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#KarnatakaFloorTest: कांग्रेस-जेडीएस का मास्टर स्ट्रोक, मुश्किल करेगा भाजपा की राह

By Ankur Singh
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    बेंगलुरू। कर्नाटक में आज शाम 4 बजे होने वाले अहम फ्लोर टेस्ट से पहले बड़ी बात सामने आई है। दरअसल आज होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस-जेडीएस कोर्ट में 116 विधायकों का समर्थन वाला शपथ पत्र देने की तैयारी कर रही थी, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने आज शाम को 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराने का फैसला दिया तो कांग्रेस-जेडीएस ने इस शपथपत्र को कोर्ट में पेश नहीं करने का फैसला लिया है। दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात का फैसला लिया है कि वह कोर्ट में विधायकों के समर्थन का शपथ पत्र पेश नहीं करेंगे।

    एफिडेविट नहीं दाखिल किया

    एफिडेविट नहीं दाखिल किया

    द क्विंट की खबर के अनुसार इससे पहले 18 मई को कांग्रेस-जेडीएस के नेता विधायकों के शपथपत्र को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन जब कोर्ट ने 19 मई को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया तो इस शपथ पत्र को कोर्ट में नहीं पेश किए जाने का फैसला लिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कई बार बहुमत साबित करने के लिए अधिक समय मांगा, बावजूद इसके कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट करने के लिए 19 फरवरी शाम 4 बजे का समय मुकर्रर किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जेडीएस-कांग्रेस को छह हफ्ते का समय दिया गया है कि वह काउंटर एफिडेविट को कोर्ट में फाइल करें और इसके चार हफ्ते बाद फिर से एफिडेविट दाखिल कर सकते हैं अगर वह करना चाहते हैं तो।

    येदुरप्पा के खिलाफ कोर्ट गई थी कांग्रेस-जेडीएस

    येदुरप्पा के खिलाफ कोर्ट गई थी कांग्रेस-जेडीएस

    सूत्रों की मानें तो 116 विधायकों के शपथ पत्र में कांग्रेस विधायक आनंद सिंह शामिल नहीं हैं, जोकि खबरों के अनुसार 17 मई से लापता हैं और कांग्रेस के संपर्क में नहीं हैं। आपको बता दें कि 17 मई को देर रात सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने येदुरप्पा सरकार के शपथग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस ने कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला के भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि कोर्ट ने इस मामले को 18 मई को सुबह 10.30 बजे सुनने का फैसला लिया था।

    क्या साबित होगा मास्टर स्ट्रोक

    क्या साबित होगा मास्टर स्ट्रोक

    जिस तरह से कांग्रेस-जेडीएस ने कोर्ट में विधायकों का समर्थन पत्र दाखिल नहीं करने का फैसला लिया है उसके बाद माना जा रहा है कि यह एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। लेकिन अगर कोई भी विधायक अपना समर्थन नहीं देता है तो वह दल-बदल कानून के तहत अयोग्य हो जाएगा। ऐसे में अगर यह एफिडेविट कोर्ट में दायर किया जाता है तो भाजपा को विधायकों की खरीद-फरोक्त करने में मुश्किल हो सकती है। लेकिन फ्लोर टेस्ट अगले 24 घंटे के भीतर कराए जाने के आदेश के बाद इस एफिडेविट को पेश नहीं किए जाने का फैसला लिया गया।

    आखिर कैसे भाजपा साबित करेगी बहुमत

    आखिर कैसे भाजपा साबित करेगी बहुमत

    इन सब के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भाजपा कैसे पूर्ण बहुमत का दावा कर रही है। दरअसल भापजा को बहुमत साबित करने के लिए 111 विधायकों की जरूरत है। माना जा रहा है कि भाजपा 2008 के अपने ऑपरेशन लोटस को एक्शन में ला सकती है, जिसके तहत वह विपक्ष के 14 विधायकों को फ्लोर टेस्ट के दौरान वोटिंग से दूर करने की कोशिश करेगी ,जिससे की सदन में कुल विधायकों संख्या 207 तक पहुंच जाए। ऐसे में अगर 14 विधायक वोटिंग करने से रोके जाते हैं तो भाजपा को पूर्ण बहुमत के लिए 104 सीटों की जरूरत होगी जोकि उसके पास है।

    इसे भी पढ़ें- Karnataka Floor Test: कांग्रेस-जेडीएस के 20 लिंगायत विधायक आज पलट सकते हैं पासा, ये है बड़ी वजह

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    English summary
    Here is the masterstroke of Congress-JDS ahead of Karnataka floor test. Both party decided not to file affidevit.

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