INDIA ब्लॉक 2024 में कैसे करेगा बीजेपी का सामना, इन 5 'दरारों' से हो सकता है बंटाधार?
INDIA bloc Parties: 28 विपक्षी दलों को अगले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सशक्त बीजेपी जैसी संगठित पार्टी से मुकाबला करना है। लेकिन, करीब तीन महीने बाद हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक से लग रहा है कि दावों के विपरीत विपक्ष बराबरी मुकाबले के लिए अभी भी तैयार नहीं है।
विपक्षी गठबंधन की ओर से एकजुटता के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन इसमें शामिल दलों के नेता अभी भी अपनी-अपनी डफली बजाने में लगे हुए हैं। कम से कम 5 ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिस पर भाजपा-विरोधी दलों में गहरे मतभेद हैं, जिसे सुलझाए बिना पीएम मोदी की अगुवाई वाले एनडीए ब्लॉक का सामना करना बहुत ही मुश्किल लग रहा है।

प्रधानमंत्री का चेहरा
विपक्षी दलों की ओर से अबतक कहा जा रहा था कि पहले बाकी मुद्दे सुलझा लें, प्रधानमंत्री का चेहरा चुनाव के बाद तय किया जा सकता है। लेकिन,गठबंधन की लाइन से अलग जिस तरह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे कर दिया है, उससे साफ हो गया है कि गठबंधन में भी 'खेला' चालू है।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी दलित चेहरे के नाम पर खड़गे को इंडिया ब्लॉक का पीएम उम्मीदवार बनाने की पेशकश करके सनसनी मचा दी है। साफ है किी विपक्षी गठबंधन में शामिल दल इंडिया ब्लॉक के अंदर अपनी-अपनी सियासी पिच पर बैटिंग करना नहीं छोड़ रहे हैं।
दिलचस्प बात ये है कि खुद अपना नाम आगे होने से खड़गे भी असहज हैं। जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में उन्होंने खुद ही इस प्रस्ताव से ये कहते हुए कन्नी काटने की कोशिश की है कि 'पहले बीजेपी को हराने पर फोकस करें। पीएम को चुनने के मसले पर चुनाव के बाद फैसला किया जाना चाहिए।'
भारत बनाम इंडिया
विपक्षी दलों ने अपने गठबंधन का नाम ही इंडिया (इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक डेवलपमेंटल अलायंस) रखा है। नई दिल्ली में आयोजित 18वें जी-20 शिखर सम्मेलन से मोदी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इंडिया की जगह देश के भारत नाम को प्रमुखता देकर यहां हो रहे बदलावों में एक और नई कड़ी जोड़ने की कोशिश शुरू की है।
संयोग से मोदी सरकार की ये पहल विपक्षी गठबंधन इंडिया बनने के बाद नजर आई है। लेकिन, इंडिया ब्लॉक की बैठक के दौरान इसके प्रमुख संस्थापक और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश को भारत के नाम से ही जानने की पैरवी करके सबको हैरानी में डाल दिय है। सूत्रों का कहना है कि जब नीतीश ये सब कह रहे थे तो सोनिया गांधी काफी हैरान नजर आ रही थीं।
ईवीएम-विरोध पर भी मतभेद
जानकारी के मुताबिक इंडिया ब्लॉक की बैठक में तीन राज्यों में हार के बाद खासकर कांग्रेस और उसके कुछ नए सहयोगियों ने इसका ठीकरा ईवीएम पर भी फोड़ने की कोशिश की। ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान के पक्ष में प्रस्ताव पास करने की रणनीति बनाई गई।
लेकिन, जानकारी के मुताबिक जेडीयू के नीतीश कुमार समेत कई सहयोगियों ने बैलट युग में वापसी पर असहमति जता दी। यहां तक कि आरजेडी, जो कि अक्सर ईवीएम पर सवाल उठाने वालों में शामिल रही है, वह भी इसके लिए तैयार नहीं हुई। आरएलडी के चीफ जयंत चौधरी भी नीतीश के साथ खड़े दिखे।
आखिरकार यह प्रस्ताव पारित किया गया कि वीवीपैट की जो स्लिप बॉक्स में गिरता है, वह वोटरों को ही मिले, जिसे वह खुद ही दूसरे बॉक्स में अपने हाथों से डाल सके। बाद में 100% वीवीपैट की गिनती की जाए। लेकिन, बैलेट युग में वापसी के लिए सहमति नहीं बनी।
सहयोगी दलों की शर्तें
कांग्रेस हाल तक खुद को विपक्षी दलों की स्वभाविक नेता मानकर चल रही थी। लेकिन, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के बाद गठबंधन में समीकरण बदल चुके हैं। सूत्रों के अनुसार सहयोगी दलों ने उसे घेरना शुरू कर दिया है कि विधानसभा चुनावों में उसने मनमानी क्यों की? सहयोगी दलों को साथ क्यों नहीं लिया? भोपाल की घोषित रैली क्यों रद्द कर दी?
जानकारी के मुताबिक ऊपर से कई कदम आगे बढ़ते हुए समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के सामने साफ लहजे में ये शर्त रख दी है कि अगर चर्चाओं के मुताबिक उसने यूपी में बीएसपी के साथ किसी तरह का गणित बिठाया तो सपा उस गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी। इसी तरह से टीएमसी ने भी बंगाल में अपने वर्चस्व में किसी भी तरह की दखल की साफ मनाही कर दी है।
कांग्रेस के साथ नहीं जम रही पुरानी केमिस्ट्री?
इंडिया ब्ल़ॉक की नई दिल्ली वाली बैठक से पहले पटना, बैंगलुरु और मुंबई में तीन बैठकें हो चुकी हैं। बैठक के बाद सभी सहयोगी दलों की एक साझा प्रेस कांफ्रेंस होती थी। लेकिन, चौथी बैठक में कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने साझा प्रेस कांफ्रेंस से कन्नी काटने की कोशिश की।
बैठक खत्म होते ही ममता, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, नीतीश, राजद सुप्रीमो लालू यादव, केजरीवाल, सपा चीफ अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और आरएलडी नेता जयंत चौधरी किनारे से निकल गए। ये नेता इंडिया ब्लॉक की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल नहीं हुए।












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