सात वर्ष बाद लौटी आर्मी जवान की याददाश्त और लौटे अपने घर कैसे
देहरादून। अभी तक आपने याददाश्त जाने और फिर बड़े ही नाटकीय अंदाज में अक्सर डेली सोप में उसे लौटते देखा होगा। लेकिन क्या कभी असल जिंदगी में आपने ऐसे किस्सों के बारे में सुना है। अगर नहीं सुना है तो अब सुनिए और वह एक इंडियन के के जवान का किस्सा। जिसकी पहले याददाश्त गई फिर वह लापता हुए और फिर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन सात वर्ष बाद वह वापस लौटे और उनकी याददाश्त भी वापस लौट आई।

पिता की खुशी का ठिकाना नहीं
यह कहानी है आर्मी जवान धर्मवीर सिंह की जिनकी उम 39 वर्ष है और जो पिछले हफ्ते अपने घर लौटे हैं। उन्हें घर के दरवाजे पर देखकर उनके पिता कैलाश यादव जो कि रिटायर्ड सूबेदार हैं, की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। धर्मवीर राजस्थान के अलवर के रहने वाले हैं।
क्या हुआ था सात वर्ष पहले
उनके भाई राम निवास ने इंग्लिश डेली को बताया कि वर्ष 2009 में उनके भाई धर्मवीर देहरादून में चकराता रोड पर मिलिट्री की गाड़ी को ड्राइव कर रहे थे। उनके साथ दो और जवान थे और अचानक ही उस रोड पर एक एक्सीडेंट हो गया।
एक डिवाइडर से टकरा कर ट्रक पलट गया और फिर किसी की भी बॉडी नहीं मिल सकी। हालांकि बाकी के दो जवान अपनी-अपनी यूनिट्स में कुछ दिनों बाद लौट आए लेकिन धर्मवीर का कुछ पता नहीं लग सका।
पत्नी को था भरोसा वापस आएंगे धर्मवीर
इसके बाद सेना ने धर्मवीर का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया और उनके परिवार को पेंशन मिलने लगी। जहां सब लोग अपनी-अपनी उम्मीदें छोड़ चुके थे लेकिन उनकी पत्नी मनोजा देवी ने उनके लिए उपवास रखती थीं।
हरिद्वार में लौटी याददाश्त
धर्मवीर ने अपने परिवार को बताया है कि उन्हें कुछ भी याद नहीं कि वर्ष 2009 में जो एक्सीडेंट हुआ उसके बाद उन्हें क्या हुआ इसकी जरा भी जानकारी उन्हें नहीं है। पिछले हफ्ते वह हरिद्वार में थे तभी उन्हें एक बाइक ने टक्कर मार दी। बाइक वाले ने उन्हें अस्पताल पहुंचाय और होश आने पर उनकी सात वर्ष पहले गई याददाश्त भी वापस लौट आई।
कैसे पहुंचे अपने गांव
बाइक वाले ने उन्हें 500 रुपए दिए थे और इन्हीं रुपयों की मदद से उन्होंने दिल्ली का टिकट लियस। इसके बाद वह अलवर के अपने गांव भिटेडा पहुंचे। धर्मवीर इस समय एक सदमे जैसी स्थिति में हैं। लेकिन अपने परिवार और अपनी बेटियों को देखकर वह काफी खुश हैं।
जयपुर में चल रहा इलाज
उनका कहना है कि उनकी बेटियां इतनी बड़ी हो गई है कि उन्हें यकीन ही नहीं हो पा रहा है। उनकी एक बेटी 10वीं और एक बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ती है। फिलहाल उनका परिवार उन्हें जयपुर लेकर आया है जहां पर उनका इलाज चल रहा है।












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