डीजल की जगह हाइड्रोजन से चलेंगे रेल इंजन, रेलवे शुरू करने जा रहा ट्रायल
नई दिल्ली, 7 अगस्त: दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क यानी भारतीय रेलवे में लगातार नई तकनीकों का विकास हो रहा है। अब उसकी ओर से 89 किलोमीटर सोनीपत-जींद खंड में डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डीईएमयू) पर रेट्रोफिटिंग करके हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित टेक्नोलॉजी के लिए टेंडर किया गया है। इसके जरिए ये पता लगाया जाएगा कि क्या डीजल ईंधन में हाइड्रोजन से चलने वाली तकनीकी लगाई जा सकती है? अगर तकनीकी लग गई तो वो कितनी सफल होगी?

रेलवे ने कहा कि डीजल से चलने वाले DEMU की रेट्रोफिटिंग और इसे हाइड्रोजन ईंधन से चलाने से प्रति वर्ष 2.3 करोड़ की बचत होगी। साथ ही 11.12 किलो टन के कार्बन फुटप्रिंट को भी बचाया जा सकेगा। अभी ये प्रोजेक्ट सोनीपत-जींद खंड पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हो रहा है। अगर ये पूरी तरह से कामयाब रहा, तो हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग सभी रोलिंग स्टॉक को चलाने के लिए किया जा सकता है। मौजूदा वक्त में डीजल के अलावा दूसरा विकल्प विद्युत इंजन है।
इस परियोजना की शुरुआत में दो डीईएमयू को हाइड्रोजन ईंजन लगाकर मॉडिफाई किया जाएगा। इसके बाद दो हाईब्रिड नैरो गेज इंजनों को इसमें परिवर्तित किया जाएगा। अगर ये ट्रॉसफॉर्मेशन सही रही, तो इंजन हाइड्रोजन से चलने लगेंगे।
रेल मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल बहुत कम देश इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। मौजूदा वक्त में जर्मनी में एक रेक का परीक्षण चल रहा है, जबकि पोलैंड में भी अधिकारी अलग से इस तकनीक का परीक्षण कर रहे हैं।












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