क्या ओमिक्रॉन के खतरे को रोकने के लिए मिलनी चाहिए बूस्टर डॉज? IMA के सीनियर डॉक्टर ने दिया जवाब
नई दिल्ली, दिसंबर 23। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच भारत टीकाकरण अभियान में लगातार कामयाबी हासिल करता जा रहा है। गुरुवार को देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि देश की 60 फीसदी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हैं, यानि कि देश की 60 फीसदी आबादी पूरी तरह से वैक्सीनेट हो चुकी है। इस उपलब्धि के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की केरल यूनिट में रिसर्च सेल के वाइस प्रेजिडेंट राजीव जयदेवन का कहना है कि भारत के टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल हो रहीं कोविशील्ड और कोवैक्सीन कोरोना से मौत के खतरे को लगभग एक समान ही कम करती हैं।

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कोविशील्ड और कोवैक्सीन का असर एकसमान
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए राजीव जयदेवन ने कहा है कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन कोरोना से मृत्यु के खतरे को लगभग एक समान ही कम करती हैं। बूस्टर डोज की चर्चा के बीच उन्होंने कहा कि इन दोनों ही वैक्सीन की 2 या फिर 3 खुराक देने से मृत्यु दर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।
'वैक्सीन के नकारात्मक प्रभाव का कोई मामला सामने नहीं आया'
राजीव जयदेवन ने कहा कि एक देश के रूप में हम जो चाहते हैं, वो यही कि कैसे भी करके कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या को कम किया जाए, इसीलिए हमारा लक्ष्य है कि हम जल्द से जल्द देश की एक बड़ी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज दे दें और हम इस प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। राजीव जयदेवन ने कहा कि आज तक कोविशील्ड और कोवैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा में कोई गिरावट नहीं आई है। उन्होंने कहा कि भारत में कहीं से कोई संकेत नहीं आया है कि लोग इन टीकों को लेने के बाद अचानक बीमार पड़ रहे हैं।
आपको बता दें कि IMA के डॉक्टर राजीव जयदेवन का ये बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की लैब स्टडी में ये सामने आया था कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के द्वारा निर्मित कोविशील्ड वैक्सीन को ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी पाया गया है।












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