बेनामी संपत्ति का लेन-देन करने वालों को सात साल की जेल, सरकार ने किया अलर्ट
विज्ञापन में बताया गया है कि जो लोग इस एक्ट के तहत गलत जानकारी मुहैया देंगे उन्हें 5 साल तक जेल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा उन पर बेनामी संपति की मार्केट वैल्यू के हिसाब से 10 फीसदी जुर्माना भी लगेगा
नई दिल्ली। अगर आप बेनामी लेन-देन में संलिप्त पाए जाते हैं तो आपको सात साल की जेल और जुर्माना लग सकता है। केंद्र की मोदी सरकार ने लोगों को बेनामी संपत्ति के लेन-देन से दूर रहने की सलाह दी है। आयकर विभाग ने कहा है कि बेनामी लेन-देन से दूर रहें नहीं तो साल की सजा हो सकती है। आयकर विभाग ने 'बेनामी लेन-देन से दूर रहें' शीर्षक से अखबारों में अलर्ट विज्ञापन छपवाया है। जिसमें कालेधन को इंसानियत के खिलाफ अपराध करार दिया गया है।

आयकर विभाग ने दिया 'अलर्ट' करने के लिए विज्ञापन
आयकर विभाग ने प्रमुख अखबारों में दिए गए विज्ञापन के जरिए आम लोगों को कालेधन से निपटने में सरकार की मदद करने का आह्ववान किया है। इनकम टैक्स विभाग के विज्ञापन में कहा गया है, 'बेनामीदार (जिसके नाम पर बेनामी संपति रजिस्टर है), लाभकारी (जिसने इसके लिए कीमत चुकाई है) और ऐसे लोग जो बेनामी लेन-देन करते हैं, उन्हें 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। साथ हगी उन पर बेनामी संपति की मार्केट वैल्यू के हिसाब से 25 फीसदी जुर्माना भी लगाने का प्रावधान है।'

गलत जानकारी मुहैया कराने पर 5 साल तक की जेल
विज्ञापन में बताया गया है कि जो लोग इस एक्ट के तहत गलत जानकारी मुहैया देंगे उन्हें 5 साल तक जेल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा उन पर बेनामी संपति की मार्केट वैल्यू के हिसाब से 10 फीसदी जुर्माना भी लगेगा। आयकर विभाग ने बताया है कि बेनामी सपंति को सरकार जब्त कर सकती है और सरकार सीज भी कर सकती है। बता दें कि आयकर विभाग ही बेनामी एक्ट को लागू करने वाला नोडल विभाग है।

बिहार में हर तीसरे आदमी के पास बेनामी संपत्ति
आयकर आयुक्त केसी घुमारिया ने कहा कि बेनामी संपत्ति रखने वालों की बिहार और झारखंड में सूची नहीं तैयार की गई है, लेकिन इस पर काम चल रहा है। बेनामी संपत्ति पर बयान देते हुए घुमारिया ने कहा कि बिहार का हर तीसरा आदमी अपने पास बेनामी संपत्ति रखता है, जिसकी जल्दी ही जांच की जाएगी। वहीं, बेनामी संपत्ति पर लगाम कसने के लिए आयकर विभाग लगातार दबिश कर रही है। बता दें कि बिहार झारखंड में 10,000 लोग ऐसे हैं जिनके अकाउंट में नोटबंदी के दौरान 10 लाख से ज्यादा रुपये आए और उन्होंने अबतक रिटर्न फाइल नहीं किया है।












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