IBC 2018 Day 2 LIVE:पिछले 5 सालों के अंदर बैंकिंग के 23000 फ्रॉड हुए: कश्मीरी लाल
नई दिल्ली। सेंटर फॉर इकॉनोमिक पॉलिसी एंड रिसर्च (सीईपीआर) की ओर से आयोजित दो दिवसीय इंडिया बैंकिंग कॉन्क्लेव गुरुवार से दिल्ली में शुरू हो गया। आईटीसी मौर्या, कमल महल में आयोजित होने वाले इस कॉन्क्लेव का नॉलेज पार्टनर नीति आयोग है। कॉन्क्लेव का उद्घाटन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जो कि कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के तौर पर आए।

इंडिया बैंकिंग कॉन्क्लेव आज से शुरू, पल-पल की अपडेट
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स्वदेशी जागरण मंच के कश्मीरी लाल ने कहा कि पिछले 5 सालों के अंदर बैंकिंग के 23000 फ्रॉड हुए। हिसाब लगाएं तो एक घंटे के अंदर के फ्रॉड हुआ। बैंकिंग में सुधार की बहुत गुंजाइश नहीं, बहुत जरूरत है। देश की जनता ने बैंकों की इमारत को इतना करीब से पहले कभी नहीं देखा, जितना मोदी सरकार की जनधन योजना के चलते देखा।
पीयूष गोयल ने कहा कि यह पहली बार देखने में आ रहा है, जब बड़ा लोन लेने वाले लोग बैंकों को पैसा लौटा रहे हैं। इससे पहले तक तो यह बैंक की समस्या हुआ करती थी। अब लोन लेने वाले डर रहा है कि उसे पैसा लौटाना है। पीयूष गोयल ने कहा कि अब तक छोटा लोन लेने वाले आपके और मेरे जैसे लोग लोन देने के बारे में सोचते थे।
बैंकों ने लोन की रेवडि़यां किस प्रकार से बांटी, इसका जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि एक बैंक से लोन लिया, नहीं दिया। उसके बाद जरूरत पड़ी तो दूसरे से ले लिया। वहां डिफॉल्टर हो गए तो तीसरे से ले लिया। ये सिलसिला चलता रहा...इस बीच पीयूष गोयल रुके और बोले- मैं तो बोले जा रहा हूं, बैंकों को एक्सपोज कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि बैंकों ने भी अच्छे काम भी किए हैं।
सरकारी बैंकों का जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह सच है कि कई बार गलत प्रेक्टिस सिस्टम में आ गईं, लेकिन इंडियन बैंक्स ने काफी अच्छा काम किया है। उनकी चुनौतियां काफी ज्यादा रही हैं। बैंकों में पॉलिटिकल प्रेशर काफी रहा है। हालांकि, बैंकों की समस्या सिर्फ सरकारी बैंकों तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्राइवेट सेक्टर बैंकों में भी रही है।
फेसबुक इंडिया के डायरेक्टर शिवनाथ ठुकराल ने कहा कि इस जेनरेशन की नजर में बैंक की परिभाषा बदल गई है। वे ऑनलाइन चैट करते हैं और पेमेंट करते हैं। किसने सोचा था ये होगा, लेकिन ये हो रहा है। वे एक ऐसे बैंक को यूज कर रहे हैं, जिसे उन्होंने देखा तक नहीं है। बैंक अकाउंट के जमाने की बात अब कस्टमर के दिमाग से जा रही है। यंग जेनरेशन के लिए बैंकिंग कज्यूम की जाने वाली अन्य वस्तुओं की तरह हो गई है।
केकेआर इंडिया के संजय नायर ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने फाइनेंस को बदल दिया है। टेक्नोलॉजी आपके बिहेवियर को समझ रही है। मसलन आप क्रोमा स्टोर में हैं और आपके बैंक से एसएमएस आता है कि आपकी सैलरी इतनी तारीख को आ रही है और अगर आप टेलिविजन खरीदना चाहते हैं तो आपको लोन मिल सकता है। टेक्नोलॉजी ने काफी कुछ बदल दिया है।
