...तो इसलिए हो रही लालू प्रसाद यादव की पार्टी में बगावत

मतलब समझना होगा, दाल में कुछ काला है। अपने आवास पर पार्टी के राज्यभर के प्रमुख नेताओं के साथ समीक्षा बैठक के बाद प्रेस से बातचीत में प्रसाद ने कहा कि मंडलवादी ताकतों को सावधान रहना होगा। जनता ने मोदी के वादों को लिखकर रखा है।
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खासकर ऐसे युवकों ने जिन्हें रोजगार देने का सपना दिखाया गया। स्विस बैंक से पैसा लाने का मामला हो या महंगाई रोकने का हर माोर्चे पर यह सरकार फेल होगी। उसके बाद वह असली मुद्दों से भटकाने के लिए धारा 370 और बंगलादेशी घुसपैठ जैसे मामले उठाना शुरू करेगी।
एक सवाल पर कहा कि हम कैसे हारे यह प्रश्न नहीं है, अभी प्रश्न यह है कि वे कैसे जीते। आरएसएस और कॉरपोरेट जगत के प्रचार तंत्र से जनता धोखे में आ गई। प्रसाद ने कहा कि लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार भाजपा से नहीं हमसे ही लड़ते रहे। हमारे लोगों ने जमकर हमें वोट किया, लेकिन उनका आधार वोट भी उनके साथ नहीं रहा। कई जगह उनलोगों ने हमें हराने के लिए भाजपा को वोट किया। यही कारण है कि 25 सीटों पर उनकी जमानत नहीं बची।
बावजूद भाजपा की साजिश को रोकने के लिए हमने उनकी सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया। बाद में हमें यह कहकर अपमानित किया गया कि किसी ने समर्थन की मांग नहीं की थी। इतना ही नहीं वह हमारी पार्टी भी तोड़ने में जुटे हैं। खर, हमारे पूर्वज भी अपमानित होते रहे हैं। लेकिन इसका बदला कार्यकर्ता लेंगे। अली अशरफ फातमी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि दो साल राज्यसभा में रहने के लिए उन्होंने अपना उसूल बेच दिया।
लालू के बयानों से भले ही वे भाजपा पर तल्ख नज़र आ रहे हों पर राजनैतिक जानकार इसे उनका आक्रोश बता रहे हैं, जो चुनावों में भाजपा के प्रचंड बहुमत से पैदा हुआ है। फिलहाल उनकी पार्टी छोड़कर जाने वालों से उन्हें कोई भी शिकवा-गिला नहीं है।












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