इलाहाबाद HC के जज के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, हटाने की क्या है प्रक्रिया, INDIA bloc को कहां आएगी अड़चन?
Justice Shekhar Kumar Yadav Allahabad HC Impeachment Motion: विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। इंडिया ब्लॉक में शामिल दलों के सांसद वीएचपी के एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर की कुछ टिप्पणियों से इतने नाराज हैं कि उन्हें जज के रूप में नहीं देखना चाहते हैं।
जानकारी के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने वालों में राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल और श्रीनगर से नेशनल कांफ्रेंस के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी सबसे आगे हैं।

इंडिया ब्लॉक ने अब जज के खिलाफ खोला मोर्चा
राज्यसभा में इंडिया ब्लॉक के कुल 85 सांसद हैं, उनमें से सिब्बल के अलावा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश और विवेक तनखा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, टीएमसी के साकेत गोखले और सागरिका घोष, आरजेडी के मनोज झा, समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान,सीपीएम के जॉन ब्रिटास और सीपीआई के संदोश कुमार महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं।
इसे भी पढ़ें- 'बहुमत से चलेगा देश', इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज का विवादित बयान, SC ने लिया संज्ञान
लोकसभा में इस प्रस्ताव पर दस्तखत करने वालों में श्रीनगर के सांसद के अलावा एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, सपा के जिआ-उर-रहमान और मोहिबुल्ला, सीपीआई(एमएल) के सुदामा प्रासद और राजस्थान के भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत शामिल हैं। लोकसभा में अकेले कांग्रेस के 99 सांसद हैं।
महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया?
किसी जज के खिलाफ जांच की मांग और महाभियोग के नोटिस के लिए राज्यसभा में कम से कम 50 सासंदों का हस्ताक्षर चाहिए, वहीं लोकसभा के लिए कम से कम 100 सांसदों के दस्तखत चाहिए। जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 124(4) और 124(5) के साथ जजेज इंक्वायरी एक्ट, 1968 की धारा 3(1)(बी) के तहत महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है।
जज के खिलाफ जांच की क्या प्रक्रिया है?
जब सांसदों की ओर से महाभियोग प्रस्ताव की औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती है तो सदन के पीठासीन अधिकारी उसे या तो स्वीकार कर सकते हैं या खारिज कर सकते हैं। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो उनके खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनेगी, जिसमें दो जज और एक विधिवेत्ता शामिल होंगे। यह समिति तय करेगी कि यह मामला महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उचित है या नहीं।
इस जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक जज और एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट के मामले में दोनों ही जज सर्वोच्च अदालत के ही होते हैं।
संविधान के आर्टिकल 124(4)में जज को हटाने का क्या है प्रावधान?
संविधान के आर्टिकल 124(4) में यह व्यवस्था है कि यह 'महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए उसे सदन के कुल सदस्य संख्या के बहुमत और सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा'पारित होना चाहिए। यह प्रस्ताव दोनों ही सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पास होना चाहिए।
क्या विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव पास करवा पाने में सक्षम है?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में इस समय सत्ताधारी एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत है, इसलिए ऐसा प्रस्ताव आने पर भी यह तब तक पारित हो पाना मुश्किल है, जबतक कि सत्ता पक्ष उसका समर्थन न करे।
अबतक कितने जजों के खिलाफ आया महाभियोग?
आज तक की तारीख में चार बार हाई कोर्ट के जजों और दो बार सुप्रीम कोर्ट के जजों को महाभियोग के माध्यम से हटाने की कोशिश की गई है। सबसे आखिरी प्रयास 2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस दीपक मिश्रा के लिए किया गया था। लेकिन,अबतक के इतिहास में एक भी जज के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
जस्टिस शेखर कुमार यादव पर क्या है आरोप?
हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वहां उन्होंने अपने भाषण में कथित तौर पर कहा कि हिंदुओं के बच्चों को हमेशा सिखाया जाता है कि दयालु और अहिंसक बनो, लेकिन मुस्लिम समुदाय में ऐसा नहीं होता। इस दौरान उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की भी वकालत की, जिसकी व्यवस्था संविधान में भी की गई है।
इसे भी पढ़ें- VHP समारोह में जस्टिस यादव ने जानें क्या दिया था बयान? जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC से मांगी डिटेल
जस्टिस यादव ने यह भी कहा कि हिंदुओं में भी सती प्रथा जैसी कुप्रथाएं थीं, लेकिन वह खत्म हो गया। इसी तरह मुसलमानों को भी तीन तलाक और बहु-विवाह को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे ये कहने में किसी तरह का संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छानुसार चलेगा। यह कानून है...आप यह नहीं कह सकते कि हाई कोर्ट के जज होकर आप ये कह रहे हैं। कानून बहुमत के हिसाब से काम करता है, परिवार या समाज के काम करने के तरीके को देखिए, बहुमत से ही फैसला होता है।'












Click it and Unblock the Notifications