FATF की बैठक से पहले छटपटाया पाकिस्तान, ब्लैकलिस्ट से बचाने के लिए चीन की शरण में इमरान
नई दिल्ली- पेरिस में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निर्णायक बैठक से ठीक पहले पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की चीन यात्रा को उसके ब्लैकलिस्ट होने के डर के से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल, एफएटीएफ की अध्यक्षता इस साल चीन के पास है और पाकिस्तान को आखिरी उम्मीद शी जिनपिंग से ही बची है कि वे उसे उसकी गुनाहों पर पर्दा डालने में मदद करेंगे। पाकिस्तान का टेंशन इसलिए बढ़ा हुआ है कि एफएटीएफ से पहले उसके एशिया प्रशांत समूह ने जो रिपोर्ट दी है, वह पाकिस्तान की पोल खोल चुका है कि वह आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने के प्रति गंभीर नहीं है। बता दें कि एफएटीएफ ने अभी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल रखा है और अब उसे ये फैसला लेना है कि उसे ब्लैकलिस्ट किया जाय या नहीं?

टेरर फंडिंग रोकने में गंभीर नहीं पाकिस्तान
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) में पाकिस्तान पर कार्रवाई का आखिरी वक्त आ चुका है। पेरिस में 13 से 18 अक्टूबर के बीच होने वाली इसकी बैठक में पाकिस्तान को मौजूदा ग्रे लिस्ट से हटाकर ब्लैकलिस्ट में डालने को लेकर फैसला होना है। पाकिस्तान में जारी टेरर फंडिंग के खौफनाक खेल को लेकर अभी तक की रिपोर्ट से पाकिस्तानी हुक्कमरानों के होश उड़े हुए हैं। एफएटीएफ के एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित आतंकियों हाफिज सईद, मसूर अजहर और लश्कर-ए-तैयबा, जमात उद दावा के अलावा एफआईएफ जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की है। जाहिर है कि एफएटीएफ की बैठक से पहले जारी ये रिपोर्ट पाकिस्तान की असलियत सामने लाने के लिए काफी है।
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एपीजी रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल
जानकारी के अनुसार एशिया प्रशांत समूह (एपीजी) की रिपोर्ट के मुताबिक टेरर फंडिंग पर लगाम कसने के लिए एफएटीएफ के 40 मापदंडों में से पाकिस्तान सिर्फ एक को ही पूरा कर पाया है। 9 मापदंडों को उसने थोड़ा ज्यादा पूरा किया है, 26 मापदंडों पर वह बहुत ही कम काम कर पाया है और 4 मापदंडों पर ऐक्शन लेने में वह पूरी तरह से नाकाम रहा है। इस निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद पाकिस्तान की पूरी कोशिश है कि वह ग्रे लिस्ट में ही रहे तो रहे, उसे ब्लैकलिस्ट में न डाला जाय। यही वजह है कि एपीजी की रिपोर्ट आने के बाद से पाकिस्तान ने भारत पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक इंटरव्यू में दावा किया है बाकी मुल्क तो उसके ऐक्शन से संतुष्ट हैं, भारत ही उसे बैल्कलिस्ट कराने की कोशिशों में लगा हुई है।

शी जिनपिंग से गुहार लगाएंगे इमरान
पाकिस्तान के हाथ से समय निकलता जा रहा है। पाकिस्तान की आखिरी उम्मीद चीन पर जा टिकी है, क्योंकि चीन को इस साल ही एफएटीएफ की अध्यक्षता मिली है। खबरों के मुताबिक इमरान खान के मौजूदा चीन दौरे में टेरर फंडिंग का एजेंडा भी सबसे अहम रहेगा। इमरान की कोशिश है कि वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जरिए एफएटीएफ के अध्यक्ष और चाइनीज बैंकर शियांगमिन लियु पर पाकिस्तान को बचाने के लिए दबाव बनाएं। चीन के अलावा पाकिस्तान को तुर्की और मलेशिया से भी उम्मीदें हैं कि वे उसे ब्लैकलिस्ट होने से बचाने में मदद करेंगे, जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर अभी पाकिस्तान के सुर में ही सुर मिलाया है।

अगर इमरान नाकाम रहे तो क्या होगा?
अगर पाकिस्तान की सारी चालबाजियां नाकाम हुईं और उसे टेरर फंडिंग को रोक पाने में नाकाम रहने के लिए एफएटीएफ ने ब्लैकलिस्ट में डाल दिया तो उसकी चरमराती अर्थव्यस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने का खतरा है। वैश्विक संस्थाएं उसे कर्ज देने और वहां निवेश करने में उसको डाउग्रेड करेंगी तो उसकी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। लेकिन, अगर चीन और बाकी पाकिस्तान समर्थक देशों की वजह से पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट में नहीं डाला सका तब भी उसे ग्रेस लिस्ट से निकल पाना मौजूदा परिस्थितियों में बहुत ही मुश्किल होगा। ऐसी स्थिति में उसका संकट कुछ समय के लिए टल तो जरूर सकता है, लेकिन खत्म नहीं होने वाला है।












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