India-China tension: बॉर्डर पर अड़ी है चीनी सेना, फिंगर 4 पर मौजूद PLA जवान
नई दिल्ली। मई माह से ही पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाएं लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर आमने-सामने हैं। छह माह से जारी टकराव को खत्म करने के लिए पिछले दिनों आंठवें दौर की कोर कमांडर वार्ता भी हुई है। इस वार्ता में दोनों देशों की तरफ से तीन चरणों में डिसइंगेजमेंट पर सहमति बनी थी। लेकिन ऐसा लगता है कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

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फिंगर 4 से पीछे नहीं हट रहा चीन
जो ताजा खबरें आई हैं उसमें मुताबिक लद्दाख की पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर फिंगर 4 से पीएलए पीछे नहीं हट रही है। सिर्फ इतना ही नहीं पीएलए की तरफ से यहां पर एक एक्सरसाइज भी हो रही है। साथ ही फिंगर 6 और फिंगर 8 के बीच एक सड़क का निमार्ण भी पीएलए की तरफ से किया जा रहा है। पीएलए का मकसद इस सड़क निर्माण की मदद से जवानों की तैनाती में तेजी लाना है। पिछले 30 दिनों से पीएलए लगातार जवानों की तैनाती को बढ़ा रहा है। भारत और चीन के बीच डिसइंगेजमेंट पर नौंवे दौर की वार्ता होनी है। अभी तक इसकी तारीख पर कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन इसके जल्द होने की संभावना जताई जा रही है। जबकि चुशुल में हुई आंठवें दौर की वार्ता में दोनों देश इस बात पर रजामंद हुए थी पैंगोंग त्सो से सेनाओं को तीन चरण में हटाया जाएगा।
लंबे टकराव के लिए तैयार सेना
सीनियर मिलिट्री कमांडर्स की मानें तो पीएलए समर लुंगपा पर निर्माण कार्य कर रहा है, काराकोरम पास से 30 किलोमीटर पूर्व में और माउंट साजुम पर भी उसकी मौजूदगी देखी जा सकती है। इसके अलावा दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) से 70 किलोमीटर पूर्व में किजिल जिल्गा पर भी जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर मतभेद हैं। रक्षा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की मानें तो पीएलए डिसइंगेजमेंट चाहता है और जल्द ही इसके प्रमाण नजर आ सकते हैं। लेकिन जो इंटेलीजेंस मौजूद हैं उसके मुताबिक फिलहाल उसकी तरफ से इस तरह के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में इंडियन आर्मी लंबे टकराव के लिए तैयार हो रही है।












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