OIC: भारत की एक और कूटनीतिक जीत, पाकिस्तान से ऐसे छीना मुस्लिम देशों का सबसे बड़ा मंच

नई दिल्ली। पाकिस्तान के लगातार विरोध के बावजूद भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की बैठक में बतौर 'गेस्ट ऑफ ऑनर' शामिल हुईं। इस बैठक में सुषमा स्वराज के शामिल होने से पाकिस्तान चिढ़ गया और विदेश मंत्री शाह महूद कुरैशी ने कहा कि गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर सुषमा स्वराज के निमंत्रण के चलते सैद्धांतिक तौर पर वे काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, OIC में भारत की मौजूदगी पाकिस्तान पर एक और कूटनीतिक जीत है क्योंकि वह लगातार दबाव बना रहा था कि सुषमा स्वराज के शामिल होने के बाद पाकिस्तान इस बैठक में भाग नहीं लेगा।

पाकिस्तान भारत की मौजूदगी को लेकर शुरू से ही अड़ंगा डाल रहा था

पाकिस्तान भारत की मौजूदगी को लेकर शुरू से ही अड़ंगा डाल रहा था

भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है लेकिन बावजूद इसके भारत को OIC में ना सदस्य का दर्जा प्राप्त है और ना ही पर्यवेक्षक का दर्जा। पाकिस्तान भारत की मौजूदगी को लेकर शुरू से ही अड़ंगा डाल रहा था और धमकी दे रहा था कि अगर भारत की तरफ से सुषमा स्वराज इस बैठत में बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर बुलाया गया तो वह इस बैठक में नहीं शामिल होगा। चार महाद्वीपों के 57 देशों वाला OIC में करीब 1.5 अरब की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश हैं।

चिढ़े पाक ने बैठक से बनाई दूरी

चिढ़े पाक ने बैठक से बनाई दूरी

भारत ने हाल के वर्षों में यूएई से नजदीकियां बढ़ाई हैं जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन का सदस्य देश है। इसके अलावा भारत ने कई मुस्लिम देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। भारत की वैश्विक स्थिति और मुस्लिम आबादी को देखते हुए यूएई के साथ-साथ टर्की ने भी भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। हालांकि इस बदलाव की जमीन साल 2018 की बैठक में ही तैयार होने लगी थी जब ढाका में आयोजित बैठक में टर्की और बाग्लादेश ने इस संगठन में सुधार लाने की बात की थी।

यूएई सरकार ने भारत को आमंत्रित किया था

यूएई सरकार ने भारत को आमंत्रित किया था

इस बैठक में शामिल होने के लिए यूएई सरकार ने भारत को आमंत्रित करते हुए कहा था कि दोस्ताना रवैये वाले देश भारत को मजबूत वैश्विक स्थिति, ऐतिहासिक विरासत और इसके मुस्लिम आबादी को देखते हुए गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर बुलाया जा रहा है। इसके बाद से ही पाकिस्तान लगातार दबाव बना रहा था कि भारत को इस बैठक में ना बुलाया जाए। बांग्लादेश ने भी भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने की वकालत की है।

कई देश भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने के पक्ष में

कई देश भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने के पक्ष में

अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। यूएई के साथ जॉर्डन, ईराक ने OIC में भारत की एंट्री के रास्ते खोले। कई मुस्लिम देशों ने हालांकि भारत का खुलकर समर्थन तो नहीं किया लेकिन उनके 1960 के स्टैंड में काफी बदलाव आया है और इसी का नतीजा है कि भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को इस कूटनीतिक जंग में मात दी है।

'गेस्ट ऑफ ऑनर' के तौर पर शामिल हुईं सुषमा स्वराज

भारत हालांकि मुस्लिम अल्पसंख्यक देश है लेकिन कई देशों की तुलना में भारत में मुस्लिमों की आबादी अधिक है। OIC में कई गैर-मुस्लिम देशों को पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है। केवल 2.5 मुस्लिम आबादी वाले रूस को भी इस संगठन में पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है। साल 1998 में थाईलैंड को भी पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल हुआ था। संयुक्त राष्ट्र के बाद OICदुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटर गवर्नमेंटल ग्रुप है।

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