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Hidma Raje love story: जंगल में पनपा प्यार, नक्सली कैंप में शादी, अनोखी है हिडमा और पत्नी राजे की Love Story

Hidma Raje love Story: छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा पर हुई भीषण मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिलने की खबर है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन में छह नक्सलियों के ढेर होने की पुष्टि हुई है, जबकि सूत्रों का दावा है कि मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर मादवी हिडमा और उसकी पत्नी राजे (Hidma wife Raje) भी मारे गए हैं।

हालांकि, अधिकारियों ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हिडमा और राजे नक्सली नेटवर्क के अंदर अहम भूमिकाओं में माने जाते थे और कई हमलों की साजिशों से उनके नाम जुड़ते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।

Hidma Raje love Story
(AI Image)

अनोखी है हिडमा-राजे की लव स्टोरी

मादवी हिडमा और उसकी पत्नी राजे की कहानी नक्सली संगठन के भीतर जन्मे एक ऐसे रिश्ते को दिखाती है, जो हिंसा और संघर्ष से भरी दुनिया के बीच पनपा। दोनों लंबे समय तक एक ही कमांड स्ट्रक्चर में काम करते हुए एक-दूसरे के करीब आए। जंगलों में लगातार होने वाली आवाजाही, अभियानों की रणनीति और भूमिगत जीवन की कठिनाइयों ने उन्हें भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कहा जाता है कि इसी दौरान दोनों ने संगठन के भीतर ही विवाह कर लिया था। उनके रिश्ते को नक्सली कैडर एक प्रभावशाली जोड़ी के रूप में देखता था, हालांकि यह रिश्ता भी बाकी जीवन की तरह हिंसा और जोखिम से घिरा रहा।

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माडवी हिड़मा: 17 साल की उम्र में नक्सली जीवन की शुरुआत

माडवी हिड़मा का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था. 1996-97 में, मात्र 17 साल की उम्र में, हिड़मा माओवादी संगठन में शामिल हो गया। संगठन में शामिल होने से पहले वह खेती करता था। उसकी मां आज भी पुवर्ती गांव में रहती हैं, और हाल ही में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उनसे मिलकर हिड़मा से आत्मसमर्पण की अपील की थी। हिड़मा को हिडमन्ना, हिडमालु और संतोष के नाम से भी जाना जाता है।

सीखने की ललक: हिंदी से अंग्रेजी तक का सफर

माडवी हिड़मा स्वभाव से कम बोलने वाला था, लेकिन उसमें नई चीजें सीखने की प्रबल इच्छा थी। दक्षिण बस्तर से होने के कारण शुरुआत में उसे हिंदी नहीं आती थी, क्योंकि उस क्षेत्र में हिंदी का चलन कम था। सातवीं कक्षा तक पढ़े हिड़मा ने नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद हिंदी सीखी. इसके बाद, उसने माओवादी संगठन के लिए काम करने वाले एक लेक्चरर से अंग्रेजी भी सीखी, जो उसकी सीखने की ललक को दर्शाता है।

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