हिंदी दिवस 2023: 'हिंदी' कैसे बनी भारतीयों के दिलों की 'शहज़ादी'
Hindi Diwas 2023: भाषा नदी जैसी चंचल होती है ये रुकना नहीं जानती, ये सारे बंधन तोड़ कर आगे बढ़ती जाती है। विश्व की लगभग 3,000 भाषाओं में एक हिंदी भाषा का विकास भी ऐसे ही निरंतर होता आया है और अनवरत जारी है। हिंदी आज दुनिया की सबसे बड़ी आबादी द्वारा बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हिंदी को हर भाषा की जननी और हिंदी को भविष्य की भाषा भी कहा गया है। हर वर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' मनाया जाता है। हिंदी दिवस के मौके पर आइए जानते हैं कैसे हिंदी भाषा का विकास हुआ और कैसे हिंदी लोगों के दिलों की भाषा बन गई...

हिंदी का जन्म कहां से हुआ है?
संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन भाषा है, इसे आर्य भाषा या देवभाषा भी कहा जाता हैं। हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा की कोख से हुआ बताया जाता है इसीलिए हिंदी भाषा को संस्कृत की उत्तराधिकारी माना जाता है। देवनागिरी में लिखी जाने वाली साहित्यिक हिंदी संस्कृत से काफी प्रभावित रही है।
भाषाओं की जननी हिंदी
हिंदी के कई विद्वान मानते हैं कि हिंदी का जो विकास हुआ वो अपभ्रंश से हुआ। इस भाषा से कई आधुनिक भारतीय भाषाओं और उपभाषाओं जैसे पश्चिमी हिन्दी, राजस्थानी, गुजरात , लंहदा पंजाबी, सिंधी, पहाड़ी, मराठी, बिहारी, बांग्ला, उडि़या, असमिया और पूर्वी हिन्दी इसमें शामिल है। वहीं कई विद्धान मानते हैं कि हिंदी का उद्भव अवहट्ट से हुआ। अवहट्ट का जिक्र मैथिल कवि कोकिल विद्यापति ने किया था।
विश्व भर में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है हिंदी
भारतीय गणराज की राजकीय और भारतीय आर्य भाषा है। आज से 22 साल पहले जब 2001 में जनगणना हुई थी तब 25.79 करोड़ भारतीय हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रयोग करते थे और 42.20 करोड़ लोग इसकी 50 से अधिक बोलियों में से एक इस्तेमाल करते हैं। सन् 1998 में विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली जानें वाली भाषाओं के उललब्ध आंकड़ों के अनुसार हिंदी को तीसरा स्थान दिया जाता था।
जन-जन की भाषा हिंदी बनी भारत की राजभाषा
कवियों ने अपनी वाणी को जन मानस तक पहुंचाने के लिए हिंदी का ही सहारा लिया। स्वतंत्रता संग्राम, पत्रकारिता में हिंदी भाषा की अहम भूमिका रही। महात्मा गांधी समेत अन्य ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की पैरवी की और 14 सितंबर 1949 में संविधान सभा में निर्णय लिया गया कि हिंदी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। भारत के अधिकांश हिस्सों में हिंदी ही बोली जाती है इसलिए इसे राजभाषा बनाने का निर्णय लिया गया।
आधुनिक हिंदी
हिंदी दिल्ली के उत्तर और पूर्व में पाई जाने वाली खड़ी बोली पर आधारित है। 15वीं से 19वीं शताब्दी तक ब्रज भाषा एक महत्वपूर्ण साहित्यिक माध्यम थी। जिसे अक्सर हिंदी की बोली के रूप में माना जाता है, जैसे अवधी, बघेली, भोजपुरी, बुंदेली, छत्तीसगढ़ी, गढ़वाली, हरियाणवी, कनौजी, कुमायुनी, मगही और मारवाड़ी। हिंदी की इन बोलियों को हिंदी बेल्ट की क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में अधिक सटीक रूप से वर्णित किया गया है। इन क्षेत्रीय भाषाओं के अधिकांश वक्ता स्वयं को हिंदी बोली बोलने वाला मानते हैं।
शहरी और शिक्षित ग्रामीणों की भाषा हिंदी
इसकी एक वजह ये भी है कि ब्रिटिश शासन के शुरुआती दिनों में भाषाओं को वर्गीकृत करने के प्रयास में अंग्रेजों द्वारा इन भाषाओं को हिंदी के साथ समूहीकृत किया गया था। मध्यप्रदेश, राजस्थान,उत्तर प्रदेश, बिहार समेत अन्य कई राज्यों में शहरी मध्यम वर्ग के सदस्य और शिक्षित ग्रामीण हिंदी बोलते हैं क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर इन क्षेत्रीय भाषाओं या बोलियों का उपयोग किया जाता है।
कदमताल नहीं सरपट दौड़ रही है हिंदी
1950 के दशक के बाद से, मास मीडिया (रेडियो, टेलीविजन और फिल्म) के प्रसार और बढ़ती साक्षरता के कारण मानक हिंदी बोलने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। वहीं इंटरनेट आने के बाद से हिंदी का वर्चस्व तेजी से बढ़ा है। डिजिटल माध्यमों में हिंदी का दखल चरम पर है।
सबके दिलों की शहजादी हिंदी
मोबाइल ऐप, बैंक एटीएम, सरकारी और प्राइवेट फॉर्म समेत अन्य माध्यमों में हिंदी का विकास तेजी से हुआ है। यहां तक कि दुनिया की टॉप सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट अपने प्रोडक्ट को हिंदी में बना रही है। विदेशी मोबाइल कंपनियों ने हैंडसेट्स तक में हिंदी को काफी समय पहले से शामिल कर दिया है। सच कहें तो हिंदी भाषा की जननी, साहित्य की गरिमा और जन-जन की भाषा हैं। भले ही रोजगार की भाषा बनने में हिंदी सफल नहीं हो पाई लेकिन वास्तविक जीवन में हिंदी ही सबके दिलों की शहजादी है।
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