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satellite surveillance of ships: भारत और फ्रांस मिलकर करेगें दुश्‍मनों से समुद्र क्षेत्र की रखवाली

बेंगलुर। अब भारत और फ्रांस म‍िलकर समुद्र क्षेत्र पर ताक लगाए दुश्‍मन देशों को मुंह तोड़ जवाब देंगे।। दोनो देशों ने समु्द्री क्षेत्र में अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने समुद्री क्षेत्र पर सेटलाइट सरविलांस लगाने का निर्णय लिया है।

pm modi

इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि जब दो देश साथ मिलकर समुद्री क्षेत्र में होने अन्य देशों की हलचल की निगरानी करेगे। हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी के लिए सेटेलाइट का संचालन फ्रांस और भारत द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।

माना जा रहा है कि इससे आतंकवाद पर भी लगाम लगेगी। यह सेटेलाइट सरवियन्‍स केवल हिंद महासागर ही नहीं पूरे विश्‍व भर के समुद्र के जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखेगी। इस सेटेलाइट को बनाने में दोनो देश 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च करेंगे।

कुल मिलाकर ऐसे दस सेटेलाइट होंगे जो पृथ्‍वी से निकट की कक्षा में रहकर जहाजों की निगरानी करेगे। यह सेटेलाइट विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्‍मन जहाजों से हो रहे आक्रमण की जानकारी देंगे। इसके साथ ही समुद्री डाकुओं और समुद्र के रास्ते बढ़ रही आतंकवादी गतिवितिधयों पर भी निगरानी करेंगे।

मालूम हो कि समुद्र जहाजों के माध्‍यम से आतंकवाद का खतरा पिछले कुछ दशकों से सभी देशों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। इसके अलावा हिंद महासागर समेत अन्य समुद्री इलाका बेहद अहम माना जाता है इसलिए यहां घुसपैठ भी बढृती जा रही है। इस सेटेलाइट की निगरानी से समुद्री क्षेत्र में तेल के टैक वाले जहाज भी होंगे। जिससे तेल रिसाव पर भी रोक लगेगी।

चूंकि यह Automatic Identification System (एआईएस) होगा जो महासागर क्षेत्र में घूमने वाले जहाजों की एक श्रृंखला का पता लगाएगा, उसकी पहचान करेगा और आक्रमण, आतंकवाद, समुद्री डकैती, तस्करी, तेल के स्रोत और अवशेषों के लिए भी उपयोगी होगा।

बता दें कि वर्तमान में जहाज ऑपरेटर अपने जहाजों पर एक गैर-अंतरिक्ष-आधारित एआईएस को बंद कर देते है जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना असंभव हो जाता था लेकिन यह सेटेलाइट अ ब उनको भी निकालेगे ।

china ship

अधिकांश जहाजों में एक ट्रांसपोंडर होना अनिवार्य होता है जो उनका विवरण देता है और साथ ही उनके आसपास के जहाजों का पता लगाने के लिए भी उसकी मदद करता है।। एआईएस के साथ इस तरह के जहाज, उसकी स्थिति, गति और पाठ्यक्रम को बनाकर, देश की समुद्री सेना आईएफएफ की विमान प्रणाली के समान संभावित खतरों को दूर से बचाएगी या विमानों के लिए मित्र या दुश्मन की पहचान कराएगी।

शिखर सम्मेलन में हुई औपचारिक घोषणा

बता दें कि मार्च 2018 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की पहली दिल्ली यात्रा के दौरान एक संयुक्त समुद्री अंतरिक्ष बेड़े की घोषणा की गई थी। जुलाई के अंत में, इसरो के अध्यक्ष के.एस. शिवन और सीएनईएस के अध्यक्ष जीन-यवेस ले गैल ने बेंगलुरु में इस पर एक कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फ्रांस के राष्‍ट्रपति मैक्रोन ने जी 7 शिखर सम्मेलन में इस समझौते की औपचारिक घोषणा की गई।

फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस (केंद्र राष्ट्रीय डी-स्पैटियल या नेशनल सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज) ने बताया कि , "दूरसंचार (एआईएस) और रडार और ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग उपकरणों को ले जाने वाला यह तारामंडल पहले अंतरिक्ष आधारित प्रणाली का गठन करेगा। लगातार दुनिया भर के जहाजों पर नज़र रखने में सक्षम है।

चीप स्‍थापित करना चाहता है प्रभुत्‍व कायम

भारत के समुद्री क्षेत्र पर चीन की हमेशा से बुरी नजर रही है। चीन बहुत सोची समझी रणनीति के तहत इस इलाके में अपना प्रभुत्‍व कायम कर रहा है। सामरिक लिहाज से पूरा समुद्री इलाका बेहद अहम है। सामरिक लिहाज से पूरा समुद्री इलाका बेहद अहम है। इसलिए इस समुद्री क्षेत्र पर चीन की हमेशा से बुरी नजर रही है। हिंद महासागर में चीन बहुत सोची समझी रणनीति के तहत इस इलाके में अपना प्रभुत्‍व कायम कर रहा है।
हिंद महासागर में चीन की नौसेना के बढ़ते दखल पर भारतीय नौसेना चिंता भी जाहिर कर चुकी है। इसका अंदेशा सभी देशों को हो चुका है इसलिए भारत ने पिछले दिनों अमेरिका के साथ इस पर रणनीति बनानी शुरु कर दी है। इस विषय भारत और अमेरिका शीर्ष पर अधिकारियों के बीच हिंद महासागर, प्रशांत और एशिया महासागर क्षेत्र से जुड़े समुद्री सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने में जुट गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार इस संबंध में सचिव स्तर पर दो दिवसीय मीटिंग भीआयोजित की जा रही है।

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