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क्या कांग्रेस से नगमा के मामले में भी हुई है प्रियंका चतुर्वेदी और उर्मिला मातोंडकर वाली गलती ?

मुंबई, 30 मई: कांग्रेस में राज्यसभा के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने के बाद काफी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप लग रहे हैं कि सिर्फ उन्हीं को जगह मिली है, जिन्हें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का आशीर्वाद प्राप्त है या फिर जो 10 जनपथ के 'यस मैन' हैं। दूसरे राज्यों के नेताओं को टिकट देने से भी काफी असंतोष दिख रही है। नाराजगी जाहिर करने वालों में कांग्रेस की महिला मोर्चा की महासचिव, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी की पार्टी इंचार्ज और मुंबई महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष नगमा का भी नाम शामिल है। इससे पहले इसी तरह से मायूस होकर प्रियंका चतुर्वेदी और उर्मिला मातोंडकर भी कांग्रेस से निकल चुकी हैं। सवाल है कि कांग्रेस ने नगमा के मामले में वही गलती तो नहीं दोहराई है।

प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस से निकलीं और राज्यसभा पहुंचीं

प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस से निकलीं और राज्यसभा पहुंचीं

प्रियंका चतुर्वेदी इस समय राष्ट्रीय स्तर पर संजय राउत के बाद शिवसेना की सबसे हाई-प्रोफाइल वक्ता हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा है और वह सदन में पार्टी की उपनेता भी हैं। प्रियंका 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अप्रैल, 2019 में कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में आईं थीं, तब पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन था। उनके पास कांग्रेस में एक अच्छी भूमिका थी और माना जाता था कि उनका युवाओं पर अच्छा प्रभाव है। प्रियंका ने इसलिए कांग्रेस छोड़ी थी कि आरोपों के मुताबिक उनके साथ यूपी के मथुरा में बदतमीजी करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस ने पार्टी में वापस ले लिया था। वह ऐसा समय था, जब राहुल गांधी की नीति के तहत कांग्रेस राफेल के मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले कर रही थी और प्रेस कांफ्रेंस और टीवी डिबेट में प्रियंका उसका मुख्य चेहरा होती थीं।

उर्मिला 'तुच्छ घरेलू-राजनीति' की वजह से कांग्रेस से निकलीं

उर्मिला 'तुच्छ घरेलू-राजनीति' की वजह से कांग्रेस से निकलीं

बॉलीवुड की अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को 2019 के लोकसभा चुनावों से पहली उसी साल मार्च में राहुल गांधी की मौजूदगी में बड़े प्रचार-प्रसार के साथ कांग्रेस में शामिल किया गया था। पार्टी ने उन्हें मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन एनडीए की लहर में उनका बॉलीवुड वाला जलवा बेकार हो गया। सिर्फ सात महीने बाद ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और इस्तीफे में इसका कारण पार्टी की 'तुच्छ घरेलू-राजनीति' को जिम्मेदार ठहराया। लगभग उसी तरह से जैसे राज्यसभा चुनावों में 10 जनपथ के करीबियों को टिकट दिए जाने पर आरोप लग रहे हैं। मातोंडकर ने करीब एक साल इंतजार किया और फिर 1 दिसंबर, 2020 को शिवसेना में शामिल हो गईं। प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना के कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल होने से पहले शिवसेना में आई थीं और मातोंडकर तो महा विकास अघाड़ी की सरकार के दौरान ही आ गईं। अलबत्ता, वह विधान परिषद इसलिए नहीं पहुंच पाई हैं, क्योंकि उनके नाम समेत 11 मनोनीत सदस्यों वाली फाइल राजभवन में अटकी हुई है।

कांग्रेस की लिस्ट देखकर भड़कीं नगमा

कांग्रेस की लिस्ट देखकर भड़कीं नगमा

अब कांग्रेस नेता नगमा ने जिस तरह से कांग्रेस की राज्यसभा के उम्मीदवारों की लिस्ट देखकर जिस तरह से असंतोष जाहिर किया है, ऐसा पहली बार नहीं है। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ी थी, तब सचिन पायलट ने कहा था कि अगर बातचीत के जरिए विवाद सुलझाए जाते तो ऐसी नौबत नहीं आती। नगमा ने बिना देर किए उनका समर्थन ही नहीं किया था, बल्कि हम लोगों में से काफी लोगों में असंतोष है, यह भी कहा था। लेकिन, इस बार उनका अंदाज ए बयां कुछ जरा ज्यादा तल्ख है। उन्होंने सोनिया गांधी पर ही वादाखिलाफी का आरोप लगा दिया है।

'हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई'

'हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई'

नगमा ने पार्टी के फैसले पर जो सिलसिलेवार ढंग से ट्वीट किया है, वह इस तरह से है- पहले कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट में अपना नाम नहीं देखकर पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपना दर्द बयां किया "शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई"। नगमा ने इसे रिट्वीट कर कैप्शन में लिखा, 'हमारी भी 18 साल की तपस्या कम पड़ गई इमरान भाई के आगे ।' दरअसल, उन्होंने यूपी के नेता और कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी पर तंज कसा, जो युवा हैं और पिछला लोकसभा चुनाव मुरादाबाद से हार चुके हैं।

सोनिया पर वादाखिलाफ का लगाया आरोप

सोनिया पर वादाखिलाफ का लगाया आरोप

कुछ घंटे बाद काफी तसल्ली से सोचने के बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया और सीधे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर वादाखिलाफी का आरोप लगा दिया। उन्होंने लिखा, 'हमारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनियाजी ने मुझसे निजी तौर पर 2003/04 में राज्यसभा में भेजने की प्रतिबद्धता दिखाई थी, जब मैं कांग्रेस पार्टी में उनके कहने पर शामिल हुई थी, तब हम सत्ता में नहीं थे। तब से 18 साल हो गए हैं, उन्हें कोई मौका नहीं मिला है, मिस्टर इमरान को महाराष्ट्र से राज्यसभा में समायोजित किया गया है, मैं पूछती हूं कि क्या मैं कम योग्य हूं....' हालांकि, नगमा ने अगले ट्वीट में सभी उम्मीदवारों को परिणाम आने से पहले अग्रिम बधाई भी दी है।

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