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India-China faceoff: तवांग सीमा पर लगाए जा रहे हैं नए मोबाइल टावर, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हो रहा है ये काम

अरुणाचल प्रदेश के तवांग के सीमावर्ती इलाकों में नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। चीन की चालबाजियों के बीच कनेक्टिविटी और भी दुरुस्त करने का फैसला लिया गया है। इससे आम नागरिकों को भी फायदा मिलेगा।

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Tawang Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सैनिकों की हरकतों ने बुनियादी ढांचे पर पहले से चल रहे काम में और गति लाने को मजबूर कर दिया है। सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी कोई समस्या ना बन जाए, इसके लिए नए मोबाइल टावर लगाने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल 23 नए टावर लगाए जाने पर काम हो रहा है, लेकिन ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू होने के चलते इसमें दिक्कतें आने की भी चिंता है। गौरतलब है कि हर मौसम में तवांग के दूर-दराज इलाकों तक वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सुरंग निर्माण का काम पहले से ही प्रगति पर है।

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    तवांग में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर

    तवांग में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर

    अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांग्त्से में 9 दिसंबर को भारत और चीन के जवानों के बीच हुई झड़प के बाद वहां नए सिरे से कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है। न्यूज एजेंसी पीटीआई से तवांग के डिप्टी कमिश्नर केएन डैमो ने कहा है कि बीएसएनएल और भारती एयरटेल वहां पर 23 नए मोबाइल टावर लगाएगा, ताकि कनेक्टिविटी बढ़ेगी। वो बोले, 'मौजूदा टावर अपेक्षित सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं, जिससे कि ना केवल रक्षा बलों को , बल्कि सीमा के पास रहने वाले सिविलियंस को भी दिक्कतें हो रही हैं।' हालांकि, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पहले सीमावर्ती इलाकों में कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं था, लेकिन अब परिस्थिति बदली है और वहां रहने वाले निवासी इंटरनेट सेवा और मोबाइल कनेक्टिविटी का बुमला और वाई जंक्शन तक आनंद उठा रहे हैं, लेकिन उसे और बेहतर करने की आवश्यकता है

    मोबाइल टावर लगाने में रक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता

    मोबाइल टावर लगाने में रक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता

    डिप्टी कमिश्नर के मुताबिक, 'रक्षा क्षेत्रों को इंस्टॉलेशन में प्राथमिकता दी गई गई है, जबकि नागरिक क्षेत्रों जैसे कि मागो, चुना और निलिया (जेमिथांग) को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है।' उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने 43 नए टावरों के लिए कहा था। उनका कहना है कि नए टावर लगाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की गई हैं, लेकिन ठंड के चलते चुनौती बढ़ सकती है, जिससे कि इस काम में देरी भी हो सकती है। जिले में पहाड़ की चोटियों पर बर्फबारी शुरू भी हो चुकी है। जिला मुख्यालय में रविवार रात को मौसम की पहली बर्फबारी हुई और तापमान माइनस 3 डिग्री तक गिर गया है।

    अरुणाचल में BRO इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में जुटा है

    अरुणाचल में BRO इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में जुटा है

    इससे पहले सरकार ने कहा था कि वह अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई से 'प्रोजेक्ट वर्तक' के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर रमन कुमार ने कहा, 'सीमा सड़क संगठन (BRO) पश्चिमी असम और पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के सभी प्रमुख सीमावर्ती इलाकों में रोड नेटवर्क का विकास और रखरखाव कर रहा है।' उन्होंने कहा था, 'हमारे में पास नेशनल हाइवे, सिंगल लेन रोड, डबल लेन रोड और अन्य तरह की सड़कें भी हैं। यहां तक कि हम तवांग जिले के दूर-दराज इलाके को भी कनेक्ट करना और इस इलाके के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना चाहते हैं।'

    हर मौसम में उपयोगी सुरंगों का भी निर्माण

    हर मौसम में उपयोगी सुरंगों का भी निर्माण

    उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि सेला और नेचिपू सुरंगों का निर्माण जारी है, क्योंकि जाड़े में भारी हिमपात की वजह से वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और बौद्ध धर्म स्थल के रूप में प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश का तवांग पिछले 9 दिसंबर को चीनी सैनिकों की घुसपैठ की वजह से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ चुका है।

    9 दिसंबर को भारतीय सैनिकों ने PLA को वापस भेज दिया

    9 दिसंबर को भारतीय सैनिकों ने PLA को वापस भेज दिया

    भारत सरकार ने संसद को बताया है कि चीन की घुसपैठ का भारत ने 'दृढ़ता और ताकत' के साथ जवाब दिया है और उन्हें भागने को मजबूर कर दिया है। 13 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में यह भी बताया कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के जवानों ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) में घुसपैठ और यथास्थिति को एकतरफा बदलने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय जवानों ने समय पर दखल देकर उन्हें उनकी वास्तविक स्थिति तक पीछे हटने को मजबूर कर दिया।

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