पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा- नोटा मतदाताओं की संख्या कम पाने पर कराओ दोबारा चुनाव

नई दिल्लीः चुनाव में नोटा मतदाताओं की संख्या ज्यादा पाई जाने को लेकर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी एस कृष्णामूर्ति ने बड़ा बयान दिया है। पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी एस कृष्णामूर्ति का कहना है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में किसी उम्मीदवार की जीत का अंतर नोटा मतसंख्या की तुलना में कम पाई जाती है या विजयी उम्मीदार एक तिहाई से कम वोट पाने में असफल रहते हैं तो वहां दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए।

Hold polls again if NOTA is more than winning margin: Ex-CEC

पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति का कहना है कि भारत में 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट निर्वाचन प्रणाली' अब अपनी उपयोगिता खत्म कर चुकी है। एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि, 'मेरे विचार में नोटा बहुत बेहतर है। हमें यह कहना चाहिए कि अगर नोटा मतों के कुछ निश्चित प्रतिशत को पार कर जाता है जैसे अगर विजेता एवं पराजित उम्मीदवार के बीच मतों का अंतर नोटा मतों से कम होता है, तो आप कह सकते हैं कि हमें दूसरी बार चुनाव कराना चाहिए।'

इस बयान का सोशल मीडिया पर काफी समर्थन किया जा रहा है। हालांकि, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त के बयान पर किसी राजनीतिक पार्टी का कोई बयान नहीं आया है। अभी तक इस बयान का किसी भी पार्टी ने समर्थन नहीं किया है।

हाल ही में गुजरात में हुए विधानसभा चुनावों में करीब 1.8 फीसदी मतदाताओं ने ईवीएम पर नोटा बटन दबाया था। करीब 5.5 लाख से लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। गुजरात के विधानसभा क्षेत्रों में जीत का अंतर नोटा मतों की संख्या से कम था।

बता दें, गुजरात विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 99 सीटे मिले थे तो वहीं कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी। 22 साल बाद कांग्रेस गुजरात में वापसी का सपना देख रही थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

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