भारत-चीन दोनों सौ करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश, रिश्तों में समझ और संतुलन होना जरूरी: एस जयशंकर
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को बड़ा बयान दिया है। यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के तीसरे सालाना लीडरशिप सम्मेलन बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा, चीन और पाकिस्तान के बीच संबंध 60 के दशक की तरह ही हैं, इसके पहलू भारत के लिए पहले भी चिंता का विषय रहा है। यह कुछ ऐसा है जो दोनों पड़ोसी देशों के साथ हमारे संबंधों में कारक होगा। हम पड़ोसी होने की वजह से चीन के उदय से वाकिफ हैं।

सम्मेलन में उन्होंने आगे कहा कि चीन के तात्कालिक पड़ोसी होने के नाते हम उसके उदय से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। भारत भी प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, अगर दो ऐसे पड़ोसी देश जहां लोगों की आबादी 100 करोड़ से अधिक है तो यह महत्वपूर्ण है कि वह किसी प्रकार की समझ और संतुलन तक पहुंचें। गौरतलब है कि बीती रात चीन और भारत की सेनाओं के बीच एक बार फिर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर झड़प हुई है। चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो में घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारत की सेना ने नाकाम कर दिया।
सेना प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने सोमवार को बताया है, 29 और 30 अगस्त की रात पीएलए के जवानों ने पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव के दौरान मिलिट्री और राजनयिक वार्ता के दौरान बनी आम सहमति का उल्लघंन किया और भड़काऊ सैन्य गतिविधियों को अंजाम दिया है। सेना बातचीत के जरिए शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन साथ ही समान रूप से अपनी क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के लिए भी दृढ़ निश्चित है। कर्नल आनंद ने जानकारी दी है कि चुशुल में इस समय ब्रिगेड कमांडर मीटिंग इस मुद्दे को सुलझाने के लिए जारी है। चीनी सैनिकों ने इस बार पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में गतिविधियों को अंजाम दिया है।
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