मुस्लिम लड़की को अगर गीता बांटने को कहा जाए तब, जावेद अख्तर ने उठाया सवाल
नई दिल्ली- झारखंड की रिचा भारती को कुरान बांटने के रांची की एक अदालत के आदेश पर मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने भी सवाल उठाए हैं। अख्तर ने हिंदू लड़की को सजा के तौर पर कुरान बांटने के आदेश को सांप्रदायिक फैसला करार दिया है। दरअसल, ट्विटर पर एक पत्रकार ने उस मैजिस्ट्रेट के आदेश को 'कम्युनिटी सर्विस' साबित करने की कोशिश की थी, जिसपर जावेद अख्तर ने जोरदार पलटवार किया है।
पत्रकार ने जज के आदेश पर क्या लिखा?
पहले आरफा खानम शेरवानी नाम की एक पत्रकार ने रांची कोर्ट के मैजिस्ट्रेट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया कि, "मैं आमतौर पर संघी प्रोपेगेंडा की चिंता नहीं करती, लेकिन कुछ समझदार धर्मनिरपेक्ष लोग भी कुरान बांटने की रांची कोर्ट के आदेश को लेकर भ्रमित हो रहे हैं। विकसित लोकतांत्रिक देशों में अपराधों की सजा के तौर पर अदालतों द्वारा 'कम्युनिटी सर्विस' देने की रुटीन व्यवस्था बनी हुई है।"
अगर मुस्लिम लड़की को गीता बांटने को कहा जाता तो.........
आरफा खानम की ट्वीट पर जावेद अख्तर ने सख्त आपत्ति जताते हुए उन्हें आईना दिखा दिया। अख्तर ने आरफा को लिखा, " क्या बात करती हो आरफा, हिंदू लड़की को कुरान बांटने के लिए कहना कम्युनिटी सर्विस नहीं, बल्कि शायद गैर-इरादतन 'कम्युनलिज्म की सर्विस' है। ईमानदारी से कहो, अगर एक मुस्लिम लड़की से गीता बांटने के लिए कहा जाता, तो तुम उसे भी 'कम्युनिटी सर्विस' का ही नाम देती।"
जावेद अख्तर की बात नहीं समझीं आरफा
जावेद अख्तर के द्वारा आईना दिखाए जाने के बावजूद आरफा अपनी बात पर कायम रहीं। उन्होंने अख्तर को जवाब दिया कि, "मैं नहीं समझती की कुरान की कॉपी बांटना सांप्रदायिक होगा, लेकिन हां मौजूदा मुस्लिम-विरोधी माहौल में उस जज को ज्यादा सोचना चाहिए था। उदाहरण के लिए, वे उसे एक मुस्लिम स्कूल में पढ़ाने के लिए कह सकते थे या मुस्लिम इलाके के किसी अस्पताल में सेवा देने के लिए कह सकते थे। "

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रांच की एक अदालत ने फेसबुक पर एक पोस्ट की वजह से रिचा भारती नाम की एक छात्रा को 5 कुरान बांटने की शर्त पर जमानत दी थी। जिसके बाद उस जज की बड़ी आलोचना हो रही थी। भारी विरोध के बाद उनको अपना वह विवादास्पद आदेश वापस लेना पड़ गया। खुद रिचा भारती ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी। इस मामले ने राजनीतिक रंग अख्तियार करना भी शुरू कर दिया था। यहां तक वकीलों ने भी जुडिशियल मैजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह से अपना आदेश वापस लेने की मांग की थी। कोर्ट के आदेश को रिचा के मौलिक अधिकारों का हनन भी कहा गया। इससे पहले पुलिस ने रिचा भारती को उस कथित पोस्ट के लिए गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद जमानत पर सुनवाई के दौरान ये बवाल हो गया।
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