अफगानिस्तान के हालात पर पैनी नजर रखे है उच्च स्तरीय समूह, पीएम मोदी के निर्देश पर हुआ है गठन

नई दिल्ली, 31 अगस्त। अफगानिस्तान में बदलती स्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने उच्च स्तरीय समूह का गठन किया था जो भारत की तत्कालीन प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस उच्च स्तरीय समूह में विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसमें अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी और भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने में अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल न होना भी सुनिश्चित करना है।

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    भारतीय हितों पर ध्यान

    भारतीय हितों पर ध्यान

    मामले से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक समूह में शामिल प्रमुख मंत्रियों और संस्थाओं को प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया था कि वे अफगानिस्तान में उभरती स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारतीय हितों पर ध्यान केंद्रित करें।

    प्रधानमंत्री के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समूह पिछले कुछ दिनों से नियमित रूप से बैठक कर रहा है। ग्रुप की बैठकों में जिन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है उनमें अफगानिस्तान में भारतीयों की सुरक्षित वापसी, अफगान नागरिकों की यात्रा, विशेष रूप से हिंदू और सिख जैसे अल्पसंख्यक समुदाय हैं। साथ ही प्रमुखता से यह सुनिश्चित करना भी है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने में किसी भी तरह न किया जाए।

    इसके साथ ही समूह अफगानिस्तान में जमीनी स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं की निगरानी भी कर रहा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा मंगलवार सुबह पारित प्रस्ताव भी शामिल है। सोमवार को ही अमेरिका ने अपनी सेना की पूर्ण वापसी की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अफगानिस्तान पर तालिबान का पूरी तरह कब्जा हो गया है।

    अभी भी अफगानिस्तान में फंसे हैं कई भारतीय

    अभी भी अफगानिस्तान में फंसे हैं कई भारतीय

    अफगानिस्तान में अभी भी कई भारतीय निकाले नहीं जा सके हैं। विदेश मंत्री ने पिछले सप्ताह स्वीकार किया था कि कम से कम 20 भारतीय नागरिक काबुल से एक सैन्य निकासी के दौरान छूट गए थे। हालांकि अफगानिस्तान में वर्तमान में भारतीयों की संख्या का सटीक आंकड़ा नहीं दिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारतीयों की ओर से निकासी के अनुरोध के बाद संख्या बदल गई है।

    माना जा रहा है कि अभी भी कई दर्जन भारतीय नागरिक अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं। हालांकि पिछले महीने के अंत में 1500 भारतीयों की संख्या से यह काफी कम है। पिछले दिनों ही खबर आई थी कि तालिबान ने 140 अफगान सिखों और हिंदुओं के समूह को, जो दिल्ली के लिए रवाना होने पहुंचा था, काबुल हवाई अड्डे में प्रवेश करने से रोक दिया था।

    भारत ने कहा है कि वह उन अफ़गानों के साथ खड़ा होगा जिन्होंने देश का समर्थन किया था और जो तालिबान से खतरों का सामना कर रहे हैं या जिन्हें सताए जाने का डर है। भारत सरकार ने अफगानिस्तान से अधिक लोगों को निकालने के लिए एक नई आपातकालीन ई-वीजा व्यवस्था भी शुरू की। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस व्यवस्था के तहत कितने वीजा जारी किए गए हैं।

    सुरक्षा को लेकर भी भारत की चिंता

    सुरक्षा को लेकर भी भारत की चिंता

    भारत की चिंता सुरक्षा के मोर्चे पर भी है क्योंकि पाकिस्तान स्थिति लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-झांगवी जैसे आतंकवादी समूहों के 10,000 से अधिक लड़ाके कथित रूप से अफगानिस्तान में मौजूद हैं। इसके साथ ही तालिबान के एक प्रमुख ग्रुप हक्कानी नेटवर्क जो अफगानिस्तान में प्रमुख भूमिका निभा चुका है, अतीत में भारतीय हितों को निशाना बना चुका है।

    अगस्त महीने के आखिर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता में अफगानिस्तान को एक प्रस्ताव अपनाया गया है जिसमें सुरक्षा परिषद ने मांग की है कि किसी भी देश पर हमला करने या आतंकवादियों को शरण देने के लिए अफगान धरती का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

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