पटौदी महापंचायत : 'लव जिहाद' का जहां कोई मामला नहीं वहां क्यों हुई महापंचायत?

महापंचायत
UGC
महापंचायत

पटौदी की एक तंग गली में जब हमारी कार एक किराना दुकान के सामने रुकी तो वहां खड़े युवकों ने कहा, "हम गाड़ी पर प्रेस लिखा देखकर ही समझ गए थे कि रिपोर्टर महापंचायत पर बात करने आया है."

गले में भगवा कपड़ा डाले एक युवा ने कहा, "हम महापंचायत के बारे में खुलकर बात करेंगे, अपने विचार रखेंगे. लेकिन अभी यहां नहीं, अकेले में..."

किराने की इस दुकान के बाहर सात-आठ युवा चर्चा कर रहे थे. इनमें से कई ने गले में भगवा कपड़ा और माथे पर तिलक लगा रखा था. युवाओं का ये समूह 04 जुलाई को पटौदी के रामलीला मैदान में हुई महापंचायत में भी शामिल रहा था.

पटौदी में हाल ही में बने धर्म रक्षा मंच ने इस पंचायत का आयोजन किया था. इसमें पटौदी और आसपास के गांव के लोगों के अलावा बाहर से आए हिंदुवादी कार्यकर्ताओं और साधु-संतों ने भी हिस्सा लिया था. स्थानीय प्रशासन ने इस पंचायत की अनुमति नहीं दी थी.

एसडीएम प्रदीप कुमार के मुताबिक़, हिंदू संगठनों ने पंचायत के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन आवेदन निरस्त कर दिया गया था.

इस पंचायत में अल्पसंख्यक मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसक और उत्तेजक नारेबाज़ी की गई. एक आयोजक के मुताबिक़, पंचायत का मक़सद 'लव जिहाद, ज़मीन जिहाद और धर्मांतरण के मुद्दे को उठाना और हिंदू हितों की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट करना था.'

https://www.youtube.com/watch?v=0Fb9Wkht66k

पटौदी का सामाजिक ताना-बाना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से क़रीब 60 किलोमीटर और गुरुग्राम से क़रीब 30 किलोमीटर दूर बसा पटौदी अपने नवाबी इतिहास के लिए जाना जाता है. यहां की क़रीब बीस हज़ार की आबादी में अधिकतर हिंदू हैं. एक अनुमान के मुताबिक़, यहां चार-पांच हज़ार मुसलमान रहते हैं.

अंग्रेज़ों के शासनकाल के दौरान बनी पटौदी रियासत में पटौदी और आसपास के 52 गांव थे जिनमें अधिकतर आबादी हिंदू थी और सत्ता मुसलमान नवाबों के हाथ में थी. बॉलीवुड अभिनेता सैफ़ अली ख़ान इसी नवाब परिवार के वंशज हैं.

आज़ाद भारत में नवाबी तो ख़त्म हो गई लेकिन पटौदी का सांप्रदायिक भाईचारा बना रहा. यहां हिंदू-मुसलमान मिलकर रहते हैं. पटौदी के लोगों के मुताबिक़ यहां कभी किसी तरह की सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई है.

पटौदी
BBC
पटौदी

वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश कहते हैं, "पटौदी शांत शहर है, यहां लगभग 25 फ़ीसद मुसलमान हैं. हिंदुओं मुसलमानों में गहरा भाईचारा है. नवाबी इतिहास भी हिंदू-मुसलमान एकता का ही है. पटौदी में रामलीला यहां के नवाब ने ही शुरू करवाई थी. पटौदी में कभी कोई बड़ा सांप्रदायिक तनाव या दंगा कभी नहीं हुआ है."

04 जुलाई को हुई महापंचायत भी इसी रामलीला मैदान में हुई थी. पंचायत में शामिल रहे एक हिंदुवादी कार्यकर्ता कहते हैं, "पटौदी का एक इतिहास ये था कि यहां रामलीला नवाब ने शुरू करवाई थी और अब एक वर्तमान ये है कि हमें हिंदू हितों की रक्षा के लिए यहां महापंचायत करनी पड़ रही है. महापंचायत के बावजूद किसी तरह की कोई घटना नहीं हुई ये इस बात का प्रमाण है कि यहां अभी भी भाईचारा है."

