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कर्नाटक विधानसभा में कुमारस्वामी का भावुक संबोधन, कहा- मैं बेहद आहत हूं और पद छोड़ने को तैयार हूं

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार ने सभी वादों को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि मैंने किसानों को धोखा नहीं दिया। बजट के दौरान सिद्धारमैया ने जो भी घोषणा की है, मैंने उनमें से किसी भी फंड में कोई कटौती नहीं की है। हमने कृषि ऋण माफी का वादा किया है और इसके अनुसार राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ बैठकें की हैं। फंडों को भी मंजूरी दी है। हमने किसानों से जानकारी मांगी है। कुमारस्वामी ने कहा कि हमें बैंकों की ओर से बताया गया है कि राशि का वितरण किया जाएगा।

मैंने किसानों को धोखा नहीं दिया

मैंने किसानों को धोखा नहीं दिया

मैंने किसानों को धोखा नहीं दिया है। इसके अलावा अपने संबोधन में कुमारस्वामी ने कहा कि जब से सरकार बनी थी तब से मीडिया में अस्थिरता की रिपोर्ट आती रही। हमारे अधिकारियों ने दिन रात काम किया है। अगर मैं कुछ भी हासिल किया है तो यग उन अधिकारियों की उपलब्धि हैं। विधानसभा में कुमारस्वामी ने कहा कि मुझे विश्वासमत अपनी तरफ खींचने का मेरा कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि इस बात पर चर्चा चल रही है कि मैंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और कुर्सी से अभी तक क्यों चिपका हूं।

विश्वासमत को मोड़ने का कोई इरादा

विश्वासमत को मोड़ने का कोई इरादा

कुमारस्वामी ने कहा कि विश्वासमत को अपनी तरफ मोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं था। मैं स्पीकर और राज्य के लोगों से माफी मांगता हूं। विधानसभा में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि वह खुशी-खुशी पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। इस दौरान उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था सीएम राज्य को अंधेरे में धकेल रहे हैं। इस पर कुमारस्वामी ने कहा कि क्या मुझे ऐसा प्रमाणपत्र पाने के लिए मुख्यमंत्री बनना चाहिए था? आज मैं खुशी से अपना पद छोड़ने को तैयार हूं।

विधानसभा में कुमारस्वामी ने पुराने दिनों को किया याद

विधानसभा में कुमारस्वामी ने पुराने दिनों को किया याद

विधानसभा में अपने स्पीच के दौरान कुमारस्वामी ने अपने पुराने दिनों को भी याद किया। कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के लिए लड़ाई लड़ी हैं चाहे जो भी हो। 1996 में मुझे लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा गया था। कांग्रेस के उम्मीदवार चंद्रशेखर मूर्ति के खिलाफ खड़े होने के लिए कोई नहीं था तब मुझे मैदान में उतरने के लिए कहा गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुझे शिवकुमार के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए कहा, क्योंकि कोई और नहीं था। मैंने चुनाव लड़ा और हार गया। मैं तब राजनीतिक छोड़ना चाहता था लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुझे जाने नहीं दिया।

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