अगले 50 साल तक भाजपा को सत्ता में रखने के पीछे क्या है अमित शाह की रणनीति?
नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव में अब कुछ महीनों का समय बचा रह गया है। यही नहीं पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल पहले ही बज चुका है। ऐसे में भाजपा अपने सियासी रथ को लेकर मैदान में उतर चुकी है। 2014 के चुनाव की बात करें तो नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह अपने हर भाषण में विकास की चर्चा करते थे। लेकिन समय के साथ अब विकास का यह नारा धीरे-घीरे मंद पड़ने लगा है। विकास के इस नारे ने अब मंदिर, हिंदू और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों ने ले ली है। अमित शाह के हाल के तमाम बयानों पर अगर नजर डालें तो शाह लगातार अपनी रैलियों में इन मुद्दों पर अब खुलकर बोलते नजर आ रहे हैं।

सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट को दो टूक
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया उसके बाद अमित शाह ने केरल के दौरे पर खुलकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कोर्ट को ऐसा फैसला नहीं देना चाहिए जिसे लागू नहीं किया जा सके। शाह के इस बयान की तकरीबन हर विपक्षी दल ने आलोचना की। यहां तक कि शाह ने यह तक कह डाला कि केरल की सरकार उन लोगों का खून बहा रही है जो अपनी आस्था को बचाने के लिए सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

दीमक की तरह चाट रहे हैं घुसपैठिए
मध्य प्रदेश में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि अवैध घुसपैठिये दीमक की तरह होते हैं. वे खाना खा रहे हैं जो कि हमारे गरीबों को जाना चाहिए और वे हमारी नौकरियां भी ने रहे हैं. ये हमारे देश में विस्फोट कराते हैं जिसमें बहुत सारे लोग मारे जाते है। यही नहीं शाह ने दिल्ली के रामलीला मैदान में पूर्वांचल के महाकुंभ को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से पूछा दिल्ली के अंदर अवैध घुसपैठियों से परेशानी है या नहीं, इन्हें देश से निकालना चाहिए या नहीं। करोड़ों की तादात में घुसपैठिए घुस गए हैं और दीमक की तरह चाट गए हैं, इन्हें उखाड़ फेंकना चाहिए या नहीं। शाह ने कहा कि 2019 में अगर हम सत्ता में आते हैं तो राष्ट्रव्यापी स्तर पर देश में अवैध घुसपैठियों की पहचान कराई जाएगी।

चुन-चुनकर बाहर निकालेंगे
तकरीबन हर चुनावी रैली में शाह अवैध घुसपैठियों के मुद्दे को उठाते हैं। राजस्थान के गुरुदासपुर में शाह ने कहा कि भाजपा सरकार एक एक घुसपैठिए को चुन चुनकर मतदाता सूचि से हटाने का काम करेगी। यही नहीं शाह ने जिस तरह से पिछले महीने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दावा किया कि अगर भाजपा 2019 में सत्ता में आती है तो वह अगले 50 सालों तक सत्ता में रहेगी, उससे साफ है भाजपा आने वाले समय में इन तमाम मुद्दों को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी।

भाजपा का हथियार
अवैध नागरिकों के मुद्दे को देखे तो शाह के बयान से यह साफ है कि अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को देश से चुन-चुनकर बाहर निकालने की बात कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नागरिकता बिल 2016 की बात करें तो इसके अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बुद्ध, जैन, पारसी, ईसाई भारत की नागरिकता के लिए योग्य होंगे, जबकि मुसलमान इसके लिए योग्य नहीं होंगे। ऐसे में अगर यह बिल पास होता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।

ध्रुवीकरण
जिस तरह से बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार कटघरे में खड़ी दिखी उसके बावजूद शाह के इस आत्मविश्वास के पीछे की वजह को समझना जरूरी है। दरअसल जिस तरह से शाह ने अपने बयानों मे इन मुद्दों को उठा रहे है, उससे साफ है कि वह इसी बिल के आधार पर लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे आगामी चुनाव में वह अवैध नागरिकों को चुन-चुनकर बाहर निकालने का काम करेंगे। बहरहाल देखने वाली बात अहम है कि शाह के इन तमाम बयानों के बाद क्या आगामी चुनावों में ध्रुवीकरण होगा।
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