हिंदुवादी युवाओं के समूह के पास ही बैठी एक बुज़ुर्ग महिला कहती हैं, "यहां सब मिलकर रहते हैं, हिंदुओं-मुसलमानों का एक दूसरे के घर आना जाना है, शादी ब्याह में भी बुलाते हैं. उन्हें हमसे कोई दिक्कत नहीं है, हमें उनसे कोई दिक्कत नहीं हैं."

https://www.youtube.com/watch?v=c21ESSZRJ7s

महापंचायत के बाद मुसलमानों में डर

पटौदी में मुसलमानों की आबादी शहर की जामा मस्जिद के आसपास के इलाके में सिमटी है. यहां लोग कैमरा देखकर बात करने से कतराते हैं.

एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "पटौदी का माहौल अच्छा है, महापंचायत के बाद भी कुछ नहीं हुआ है, हम कुछ बोलेंगे तो इससे माहौल ख़राब ही होगा."

70 साल के महमूद पटौदी के मूल निवासी नहीं हैं. वो बाहर से आकर यहां बसे हैं और कपड़े की दुकान चलाते हैं. महमूद कहते हैं, "मुसलमानों के डरने की वजह ये है कि पंचायत में मुसलमानों को खुली धमकियां दी गईं. हिंदुओं से कहा गया कि वो मुसलमानों को बाहर निकालें, उनसे दुकान-मकान खाली करवा लें."

महमूद
BBC
महमूद

महमूद कहते हैं, "सिर्फ़ पटौदी में ही मुसलमान रहते हैं, आसपास सब हिंदुओं के गांव हैं. आज हिंदू मुसलमानों को बाहर निकालने की बात कर रहे हैं. ये ज़्यादती है मगर हम इसके ख़िलाफ़ कर भी क्या कर सकते हैं? नारेबाज़ी से हमें बहुत बुरा लगा, लेकिन हम ख़ामोश रहे, हमने कुछ नहीं किया."

महमूद कहते हैं कि यहां सब लोग मिलजुल कर रह रहे हैं लेकिन महापंचायत होने के बाद से तनाव हो गया है. हाल के दिनों में पटौदी के आसपास के हिंदू बहुल गांवों में फेरी करने या किसी काम से आए मुसलमानों के साथ मारपीट और रोक-टोक की कई घटनाएं हुई हैं.

महमूद कहते हैं, "मुसलमान यदि आसपास किसी गांव में सामान बेचने जाते हैं तो उस पर आरोप लगा देते हैं. यदि किसी कारोबारी मुसलमान का गांव में कोई उधार है तो वो अब उसे मांगने भी नहीं जा पाएंगे. यदि मुसलमान फेरी वाले आसपास के गांवों में नहीं जा सकेंगे तो उनके घरों में भुखमरी के हालात हो जाएंगे."

भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के ज़िलाध्यक्ष राजू ख़ान
BBC
भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के ज़िलाध्यक्ष राजू ख़ान

वहीं भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के ज़िलाध्यक्ष राजू ख़ान कहते हैं, "पटौदी में सदियों पुराना भाईचारा है, हिंदू मुसलमान के लिए खड़ा रहता है और मुसलमान हिंदुओं के लिए खड़े रहते हैं, ये पता ही नहीं चला कि ये आयोजन क्यों किया गया."

राजू कहते हैं, "पंचायत में भड़काऊ नारेबाज़ी बाहर से आए लोगों ने की थी. बावजूद इसके पटौदी में सब शांत हैं."

वहीं 70 साल के हाजी अब्दुल रशीद कहते हैं, "बाहर के आदमी आकर यहां माहौल ख़राब करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं, हमें पता नहीं है. पटौदी के हिंदुओं ने कभी हमें परेशान नहीं किया. पंचायत में हुई नारेबाज़ी के बावजूद हमें डर नहीं है क्योंकि हमें यहां के लोगों पर भरोसा है."

हाजी अब्दुल रशीद
BBC
हाजी अब्दुल रशीद

क्या बढ़ रहे हैं 'लव जिहाद' के मामले?

भारत में हिंदुवादी संगठन आरोप लगाते हैं कि मुसलमान युवक अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर और हिंदू रूप धारण कर हिंदू युवतियों को अपने प्रेम जाल में फंसाते हैं और फिर उनका शोषण करते हैं. हिंदू संगठन इसे 'लव जिहाद' का नाम देते हैं. हालांकि ऐसे मामलों के बारे में कोई ठोस डेटा मौजूद नहीं हैं.

