टेंशन वाली रिपोर्ट: भविष्य में 3 गुना बढ़ जाएगी गर्मी, ठंड के मौसम में भी इन इलाकों में चलेगी लू

नई दिल्ली: ग्लोबल वार्मिंग इंसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। इसको रोकने के लिए सभी देश कड़े कदम उठा रहे, लेकिन कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा। इस बीच एक और चिंताजनक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ कहा गया कि अगर जलवायु परिवर्तन ऐसे ही होता रहा, तो खतरनाक गर्मी कम से कम तीन गुना बढ़ जाएगी।

ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन चिंताजनक

ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन चिंताजनक

जनरल कम्युनिकेशन अर्थ एंड एनवायरमेंट पत्रिका में छपे अध्ययन के मुताबिक हाल ही के कुछ सालों में देखा गया है कि भारत समेत एशिया के ज्यादातर इलाकों में जबरदस्त हीट वेव आ रही। अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन इसी तरह होता रहा, तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे। इसके अलावा इस सदी के अंत तक दुनियाभर में गर्मी काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।

हीट इंडेक्स कैसे होता है तैयार?

हीट इंडेक्स कैसे होता है तैयार?

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता लुकास वर्गास जेपेटेलो के मुताबिक ग्रीष्मकाल में जब गर्मी रिकॉर्ड तोड़ती है, तो वो बहुत बड़ी घटना लगती है, लेकिन कुछ सालों बाद से सब सामान्य लगने लगेगा। इसकी वजह तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। वहीं तापमान और नमी के संयोजन को देखकर 'हीट इंडेक्स' तैयार किया जाता है। इसमें सूचकांक में 103 डिग्री (39.4 डिग्री सेल्सियस) को 'खतरनाक' के रूप में परिभाषित किया गया, जबकि 124 डिग्री (51 डिग्री सेल्सियस) को 'बहुत ज्यादा खतरनाक' माना गया है।

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ज्यादा होगी गर्मी

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ज्यादा होगी गर्मी

लुकास के मुताबिक 2100 तक ये हीट इंडेक्स अमेरिका के दक्षिणपूर्व जैसे स्थानों के लिए बहुत ज्यादा बुरा हो जाएगा। इसके अलावा उष्णकटिबंधीय इलाकों के लिए भी ये बहुत ज्यादा बुरा साबित होगा। उष्णकटिबंधीय वर्षा-वन एक ऐसा क्षेत्र होता है जो भूमध्य रेखा के दक्षिण या उत्तर में लगभग 28 डिग्री के भीतर है। ये एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका, मेक्सिको और प्रशांत द्वीपों पर पाए जाते हैं। वहां पर भविष्य में हीट इंडेक्स 124 डिग्री (51 डिग्री सेल्सियस) होने की आशंका है।

गर्मी कम होने की संभावना 5 प्रतिशत

गर्मी कम होने की संभावना 5 प्रतिशत

लुकास ने आगे कहा कि ये इस बारे में डरावनी बात है। अगर ऐसे ही हालत रहे तो भविष्य में अरबों लोग भीषण गर्मी की चपेट में आने वाले हैं। अध्ययन में ये भी पाया गया कि ग्लोबल वार्मिंग के कम होने की केवल 5 प्रतिशत संभावना है, जबकि साल 2100 तक 103 डिग्री (हीट इंडेक्स) साल के हर दिन देखने को मिलेगा। सामान्य भाषा में कहें तो गर्मी, मानसून और ठंड हर मौसम में लू चलेगी।

आधे साल से ज्यादा वक्त तक गर्मी

आधे साल से ज्यादा वक्त तक गर्मी

वहीं शोध के दूसरे लेखक और वायुमंडलीय वैज्ञानिक प्रो. डेविड बत्तीस्टी ने कहा कि दक्षिण-पूर्वी और मध्य अमेरिका सहित-मध्य अक्षांशों में गर्मी के खतरनाक स्तर वाले दिनों की संख्या 2050 तक दोगुनी से अधिक हो जाएगी। इसके बाद 2100 तक उष्णकटिबंधीय इलाकों में साल का आधा हिस्सा खतरनाक गर्मी का सामना करेगा।

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