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India-China clash: जानिए क्‍या होता है डी-एस्केलेशन का मतलब

नई दिल्‍ली। भारत और चीन के संबंधों के बीच कड़वाहट कोई नई बात नहीं है। दोनों देश अक्‍सर एक दूसरे के आमने-सामने खड़े रहते हैं। इतना ही नहीं दोनों के बीच 1962 में एक वॉर भी हो चुका है। लेकिन सोमवार की रात लद्दाख की गलवान घाटी में जो हुआ उसकी कल्‍पना किसी ने नहीं की थी। दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुआ और बिना गोली चले दोनों तरफ सैनिकों ने जान गंवा दी। हालांकि इसमें गद्दारी चीन की है क्‍योंकि इस साल मई-जून में चीन-भारत के बीच जो गतिरोध पैदा हुआ था उसे लेकर भारतीय सैन्‍य अधिकारियों ने उच्‍च स्‍तरीय वर्ता का पहल की थी। दोनों देशों के सैन्‍य अधिकारी आमने सामने बैठे थे जिसका मकसद था बॉर्डर पर डी-एस्केलेशन। अब आप सोच रहे होंगे कि डी-एस्केलेशन का मतलब क्‍या होता है। तो आइए हम आपको विस्‍तार से बताते हैं।

जानिए क्‍या होता है डी-एस्केलेशन का मतलब

जानिए क्‍या होता है डी-एस्केलेशन का मतलब

डी-एस्‍केलेशन का मतलब होता है दो देशों के बीच तनाव की तीव्रता को कम करना। साफ शब्‍दों में कहें तो दो देशों के बीच बन रहे युद्ध जैसे तनाव को कम करने के लिए जो कदम उठाया जाता है उसे डी- एस्‍केलेशन कहते हैं। इससे पहले भी ही जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो भारत ने ये फैसला किया गया था कि भारतीय सैनिक गलवान घाटी ,पैंगोंग सो, डेमचोक के सारे विवादित इलाकों में चीनी सैनिकों के आक्रामक अंदाज से निपटने के लिए कड़ा रुख अपनाएंगे बाद में चीन भारत के साथ उच्च स्तरीय बात के लिए तैयार हुआ और भारत चीन के बीच बैठक भी हुई। लेकिन इसके बाद भी तनाव में कमी नहीं दिखी जिसका परिणाम ये हुआ कि सोमवार की रात एक बार फिर चीन और भारतीय सेना का आमना-सामना हुआ और भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हो गए।

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    सैनिकों के बीच चले रॉड और पत्‍थर

    सैनिकों के बीच चले रॉड और पत्‍थर

    सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत के 11 सैनिक घायल भी हुए हैं और चीन के (पीएलए) के पांच जवान मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि सैनिकों की तरफ पत्‍थर फेंके गए और उन रॉड्स यानी छड़ों का प्रयोग किया गया है जो सड़क निर्माण के लिए थीं। हालांकि सेना की तरफ से इस पर कोई भी टिप्‍पणी नहीं की गई है। सेना की तरफ से जो बयान जारी किया गया उसके मुताबिक, 'सोमवार रात पीएलए के साथ पूर्वी लद्दाख में हुए हिंसक टकराव में एक ऑफिसर के साथ कुछ जवानों का निधन हो गया है।' बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा है। सन् 1975 के बाद पीएलए के साथ हुई टकराव में सेना को पहली बार अपने सैनिक गंवाने पड़े हैं।

    गलवान वैली में एक पॉइंट्स से चीनी सैनिक कुछ पीछे गए थे

    गलवान वैली में एक पॉइंट्स से चीनी सैनिक कुछ पीछे गए थे

    2 जून को फिर भारत और चीन के बीच मेजर जनरल स्तर की मीटिंग हुई जिसमें गतिरोध दूर करने पर बात की गई। फिर 3 जून को माहौल सकारात्मक बनाने के लिए गलवान वैली में एक पॉइंट्स से चीनी सैनिक कुछ पीछे गए। 6 जून को पहली बार भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई। इसमें गतिरोध के पॉइंट्स की पहचान की गई। पैंगोंग त्सो एरिया से पीछ हटने को चीन तैयार नहीं हुआ और तय हुआ कि गलवान वैली और हॉट स्प्रिंग एरिया में गतिरोध के तीन पॉइंट्स में धीरे धीरे सैनिकों को पीछे किया जाएगा।

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