पटौदी में हुई हिंदू धर्म रक्षा संगठन की महापंचायत भी ऐसे मामलों के विरोध में आयोजित की गई थी. पंचायत में शामिल वक्ताओं ने दावा किया था कि पटौदी क्षेत्र में ऐसे कई मामले सामने आए हैं. कुछ वक्ताओं ने कहा था पटौदी और आसपास के गांवों में ऐसे 18 मामले सामने आ चुके हैं.

हालांकि जब बीबीसी ने हिंदुवादी संगठनों से इस तरह के मामलों में जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो एक भी मामले की जानकारी नहीं दी गई.

वहीं मानेसर के डीसीपी वरुण सांगला ने बीबीसी से कहा, "हाल के महीनों में पटौदी और आसपास के इलाके में इस तरह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है."

जब हमने उनसे पूछा कि क्या पटौदी या गुरुग्राम पुलिस ने लव जिहाद के मामले दर्ज किए हैं तो उन्होंने कहा, "हम इस तरह का कोई डाटा नहीं रखते हैं."

हिंदू धर्म रक्षा मंच से जुड़े संजीव यादव जानौला ने महापंचायत का संचालन किया था.

संजीव यादव जनौला
BBC
संजीव यादव जनौला

बीबीसी से जानौला कहते हैं, "महापंचायत में सिर्फ़ पटौदी ही नहीं दूर-दराज़ के गांवों से और शहरों से लोग और साधू संत आए थे. पटौदी क्षेत्र के अंदर बढ़ते हुए लव जिहाद, ज़मीन जिहाद, धर्मांतरण जैसी बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य से पंचायत की गई थी."

वो कहते हैं, "पटौदी क्षेत्र में शांति-पूर्ण माहौल वर्षों से चला आ रहा है, हमने चेतावनी दी है कि इस शांति को बिगाड़ने का काम कोई जेहादी ना करे."

पंचायत में हुई हिंसक नारेबाज़ी के सवाल पर जानौला कहते हैं, "इस तरह की नारेबाज़ी ग़लत थी, हमने पंचायत से पहले ही ये निर्णय लिया था कि हम सिर्फ़ हिंदू हित और सौहार्द की बाद करेंगे. किसे काटना है, किसे जलाना है ये हमारा काम नहीं है."

जानौला दावा करते हैं कि उनकी टीम को हाल के समय में पटौदी क्षेत्र में लव जिहाद के 18 मामले मिले हैं. हालांकि वो किसी भी एक मामले के बारे में ठोस जानकारी नहीं दे पाते.

जब हमने उनसे इस तरह की घटनाओं से 'पीड़ित परिवारों' के बारे में पूछा तो उनका कहना था, "जिसकी बेटी या बहन के साथ ये घटना होती है उसका परिवार ही पीछे हट जाता है. वो हमारे सामने तो कहते हैं कि ऐसी घटना हुई है लेकिन वो इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं करते हैं."

https://www.youtube.com/watch?v=u9Zero658DY

जब हमने ज़ोर देकर कहा कि जिस मुद्दे पर महापंचायत हो रही है, क्षेत्र की शांति को ख़तरे में डाला जा रहा है कम से कम उसका एक उदाहरण तो वो दें तो जानौला कहते हैं, "इस तरह के मामलों की पूरी रिपोर्ट हमारी समिति के पास है. जब ज़रूरत पड़ेगी इसे उजागर भी करेंगे, मैं पहले भी कह चुका हूं कि हिंदू समाज के पीड़ित लोग सामने आने से डरते हैं. समाज के डर से वो बोल नहीं पाते हैं."

भारत का संविधान बालिग़ नागरिकों को शादी करने का अधिकार देता है. अलग-अलग धर्मों के लोगों को भी शादी करने की आज़ादी है. फिर हिंदू रक्षा मंच जैसे संगठन ऐसी शादियों का विरोध क्यों करते हैं, इस पर जानौला कहते हैं, "भारत का संविधान पता नहीं क्या-क्या इजाज़त इस देश को देता है, वो जो भारत का क़ानून बना है, क्या वो सिर्फ़ हिंदुओं पर ही लागू होगा."

