Kanwar Yatra 2024: कांवड़ यात्रा तो देशभर में हर जगह होती है, लेकिन यूपी में इसे लेकर बवाल क्यों?

Kanwar Yatra News: सावन का पवित्र महीना शुरू होने जा रहा है। ऐसे में पूरे देशभर में भगवान भोले के भक्त कांवड़ में जल लेकर अपने अराध्य की साधना करते हुए उनपर चढ़ाएंगे। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कांवड़ यात्रियों को लेकर दिए गए आदेश को लेकर बवाल मचा हुआ है।

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी ने पूरे यूपी में कांवड़ मार्गों पर खाने-पीने की दुकानों पर संचालकों-मालिकों का नाम और पहचान बताने का आदेश दिया है, जिसके बाद इस फैसले का विपक्ष ने विरोध करना शुरू कर दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा चीफ मायावती सहित कई नेताओं ने यूपी सरकार के खिलफ मोर्चा खोल दिया है।

Kanwar Yatra

इस बीच सवाल उठता है कि कांवड़ यात्रा तो हरिद्वार से यूपी के अलावा बिहार से झारखंड के देवघर तक सदियों से निकलती आ रही है, लेकिन बिहार-झारखंड में कभी ना कोई विवाद सामने आया नहीं किसी तरह का सरकारी आदेश। ऐसे में आखिर क्या है वजह है, जिसके चलते यूपी सीएम ने खासकर पश्चिम उत्तर प्रदेश को लेकर दुकानों पर नाम लिखने का आदेश दिया है।

बिहार-झारखंड में कांवड़ का अलग स्वरूप

यूपी के इतर झारखंड में कांवड़ यात्रा का अलग ही स्वरूप देखने को मिलता है।सावन के महीने में झारखंड के देवघर में मेला लगता है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। बिहार के सुल्तानगंज से कांवड़ यात्रा शुरू होती है। जहां गंगा से भक्त जल लेकर कावड़ यात्रा मार्ग जो 105 से 108 किलोमीटर का है, तय करके देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक जाते हैं।

मांसाहारी छोड़िए प्याज-लहसुन तक नहीं मिलता

इस कावड़ यात्रा मार्ग पर बिहार और झारखंड की पुलिस-प्रशासन कावड़ियों के लिए हर संभव तैयारी करती है, जिसमें सात्विक भोजन से लेकर मेडिकल तक की सुविधा होती है। यहां तक रास्ते में पड़ने वाले अन्य समुदाय के लोग भी निरामिष खाना नहीं बेचते। इसके अलावा दावा किया जाता है कि अन्य फूड स्टॉल पर प्याज और लहसुन से बना खाना भी नहीं बेचा जाता है।

मालूम हो कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। सावन में एक महीने के अंदर यहां 50 से 55 लाख तीर्थयात्री बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।

यूपी को लेकर आखिर क्यों मचा है बवाल?

यूपी में बड़े पैमाने पर कांवड़ यात्रा निकालने की परंपरा है। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में कांवड़ यात्रा की परंपरा रही है। इसके अलावा प्रयागराज से लेकर बाराबंकी तक कांवड़ यात्रा निकलती है। हालांकि कांवड़ यात्रा का सबसे अधिक उत्साह पश्चिमी यूपी में दिखता है। हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकलने वाले कांवड़ यात्री इस रूट से निकलते हैं।

इस मार्ग में भगवान शिव के कई बड़े मंदिर हैं। यहां पर लोग भगवान का जलाभिषेक करते हैं। मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ से लेकर गाजियाबाद, हापुड़ तक के शिव मंदिरों में इस रूट से गंगाजल लेकर भक्त कांवड़ यात्रा निकालते हैं। ऐसे में सीएम योगी ने इसे देखते हुए बड़ा आदेश आया है।

जानिए आदेश की क्या है वजह?

जैसा की सबको पता है कि कांवड़ के दौरान कांवड़ियों के कुछ नियम होते हैं, जिसमें सात्विक भोजन से लेकर स्नान के साथ कई चीजों का खासा ध्यान रखा जाता है। ऐसे में पश्चिम उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग पर कई मुस्लिम बाहुल इलाके पड़ते हैं। सीएम ऑफिस के मुताबिक कांवड़ यात्रियों की आस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए योगी सरकार ने ये फैसला लिया है।

बताया जाता है कि दुकानों या फिर होटलों पर सही जानकारी नहीं होने के चलते कांवड़ियों को परेशानी होती है। क्योंकि कई ऐसी जगह होती है, जहां शाकाहारी और मांसाहारी एक साथ मिलता है, जिससे आस्था पर गहरा आघात पहुंचता है। इसके अलावा आरोप है कि हिंदू नामों की आड़ में तीर्थयात्रियों को मांसाहारी भोजन बेचा जाता है। यूपी के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अपने एक बयान में कहा कि, "वे वैष्णो ढाबा भंडार, शाकुंभरी देवी भोजनालय और शुद्ध भोजनालय जैसे नाम लिखते हैं और मांसाहारी भोजन बेचते हैं।"

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