पत्नी, किसी गैरमर्द से संबंध बनाती है तो उसे सजा क्यों नहीं?

नई दिल्ली। व्यभिचार या एडल्ट्री के केस में अब तक केवल पुरुषों पर मुकदमा चलता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट इसकी समीक्षा करने जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा कि व्यभिचार का दोषी सिर्फ एक पुरुष क्यों है? कोर्ट का कहना है कि जब महिला शादी के बाहर संबंध बनाती है तो सजा सिर्फ पुरुष को क्यों दी जाए?कोर्ट के इस बयान के बाद एक बार फिर ये चर्चा शुरू हो गई है कि भारतीय कानून महिलाओं के पक्ष में ज्यादा है। भारतीय कानूनों पर महिलाओं की तरफ झुके होने के आरोप लग रहे हैं। जहां अब तक केवल महिलाओं के हक में लड़ने वाली एनजीओ होते थे, वहीं पिछले कुछ सालों में पुरुषों के हक के लिए काम करने वाली भी कई एनजीओ बन रहे हैं।

महिला-पुरुष बराबर तो कानून अलग क्यों?

महिला-पुरुष बराबर तो कानून अलग क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला पुरुष बराबर हैं तो आपराधिक कानून भी बराबर होना चाहिए। हर बार महिलाएं पीड़ित नहीं हो सकतीं। बात सही भी है। सालों से भारत में महिलाओं के हक को दबाया गया है जिसे बचाने के लिए कानून बनाए गए। लेकिन पुरुषों का आरोप है कि महिलाओं के हक में बनाए गए इन कानूनों से उनका शोषण हो रहा है।

दहेज कानून का दुरुपयोग

दहेज कानून का दुरुपयोग

पुरुषों के खिलाफ जिस कानून का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है, वो है दहेज उत्पीड़न। पति और परिवार पर दहेज का आरोप लगते ही सबसे पहले गिरफ्तारी की जाती है। कई बार आरोप झूठे निकलते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक आरोप तय न हो जाएं, तब तक गिरफ्तारी न की जाए।

रेप कानून पुरुषों को नहीं देता संरक्षण

रेप कानून पुरुषों को नहीं देता संरक्षण

देश में रेप को लेकर कड़ा कानून है लेकिन ये कानून पीड़ित पुरुष को संरक्षण नहीं देता है। कानून में पुरुष से रेप की कोई परिभाषा नहीं बताई गई है। पुरुषों के हक में काम कर रहे कई संगठनों का कहना है कि इसे भी अपराध की श्रेणी में डाला जाना चाहिए। समाज में प्रचलित सोच यही है कि पुरुषों का रेप नहीं हो सकता, इसलिए कानून भी इनके खिलाफ है।

घरेलू हिंसा का कानून केवल महिलाओं को देता है संरक्षण

घरेलू हिंसा का कानून केवल महिलाओं को देता है संरक्षण

हिंदू अडॉप्शन एंड मेनटेनेंस एक्ट के अनुसार माता-पिता बेटों की देखभाल केवल 18 साल तक की उम्र तक करेंगे। वहीं बेटियों की जब तक शादी नहीं हो जाती, तब तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता की है। घरेलू हिंसा का कानून भी केवल महिलाओं को संरक्षण देता है। तलाक के बाद एलमनी भी केवल महिलाओं को दी जाती है।

व्यभिचार में भी सजा केवल पुरुष को ही

व्यभिचार में भी सजा केवल पुरुष को ही

व्यभिचार में भी सजा केवल पुरुषों को ही मिलती है। अगर एक पति शादी के बाहर संबंध बनाता है तो उसे पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं अगर एक पत्नी शादी के बाहर किसी दूसरे मर्द से संबंध बनाती है तो उसे कोई सजा नहीं मिलती। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समाज के साथ-साथ सोच भी विकसित होती है। अगर महिला-पुरुष बराबर हैं तो उन्हें सजा भी बराबर मिलनी चाहिए।

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