पीएम मोदी ने ऐसे तैयार की जम्मू कश्मीर में ' आर्टिकल-370 एंडगेम' की स्क्रिप्ट
नई दिल्ली। आर्टिकल 370 को खत्म करने वाले सरकार आदेश को 24 घंटे से ज्यादा का समय हो चुका है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें यकीन नहीं हो पा रहा है कि सात दशक बाद आखिरकार यह कानून जम्मू कश्मीर घाटी से हटा और राज्य को मिला विशेष दर्जा भी खत्म हो गया। पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने घाटी में 2,000 सैटेलाइट फोन पहुंचाए गए थे, जिन्हें जम्मू कश्मीर प्रशासन को दिया गया। इसके अलावा ड्रोन तक को सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में तैनात किया गया है। दूसरी ओर, जिस समय दिल्ली में यह आदेश पास हो रहा था राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल कश्मीर पहुंच चुके थे। एनएसए डोवाल अब यहां पर राज्य को एक संघ शासित प्रदेश बनने की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

गृहमंत्री शाह का पहला इशारा
आर्टिकल 370 को घाटी से खत्म करना बीजेपी की पिछले कई दशकों की वह मेहनत है जो आखिरकार पांच अगस्त 2019 को सफल हो पाई है। जनसंघ के समय से ही घाटी से इस कानून को हटाए जाने का सपना था। पांच जुलाई गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष को स्पष्टतौर पर बता दिया था आर्टिकल 370 से पहले एक शब्द अस्थायी भी लगा हुआ है। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सिर्फ पांच लोगों को ही इस बात की जानकारी सरकार एतिहासिक कदम उठाने की तैयारी कर चुकी है।

पांच जुलाई को पीएम मोदी से मिले रॉ चीफ
पांच जुलाई को इंटेलीजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के मुखिया समंत गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। गोयल ने पीएम मोदी को साफ कर दिया था कि भारत के पास बस एक महीने का समय है। इसके बाद उन्होंने पीएम को चेतावनी देते हुए कहा कि एक माह बाद चीजें भारत के नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी। उस समय अमेरिका, पाकिस्तान के साथ वार्ता में होगा जिसका फोकस तालिबान को अफगानिस्तान से बाहर का रास्ता दिखाना है। गोयल ने साफ कर दिया था कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच एक सितंबर को डील हो सकती है।

ट्रंप ने कर दी मध्यस्थता की पेशकश
इसके बाद अमेरिका, पाकिस्तान को उसके रोल के लिए ईनाम में कई तरह की मदद का ऐलान कर सकता है। इसमें मिलिट्री और आर्थिक मदद को बहाल करना शामिल होगा। इसके बाद इस्लामाबाद से खुलेआम आतंकियों को कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को संचालित करेगा। पीएम मोदी और उनकी सरकार पहले से ही इस खतरे से वाकिफ थी कि इसी बीच 22 जुलाई को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान अमेरिकी दौरे पर गए। यहां पर व्हाइट हाउस में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। ट्रंप ने मुलाकात में ही कश्मीर पर मध्यस्थता का प्रस्ताव दे डाला। इमरान खान इस बात से काफी खुश थे।

सरकार ने परखा कानूनी पहलू
पीएम मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी की टॉप टीम जिसमें कई कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हैं और माना जाता है कि अरुण जेटली भी इस टीम में हैं, उसने आर्टिकल 370 को हटाने के कानूनी पहलुओं को परखा। इसके बाद टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची की राष्ट्रपति के आदेश के बाद इस कानून को हटाया जा सकता है, खासतौर पर तब जबकि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हो। पार्टी के सूत्रों की मानें तो इस कानून को हटाने की प्रक्रिया साल 2019 के लोकसभा चुनावों का घोषणा पत्र तैयार करते समय ही शुरू हो गई थी। चुनाव नतीजे आने के बाद ही प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया था। पार्टी को लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत मिला और वह 543 में से 303 सीटें हासिल करने में सफल रही।

23 जुलाई को डोवाल पहुंचे कश्मीर
26 जून को गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर का दौरा किया और उनके साथ इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर अरविंद कुमार और गृह सचिव राजीव गौबा भी थे। सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में हिंसा की आशंका जताई लेकिन इसके बाद भी सरकार ने इसे हटाने का मन बना लिया था। 11 जुलाई को गोयल कश्मीर के दौरे पर गए 23 जुलाई को एनएसए डोवाल घाटी पहुंचे। दिलचस्प बात है कि आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत भी जून में घाटी का दौरा करके लौटे थे और जुलाई में वह फिर कश्मीर पहुंचे। इस बार जनरल रावत नेअपने आर्मी कमांडर्स से कहा कि वे किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें। डोवाल ने 24 जुलाई को तीनों सेनाओं के प्रमुखों और तीनों इंटेलीजेंस प्रमुखों जिसमें एनटीआरओ प्रमुख भी शामिल हैं, उनसे मीटिंग की।

15 दिन पहले लगी मोहर
सूत्रों की मानें तो 15 दिन पहले ही इस कानून को हटाने का अंतिम निर्णय लिया गया था। इसके बाद तेजी से घटनाक्रम बदले। पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने घाटी में 2,000 सैटेलाइट फोन पहुंचाए जिन्हें जम्मू कश्मीर प्रशासन को दिया गया। उन्हें कहा गया कि इंटरनेट और फोन बंद रहेंगे और ऐसे में सैटेलाइट फोन उनकी मदद करेंगे। रविवार रात से ही घाटी में इंटरनेट सर्विस,मोबाइल और लैंडलाइन फोन सर्विस को बंद कर दिया गया। पिछले 10 दिनों में पैरामिलिट्री फोर्सेज की 350 कंपनियां यानी 35,0000 जवानों को घाटी में तैनात किया जा चुका है।
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