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चीन की फिर नई चालाकी, LAC पर तैनात किए 60 हजार सैनिक, भारत भी पूरी तरह से तैयार

नई दिल्ली, 04 जनवरी: भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएएसी पर चल रहा गतिरोध खत्म नहीं हो रहा है। चीन अपनी चालाकी से बाज नहीं आ रहा, जिसके बाद भारत ने भी चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध पिछले 20 महीने से अधिक के समय से जारी है। ऐसे में अब खबर मिल रही है कि लद्दाख के पास चीन ने अपने 60 हजार सैनिकों की तैनाती की है। यहीं नहीं वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी सेना की तेजी से आवाजाही में मदद करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे का निर्माण भी जारी रखा है।

चीन ने 60,000 सैनिकों को किया तैनात

चीन ने 60,000 सैनिकों को किया तैनात

न्यूज एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि गर्मियों के मौसम में चीनी सैनिकों की संख्या काफी बढ़ गई थी, क्योंकि वे गर्मियों में ट्रेनिंग के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों को लाए थे। वे अब अपने पिछले स्थानों पर वापस लौट गए हैं। हालांकि वे अभी भी लद्दाख के विपरीत क्षेत्रों में लगभग 60,000 सैनिकों को तैनात किए हुए हैं।

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    चीन इन इलाकों में कर रहा निर्माण

    चीन इन इलाकों में कर रहा निर्माण

    इधर, चीन जो एएलसी पर चालाकी कर रहा है, उससे खतरे की आशंका बनी हुई है, क्योंकि चीन एलएसी के पार बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र के सामने और पैंगोंग झील क्षेत्र के पास नई सड़कें बनाई जा रही हैं। वहीं सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना की ओर से भी एएलसी पर हर तरह के खतरे का सामना करने के लिए बहुत मजबूत कदम उठाए हैं। चीनी के किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। भारतीय सेना ने आतंकवाद निरोधी राष्ट्रीय राइफल्स के दस्ते को पूर्वी मोर्चे पर लद्दाख थिएटर में मुस्तैद किया है, इसी के साथ भारत की ओर से भी बुनियादी ढांचे का निर्माण लगातार जारी है।

    भारत की तैयारियां भी हाई लेवल पर

    भारत की तैयारियां भी हाई लेवल पर

    सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना किसी भी तनाव वाले बिंदु पर जरूरत पड़ने पर सैनिकों की भीड़ के लिए सभी पर्वतीय दर्रों को खुला रख रही है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय पक्ष केवल एक या दो स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ नजर रखने की स्थिति में है, क्योंकि अधिकांश स्थानों पर दो सेनाएं बफर जोन द्वारा अलग होती हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैनिकों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए बफर जोन में बड़ी संख्या में निगरानी ड्रोन भी तैनात कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि चीनियों को सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती परेशान करने वाली लग है, क्योंकि वे बहुत तेजी से आगे के स्थानों पर सैनिकों को घुमा रहे हैं।

    रक्षा मंत्रालय ने दिया था ये जवाब

    रक्षा मंत्रालय ने दिया था ये जवाब

    पिछले साल अप्रैल-मई में शुरू हुई चीनी आक्रामकता पर रक्षा मंत्रालय ने अपनी साल के अंत की समीक्षा में कहा था कि एलएसी पर एक से अधिक क्षेत्रों में सेना द्वारा यथास्थिति को बदलने के लिए चीनियों द्वारा एकतरफा और उत्तेजक कार्रवाई का पर्याप्त रूप में जवाब दिया गया। साथ ही बताया था कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों की सेनाओं ने कई लेवल की बातचीत भी की। निरंतर संयुक्त प्रयासों के बाद कई जगहों पर विघटन किया गया। जहां अभी तक विघटन नहीं हुआ है, उन क्षेत्रों में बल का स्तर और बढ़ाया गया है।

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