साफ किया है कि चीन भविष्य में सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती पेश करता है और यह पुराने प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से काफी आगे है।
चीन ने सीमा पर सीमा पर कितने सैनिकों को तैनात कर रखा है, इस बारे में कोई साफ संख्या उपलब्ध नहीं है लेकिन हाल में ये पता चला है कि चीनी सेना ने तिब्बत से अतिरिक्त बलों को, जो हिमालय के साथ विवादित क्षेत्रों में गश्त के लिए जिम्मेदार थे, शिनजियांग कमांड में स्थानांतरित कर दिया है।

सीमा पर चीन कर रहा नए निर्माण
भारत ने सैनिकों की तैनाती ऐसे समय में बढ़ाई है जब हाल ही में आई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने तिब्बत की विवादित सीमा पर पिछले कुछ महीनों में लंबी दूरी के तोपखाने, रॉकेट रेजीमेंट और डबल इंजन लड़ाकू विमानों के अलावा हाउस-फाइटर जेट्स, रनवे फील्ड्स और बम से बचाने वाले बंकर बना रहा है।
केंद्र इसे चीन के खिलाफ आक्रामक रक्षात्मक स्तर पर जाने का बढ़िया अवसर मान रहा है वहीं सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा प्रबंधन प्रोटोकॉल के टूटने को देखते हुए दोनों तरफ बहुत अधिक तैनाती जोखिम भरी है।












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