मैं ऐसा रोल करना चाहता हूं जो दूसरों के लिए ड्रीम हो जाए: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी
नेटफ्लिक्स पर छह जुलाई से आठ एपिसोड वाली वेब सिरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' शुरू हो रही है. इसमें बॉलीवुड अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अहम किरदार निभा रहे हैं.
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के अलावा सैफ़ अली खान और राधिका आप्टे भी 'सेक्रेड गेम्स' में हैं. इसे विक्रमादित्य मोटवानी और अनुराग कश्यप ने निर्देशित किया है.
बीबीसी ने नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ खास बातचीत की और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए निभाए गए उनके पहले किरदार के साथ ही बॉलीवुड में उनकी आगामी फ़िल्मों 'मंटो' और 'ठाकरे' पर बात की.
पढ़ें नवाज़ुद्दीन ने क्या-क्या कहा...
आपकी छवि बड़े किरदार करने वाले अभिनेता की है. आपने यह वेब सिरीज़ क्या सोच कर किया?
नेटफ्लिक्स की सिरीज़ में पश्चिम के कई बड़े नाम काम कर चुके हैं. उनका अपना एक अलग ही मानदंड है.
ये सिरीज़ कभी कभी फ़िल्म से भी बेहतर होती हैं, क्योंकि उनमें कंटेंट होता है.
दूसरा कारण अनुराग कश्यप और इसका कंटेंट है. यह बहुत अलग और खास है. यह विक्रम चंद्रा के उपन्यास पर आधारित है.
वेब सिरीज़ का ट्रेंड खूब चल रहा है. यहां बतौर अभिनेता आपको क्या आज़ादी मिलती है? क्या लाभ मिलते हैं?
फ़िल्में जो दो ढाई घंटे की होती हैं, उनमें किरदार को तफ़सील से दिखाने का मौका नहीं मिलता, बस उसके कुछ पहलुओं को स्पर्श कर हम लौट आते हैं.
'सेक्रेड गेम्स' में हर किरदार के सभी पहलुओं को छूने की कोशिश की गई है.
मैं इसमें सरगना गणेश गायतोंडे के किरदार में हूं. उसकी कई पेचीदगी, आदतें, भाव और बहुत सी विशेषताएं हैं. आठ एपिसोड के दौरान उसे छूने का पूरा मौका मिला.
मंटो और बाल ठाकरे पर आपकी फ़िल्में आ रही हैं. राजनीति के लिहाज से ये विवादित किरदार कर रहे हैं, जिनकी बहुत चर्चा रही है. इन्हें करने में कोई झिझक हुई?
बिल्कुल नहीं. जिस सहजता, विश्वास और निष्ठा के साथ मैंने मंटो किया उसी के साथ ठाकरे भी किया.
मैं एक अभिनेता हूं. मुझे हर तरह के किरदार करना पसंद है. चाहे मंटो, ठाकरे या गायतोंडे का किरदार हो.
हॉलीवुड में बायोपिक विवेचनात्मक होते हैं यानी उनके हर पहलू को खंगाला जाता है, जबकि यहां उनकी प्रशंसा की जाती है. मंटो और ठाकरे में आपने काम किया है. क्या यह सही है कि भारत की बायोपिक में कैरेक्टर की प्रशंसा की जाती है?
नहीं, ठाकरे या मंटो में हमने तथ्य को ही दिखाया है.
आपने स्टिरियोटाइप चीज़ों को तोड़ा है. आप किसी फ़िल्मी पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं. आपका कोई माई-बाप नहीं था. लेकिन आपने एक अलग जगह बनाई है. कहा जाता है कि हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद बहुत है. क्या यह सच है?
आपका काम ही आपको आगे काम दिलाता है. शुरू में छोटे काम मिलते हैं. चूंकि आपने ये सोचा है कि आपको अभिनेता, निर्देशक या कुछ और बनना है. यह आपने चुना है.
आप पर किसी ने दबाव डाला तो नहीं है कि आपको ये करना है. ये मेरी मर्जी का प्रोफेशन था. जो भी दिक्कतें आई वो मुझे ही सहन करना था. मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है.
रही बात भाई-भतीजावाद की तो उनके लिए पहली फ़िल्म तो मिलना आसान है लेकिन आगे मेहनत उन्हें करनी ही पड़ती है. वो करते हैं. आज के जो भी अभिनेता और स्टार हैं वो मेहनत करते हैं.
आपके लिए ड्रीमरोल क्या है?
मैंने कभी ऐसा सोचा नहीं है. मैं ऐसा रोल करना चाहता हूं जो दूसरों के लिए ड्रीम हो जाए.












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