जानौला कहते हैं, "जब भी अंतर-धार्मिक विवाह होंगे, हम उनका विरोध करेंगे, भले ही पहचान सार्वजनिक करके ये विवाह हो रहे हैं. हिंदू बेटी की शादी हिंदू से ही होगी. किसी मुसलमान के घर में हम हिंदू बेटी जाने नहीं देंगे."

जानौला कहते हैं, "मुसलमान धर्म के लोग अपना नाम हिंदू रखकर गांव के अंदर घूमते हैं और हमारी भोली-भाली हिंदू लड़कियों को झांसे में लेते हैं और अपनी तरफ़ आकर्षित करते हैं."

"ये जेहादी कुछ समय के लिए उसे अपने पास रखते हैं, फिर छोड़ देते हैं. आमिर ख़ान ने भी अभी ऐसा ही किया है. छोटे स्तर से लेकर बडे़ स्तर तक एक ही तरह का जिहाद हो रहा है."

"हिंदू धर्म में अगर कोई अपनी पत्नी को छोड़ता है तो आसानी से दूसरी शादी नहीं होती है. लेकिन मुसलमानों में पत्नी छोड़कर दूसरी शादी आसान है."

वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश
BBC
वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश

वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश कहते हैं, "यदि दो लोग प्यार करते हैं तो मैं उसे लव जिहाद नहीं मानता, लेकिन टार्गेट करके, धर्म बदलकर हिंदू लड़की को फंसाना ग़लत है. मेरी जानकारी में अभी पटौदी में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है."

ओमप्रकाश कहते हैं, "हाल ही में लव जिहाद जैसा एक मामला आया था, लेकिन उसमें भी लड़की और लड़के के बीच आपस में समझौता हो गया था. कोई शिकायत नहीं हुई थी. बताते हैं कि ऐसे मामले हुए हैं लेकिन मेरी अपनी जानकारी में नहीं हैं. हां, दायें-बायें से इस तरह के मामलों की रिपोर्टें आती हैं, अब इस बारे में सुन रहे हैं तो कुछ तो हो रहा होगा."

पटौदी में नवाब परिवार के महल की दीवार की छांव में कुछ लोग ताश खेल रहे हैं. यहीं बैठे बुज़ुर्ग धर्मपाल बत्रा कहते हैं, "मैं महापंचायत में गया नहीं था. धर्म-धर्मांतरण, लव जिहाद के बारे में हमारे 52 गांवों की महापंचायत थी. लेकिन हमारे एरिया में तो इस तरह का कोई मामला हुआ नहीं है."

धर्मपाल बत्रा
BBC
धर्मपाल बत्रा

कथित लव जिहाद के मामलों पर टिप्पणी करते हुए बत्रा कहते हैं, "लड़का-लड़की दोनों साथ रहते हैं, जब बात बिगड़ जाती है तो लव जिहाद कह देते हैं."

पंचायत में हुई भड़काऊ नारेबाज़ी पर बत्रा कहते हैं, "हर किस्म का आदमी पंचायत में आता है, अपनी भाषा बोलता है. इससे माहौल ख़राब होता है. लेकिन यहां कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा है. पटौदी में सब मिलकर रहते हैं."

फिर ये भड़काऊ नारेबाज़ी क्यों की गई होगी, इस पर अपनी राय रखते हुए बत्रा कहते हैं, "कुछ लोग अपना नाम फेमस करने के लिए ये पंचायत कर रहे हैं. पटौदी 52 गांवों की रियासत है, इसलिए यहां पंचायत हुई है. आसपास के गांवों में मुसलमान भी सिर्फ़ यहीं हैं, इसलिए यहां पंचायत की होगी."

इसी दौरान बत्रा कहते हैं कि पंचायत से हिंदू-मुसलमानों की एकता को कोई ख़तरा नहीं है.

रामभक्त गोपाल
BBC
रामभक्त गोपाल

पुलिस ने दर्ज की एफ़आईआर

महापंचायत के दौरान जामिया में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी से चर्चा में रहे रामभक्त गोपाल नाम के हिंदुवादी कार्यकर्ता ने भी हिंसक भाषण दिया था. गुरुग्राम पुलिस ने रामभक्त गोपाल के ख़िलाफ़ रविवार को मुक़दमा दर्ज करने के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया है.

