क्या लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन के लिए बुलाया गया है विशेष संसद सत्र?

केंद्र सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर के बीच संसद का जो विशेष सत्र बुलाया है, उसके एजेंडा को लेकर विपक्ष का भी गला सूख रहा है। उसे आशंका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से कोई ऐसा सियासी तीर चलेंगे, जो उनकी रणनीतियों को बेपटरी कर देंगे।

अभी तक संसद के विशेष सत्र को लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं। उसी में से एक यह भी है कि कहीं 2024 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन को लेकर कोई बड़ा फैसला तो नहीं लेने जा रही है।

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जनसंख्या आधारित परिसीमन पर जताई जा चुकी है चिंता
वैसे तो देश में परिसीमन का समय 2026 या उसके बाद निर्धारित है, लेकिन विपक्षी दलों में इसको लेकर पहले से ही आशंका रही है। क्योंकि, इसी साल मई में तेलंगाना के मंत्री और प्रदेश के सीएम के चंद्रशेखर राव के बेटे केटी रमाराव ने यह मुद्दा उठाना शुरू किया था। उन्होंने तब कहा था कि अगर इसका आधार जनसंख्या को बनाया गया तो दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए यह 'घोर अन्याय' होगा। वह उत्तर भारतीय राज्यों के जीडीपी में कम योगदान की ओर इशारा कर रहे थे।

परिसीमन के बाद की स्थिति के हिसाब से ही बना है नया संसद भवन
गौरतलब है कि संसद का आने वाला सत्र नए संसद भवन में आयोजित होने जा रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मई, 2023 को किया था। यहां लोकसभा में 888 सांसदों के बैठने के लायक पर्याप्त जगह है। जबकि राज्यसभा भी इतना बड़ा है कि 384 सांसद इसमें बैठ सकते हैं। यह इंतजाम भविष्य में होने वाले परिसीमन को देखर ही किया गया है, जिसमें संसदीय सीटों की संख्या बढ़नी तय हैं।

अभी लोकसभा में है कुल 543 सीटें
दरअसल, संविधान के 84वें संशोधन के मुताबिक संसदीय सीटों की संख्या 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना यानी कम से कम 2031 तक स्थिर रखी गई है। अभी जो लोकसभा सीटों का निर्धारण है, उसका आधार 1971 की जनगणना है। मौजूदा समय में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 सीमित है। इनके अलावा दो सीटें नामित सदस्यों के लिए रखी गई हैं।

परिसीमन के बाद बीजेपी को मिलेगा फायदा?
कुछ रिपोर्ट के मुताबिक जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर बीजेपी को फायदा मिल सकता है। क्योंकि अनुमानों के हिसाब से इसके बाद सिर्फ यूपी-बिहार में लोकसभा की सीटें 222 हो जाएंगी, जो कि अभी सिर्फ 120 हैं। जबकि, दक्षिण भारत के 6 राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को मिलाकर यह 165 रह सकती हैं। वहीं बाकी देशों में यह सीटें बढ़कर 461 रह सकती हैं।

संसद के विशेष सत्र के संभावित एजेंडे
देश में आबादी के हिसाब से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन को लेकर संसद के विशेष सत्र में कोई संभावित प्रस्ताव लाने के अलावा, अटकलों में जो मुद्दे शामिल हैं उनमें- वन नेशन वन इलेक्शन, महिला आरक्षण, यूनिफॉर्म सिविल कोड और देश का अंग्रेजी नाम 'India' हटाकर पूरी तरह से 'भारत' करने जैसी चर्चाएं शामिल हैं।

परिसीमन का मतलब?
परिसीमन वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित की जाती है। भारत में परिसीमन की जिम्मेदारी एक सशक्त संस्था परिसीमन आयोग के हाथों में रहती है। देश में संविधान लागू होने के बाद अबतक चार बार परिसीमन आयोगों का गठन किया जा चुका है। पहली बार 1952, दूसरी बार 1963, तीसरी बार 1973 और चौथी बार 2002. इन चारों बार नए परिसीमन कानून के मुताबिक यह कार्य किया गया था।

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