रथिन रॉय ने कहा कि स्मॉल हेयर कट का मतलब प्राइवेटाइजेशन कर दो, मीडियम में मर्जर कर दो, वे तीसरे हेयर कट के बारे में बताते इससे पहले ही उनके बगल में बैठे बैंक ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन जी पद्मनाभन बीच में बोल पड़े। सरकार हैडशेक करना चाहती है। रथिन रॉय ने आगे कहा कि बैंकों से सरकार का दखल कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां कोई हिंदी मूवी नहीं चल रही है कि सामाजिक कार्य भी कर लो और मुनाफा भी कमा लो।
रथिन रॉय ने प्राइवेटाइजेशन और मर्जर को खारिज करते हुए कहा कि सरकार के कार्यों को पूरा करने का टास्क पब्लिक सेक्टर बैंकों के पास है। ऐसे में एक तरीका तो यह है कि सरकार इन पब्लिक सेक्टर बैंकों के नुकसान की भरपाई करती रहे, टैक्सपेयर्स के पैसे से। दूसरा तरीका ये है कि प्राइवेटाइजेशन कर दो या मर्जर कर दो। इन दोनों कार्यों में सरकार को कुछ देना नहीं पड़ेगा। रथिन रॉय ने पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन और मर्जर पर कहा कि यहां तीन प्रकार के हेयर कट की कोशिश हो रही है। स्मॉल हेयर कट, मीडियम हेयर कट और बिग हेयरकट।
एचडीएफसी बैंक की चेयरमैन श्यामला गोपीनाथ ने प्राइवेटाइजेशन एंड मर्जर पर विचार रखते हुए कहा कि सबसे पहले हमारे सामने ये सवाल है कि क्या पब्लिक सेक्टर बैंक होने चाहिए, जवाब है- हां पब्लिक सेक्टर बैंक होने चाहिए, लेकिन अब सवाल यह कि कितने पब्लिक सेक्टर होने चाहिए। इस बारे में हमें सोचना चाहिए। श्यामला गोपीनाथ ने कहा कि प्राइवेटाइजेशन या मर्जर से पहले अन्य विकल्पों पर भी सरकार को विचार करना चाहिए, क्योंकि सरकार इन बैंकों में शेयर होल्डर है। उसे भी इस पूरी कवायद से लाभ होना चाहिए।
सिडबी के पूर्व सीएमडी एनके मैनी ने कहा कि 'फंडिंग द अनफंडेड' ये बात कई सरकारों के दिमाग में रही है। नाबार्ड की स्थापना, गरीब महिलाओं को आर्थिक मदद के बाद 90 के दशक में स्वयं सेवी संगठनों को बढ़ावा दिया गया, को-ऑपरेटिव बैंक लाए गए। यह सब उसी वर्ग को फंड करने के लिए किया गया। 2000 में आरबीआई ने माइक्रो फाइनांस को डिफाइन किया। मकसद वही गरीबों की मदद करना।
स्मॉल इज गुड की बात करते हुए एमवी नायर ने कहा कि छोटे कारोबारियों का ट्रैक रिकॉर्ड एनपीए के मामले में बहुत अच्छा है। जनधन की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक ने भी माना है कि 80 प्रतिशत आबादी फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़ी है। यह बहुत बड़ी बात है। हमारे देश में 51 मिलियन रजिस्टर्ड एमएसएमई हैं, इनमें से केवल 5 मिलियन को फंड दिया जा रहा है, जो कि बहुत कम है।
वित्तीय समानता के अहम आधार हैं- एक्सेसेबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी। सबसे पहले तो व्यक्ति बैंक तक पहुंच सके और बैंक का रवैया ऐसा हो कि वह छोटे लोगों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए। छोटा कारोबार शुरू करने की तैयारी करने वालों के पास क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है, इसे नहीं आंका जाना चाहिए। ऐसे में क्रेडिट स्कोर मापने के तरीके बदलने होंगे: रमन अग्रवाल, चेयरमैन, फाइनेंस इंडस्ट्री डिवेलपमेंट काउंसिल
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