भारत और चीन के बीच कोर कमांडर्स के बीच होगी 7वीं बैठक, इन अहम बिंदुओं पर होगी बात

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच पिछले कई महीने से तनाव को कम करने के लिए सातवीं बार भारत और चीन के बीच बातचीत होगी। सोमवार दोनों सेनाओं के कोर कमांडर की बैठक होगी जिसमें सीमा पर तनाव कम करने के लिए चर्चा होगी।

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जून में गलवान घाटी में संघर्ष के बाद सीमा पर उठे तनाव को खत्म करने के लिए 12 अक्टूबर को दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक बार फिर बैठक करने जा रहे हैं। सोमवार को दोनों देशों के कोर कमांडर्स के बीच ये सातवीं बैठक होगी। जानकारी के मुताबिक ये बैठक एलएसी पर भारत की तरफ चुशुल सेक्टर में होनी वाली है। लेह के 14वीं कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह की ये आखिरी बैठक होगी। 14 अक्टूबर को पीजी मेनन की नियुक्ति उनकी जगह होगी। दोनों देशों की सेनाओं के बीच 21 सितम्बर को छठें दौर की वार्ता हुई थी।

सीएसजी ने लिया फैसला
भारत सरकार के चाइना स्टडी ग्रुप के मेंबर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए अजित डोवाल और रक्षा स्टॉफ के प्रमुख जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख ने इस बातचीत के लिए अंतिम रूप दिया। चीन मामलों पर फैसला लेने के लिए सीएसजी भारत की सबसे बड़ी बॉडी है।

अभी तक बैठक के एजेंडे को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन सूत्रों के मुताबिक अभी पूर्वी लद्दाख से जुड़ी वास्तवकि सीमा रेखा (LAC) पर सैनिकों के डिसएंगेजमेंट और डिएस्केलेशन का मुद्दा बातचीत में प्रमुख रूप से उठने वाला है। पिछली कोर कमांडर की बैठक के दौरान कोर कमांडर की बैठक के दौरान चीनी पक्ष इस बात पर अड़ा था कि भारतीय सेना महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों जैसे दक्षिणी पैगोंग त्सो लेक के मगार हिल, मुखपरी और रेजार लॉ से पीछे हट जाए।

भारत ने स्थिति की मजबूत
चीनी सेना की 29 और 30 अगस्त को पैंगोंग झील के इलाके में कार्रवाई के बाद भारतीय सेना ने कार्रवाई करते हुए ऊंचाई वाले सामरिक इलाके पर कब्जा कर लिया था। वहीं भारत का कहना है कि सभी क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट एक साथ हो लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नही है। भारत के सख्त रुख को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बातचीत की प्रक्रिया लंबी चल सकती है।

उम्मीद की जा रही है कि बातचीत में दोनों पक्ष स्थिरता बनाए रखने के लिए दूसरे कदमों पर भी ध्यान देंगे और तनाव को कम करने पर ध्यान देंगे। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों में आने वाले मौसम की विषम परिस्थितियों का भी सामना करना होगा।

दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की होने वाली है मुलाकात
अगले महीने भारत और चीन दोनों के राष्ट्राध्यक्ष मिलने वाले हैं। दोनों देशों के बीच गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद ये पहला मौका होगा जब दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख मुलाकात करने वाले हैं।

पिछले तीन महीनों में भारतीय सेना ने टैंकों, भारी हथियार और गोला बारूद समेत ईंधन और खाद्य सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित की है। इसके चलते इस क्षेत्र में दुर्गम इलाकों में भारतीय सेना सुगम परिस्थितियों के लिया चीन की मुकाबले पूरी तरह से तैयार है।

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