पुलिस ने एक स्थानीय हिंदू कारोबारी की शिकायत पर रामभक्त गोपाल उर्फ़ गोपाल शर्मा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए और 295ए के तहत मुक़दमा दर्ज किया. महापंचायत के दौरान करणी सेना प्रमुख और हरियाणा बीजेपी के प्रवक्ता सूरजपाल अमू ने भी भड़काऊ भाषण दिया था लेकिन उनके ख़िलाफ़ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता सुभाष बोकन ने गोपाल की गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए बीबीसी से कहा, "इस मामले में एफ़आईआर दर्ज हुई है, संबंधित व्यक्ति को गिरफ़्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है."

हिरासत में लिए जाने से पहले बीबीसी से बातचीत में रामभक्त गोपाल ने कहा था, "मेरे भाषण में कुछ शब्द थे, जिनका मैं उपयोग नहीं करना चाह रहा था, वहां ज़्यादा गर्मी और भीड़ होने के कारण अज्ञानता से मेरे मुंह से कुछ ऐसे शब्द निकल गए. उठा लेने की जगह मैं ब्याह करके लाने की बात कर रहा था."

गोपाल कहते हैं, "मैंने वहां सम्मान के साथ मुसलमान बहन-बेटियों को सनातन धर्म में लाने की बात कही है. मेरे ख़ून में श्री राम और भगवान परशुराम के संस्कार बहते हैं, जो मुझे किसी बहन बेटी का अपमान करना नहीं सिखाते हैं."

बीबीसी ने जब उनसे पूछा कि उनके भाषण से हिंसा भड़क सकती थी तो उनका कहना था, "मैं संविधान पर पूर्ण विश्वास करता हूं, न मैं हिंसा को समाधान समझता हूं और न उसका समर्थन करता हूं. मैं बस हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए समझाता हूं."

अपने भाषण में गोपाल ने संकेतों में हिंदू युवाओं से हथियार रखने का आह्वान भी किया था.

रामभक्त गोपाल
BBC
रामभक्त गोपाल

बीबीसी से गोपाल कहते हैं, "मैं युवाओं से हाथ में भगवा झंडा लेने का आह्वान कर रहा था. बाकी आप समझ रहे हैं. संविधान हमें आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने की इजाज़त देता है. शस्त्र और शास्त्र बेस्ट कांबिनेशन हैं. आत्मरक्षा के लिए हिंदुओं को प्रेरित करता रहूंगा. मैं सिर्फ़ देशहित और देश के सम्मान में बोलता हूं."

क्या उन्हें डर नहीं लगता, इस सवाल पर वो कहते हैं, "मुझे सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है, धमकियां मिलती हैं, लेकिन जब तक यूपी की गद्दी पर हमारे महाराज योगीजी हैं, तब तक मुझे किसी तरह का कोई भय नहीं है, हम कोशिश करेंगे कि दिल्ली की गद्दी पर भी वो बैठें. जब तक योगी जी हैं, रामभक्त गोपाल को कोई भय नहीं है."

पटौदी के हिंदुवादी युवाओं में गोपाल का समर्थन साफ़ नज़र आता है. ये युवा कहते हैं, गोपाल ने जो कहा सही कहा.

जितेंद्र कुमार नाम के एक स्थानीय हिंदूवादी कार्यकर्ता ने कहा, "हम लव जिहाद के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं और इसे जड़ से ख़त्म करके रहेंगे."

जितेंद्र कुमार
BBC
जितेंद्र कुमार

बुज़ुर्ग महिला की चिंता

जो हिंदुवादी युवा हमसे अपने विचारों को लेकर खुलकर बात करना चाहता थे, वो उस चौपाल पर ताला लगाकर चले गए जहां उन्होंने हमें बुलाया था.

शहर के आपसी भाईचारे की बात करने वाली बुज़ुर्ग औरत कहती हैं, "पटौदी का माहौल अब बहुत गंदा हो गया है, दुकानों पर लड़के खड़े रहते हैं, कोई बहन-बेटी बाहर नहीं निकल सकती. बेटियों को घर में बंद रखना पड़ रहा है. दुकानों पर जुट्ट के जुट्ट खड़े रहते हैं."

वे कहती हैं, "जब बेटियां घर से बाहर नहीं निकल पाएंगी, घरों में क़ैद रहेंगी तो वो चुस्त-दुरुस्त कैसे बनेंगी. सारा पहरा बेटियों पर ही है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+